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JNU-DU के बाद हैदराबाद वि.वि. में छात्रों ने भगवा सोच को नकारा, जीत रोहित वेमुला को समर्पित

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो

जेएनयू छात्र संघ चुनाव के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव और अब हैदराबाद विश्वविद्यालय चुनावों में बीजेपी की छात्र ईकाई एबीवीपी को करारा झटका मिला है।

जेएनयू में छात्रों ने कैम्पस के भगवाकरण की साजिशों को धता बताते हुए चारों प्रमुख पदों पर एबीवीपी को पटखनी देते हुए वामपंथी संगठनों के एलायंस को जिताया था। डीयू में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के पद एनएसयूआई के खाते में आए थे। अब हैदराबाद विश्वविद्यालय में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष समते सभी प्रमुख पद एलायंस फॉर सोशल जस्टिस के खाते में गए हैं।

इस जीत के बाद छात्रसंघ पदाधिकारियों ने कहा कि डॉ. रोहित वेमुला सांस्थानिक हत्या का गवाह बना हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में छात्र-छात्राओं ने भगवा सोच को नकारकर रोहित वेमुला के संघर्ष को सच्ची श्रद्धांजलि दी है।

हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और अंबेडकर स्टूडेंट एसोसिएशन (ASA) के गठबंधन वाली एलायंस फॉर सोशल जस्टिस (ASJ) ने शुक्रवार को आए नतीजों में सभी पदों पर जीत हासिल की।

बीजेपी की स्टूडेंट विंग एबीवीपी और कांग्रेस की स्टूडेंट विंग एनएसयूआई को हराते हुए एलायंस फॉर सोशल जस्टिस यानी एएसजे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, संयुक्त सचिव, सांस्कृतिक सचिव और खेल सचिव के पद पर कब्जा कर लिया। श्रीराग पी. छात्र संघ के नए अध्यक्ष के तौर पर चुने गए हैं, वहीं आरिफ अहमद को महासचिव चुना गया है।

उपाध्यक्ष का दोबारा होगा चुनाव- 

अटेंडेंस कम होने के चलते उपाध्यक्ष पद पर निर्वाचित उम्मीदवार का चुनाव रद्द कर दिया गया है। इस पद पर एएसजे उम्मीदवार ने जीत दर्ज की थी। उनकी उम्मीदवारी अयोग्य घोषित किए जाने के खिलाफ छात्रों ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया। इसलिए आधिकारिक तौर पर इस पद के नतीजे का ऐलान नहीं किया गया।

2016 में की थी रोहित वेमुला ने आत्महत्या- 

आपको बता दें, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में शोध कर रहे डॉ. रोहित वेमुला ने जातिगत भेदभाव और विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रताड़ना के बाद जनवरी 2016 में आत्महत्या कर ली थी। उनकी आत्महत्या के बाद रोहित को न्याय दिलाने के लिए देश के कई विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। आज भी रोहित को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे लोगों ने इस जीत को भगवाधारी मानसिकता के खिलाफ जीत बताया।

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