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अक्सर ‘पहुंच से बाहर’ रहते हैं CM योगी, UP के भाजपाई नाराज, निकाय चुनावों में जनता के मूड से चिंतित

नई दिल्ली/लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

गाय-गंगा, हिन्दु-मुस्लिम, मंदिर-मस्जिद और योगा में उलझे धार्मिक सीएम महंत आदित्यनाथ की सरकार में धर्म प्राथमिकता है बाकी कानून व्यवस्था और विकास दोयम दर्जे की बाते हैं।

बीजेपी सरकार बनने के बाद बालू खदानों पर लगी रोक से बालू के दाम आसमान छू रहे हैं इस वजह से निर्माण कार्यों की रफ्तार भी सुस्त पड़ी है। सीएम के फरमान के बाद थाना-कोतवाली में बीजेपी कार्यकर्ताओं की सुनने वाला कोई नहीं है।

वहीं बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच एक बात तेजी से फैल रही है कि आदित्यनाथ अक्सर ‘नॉट रिचेबल’ यानि पहुंच से बाहर होते हैं। इस बात को लेकर बीजेपी कार्यकर्ता कानाफूसी करते हैं कि सीएम योगी ज्यादातर समय योग/ध्यान में बिताते हैं। इस अवस्था को तांद्र कहा जाता है, जिसका अर्थ है न सोना और न ही जागना यानि सीएम ऐसे समय में समाधि में हैं बताए जाते हैं।

नवंबर में होने हैं निकाय चुनाव- 

उत्तर प्रदेश में नवंबर में निकाय चुनाव प्रस्तावित हैं। लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जनता के मूड को भांपने के लिए नगर निगम/नगर पालिका चुनावों के बड़े मायने हैं। इसलिए सभी राजनीतिक पार्टियों ने तैयारियां शुरु भी कर दी हैं।

लेकिन वहीं बीजेपी कार्यकर्ता निकाय चुनावों को लेकर चिंतित दिखाई दे रही है, क्योंकि सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ की कार्यशैली से कानून व्यवस्था और विकास कार्यों को संदेश जनता तक सकारात्मक नहीं पहुंच पा रहा है।

ऊपर से प्रदेश में योगी ने स्पष्ट रूप से पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को किसी भी तरह की सिफारिशों के लिए मना कर दिया है। अब इस फैसले से बीजेपी के दरी बिछाने वाले कार्यकर्ताओं की तो विभागों में काम हो नहीं पा रहे लेकिन लेकिन सुविधा शुल्क की कीमत बढ़ाकर अन्य लोगो के काम हो जा रहे हैं।

कार्यकर्ता क्या भीड़ इकट्ठा करने के लिए है ?

योगी की बात पर पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम पार्टी में इसलिए शामिल नहीं हुए थे कि हम बस भीड़ इकट्ठा करने में जुटे रहें जबकि सरकार आने के बाद भी अन्य पार्टी के लोग पैसे देकर अपने काम करवा ले जाएं।

बीजेपी प्रदेश कार्यालय के वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि प्रदेश के भाजपाई सीएम योगी से इस बात से भी नाराज हैं कि  नदी के किनारे खुदाई पर प्रतिबंध होने से निर्माणकार्यों में इस्तेमाल होने वाली बालू की कीमतें आसमान छू रही हैं।

जिसकी वजह से प्रदेश में निर्माण कार्यो की रफ्तार काफी धीमी हो गई हैं। अपना दर्द बयां करते हुए प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी बोले कि क्या करें हमारा अपना घर ही बालू ना मिलने की वजह से छह महीने से अधूरा बना पड़ा है।

कार्यकर्ताओं की निराशा के बीच स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी को कैसे जीत मिलेगी ये सवाल भविष्य के गर्त में छुपा है।

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