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हत्यारे गौ गुंडों और गाय पर राजनीति करने वालों के लिए नजीर हैं ‘गाय के मसीहा’ मजदूर जफरुद्दीन

नई दिल्ली/लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो 

देश में एक तरफ गौगुंडे गोवंश को लेकर मुस्लिमों के प्रति माहौल खराब कर रहे हैं। बीफ ले जाने, रखने के शक में ही भीड़ द्वारा मुस्लिमों की पीट-पीटकर हत्या हो रही है। ऐसे फर्जी गौभक्त गुंडों के लिए जफरुद्दीन की कहानी किसी नजीर से कम  नहीं। नेशनल जनमत बेजुबानों के इस सच्चे सेवक के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ से फंड उपलब्ध करवाने और बुलाकर सम्मानित करने की अपील करता है। इ

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घायल गायों के लिए मसीहा बन गए हैं जफरुद्दीन- 

औरेया निवासी जफरुद्दीन ने आवारा घूमने वाली घायल गायों की सेवा के लिये अपना जीवन समर्पित कर दिया है। पशु अस्पतालों में दवाएं मांग कर लाते हैं। जो दवाएं वहां नहीं मिलतीं, उसके लिए अपने जान-पहचान वालों से सहयोग लेते हैं। इतना ही नहीं वे किसानों से खेत किनारे लगे कटीले तार हटाने की अपील भी करते हैं।

दिहाड़ी मजदूर हैं जफरुद्दीन- 

औरैया के अछल्दा ब्लाक के हरचंदपुर निवासी जफरुद्दीन गरीब हैं। वे दिहाड़ी मजदूर हैं। परिवार में बूढ़े पिता व दो छोटे भाई के अलावा पत्नी और दो बच्चे हैं। खेती बाड़ी है नहीं, इसलिए दिहाड़ी मजदूरी करते हैं। सुबह काम पर जाने से पहले और शाम को लौटने पर वे गायों की सेवा में जुट जाते हैं।

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कैसे जागा गऊ प्रेम- 

जफरुद्दीन बताते हैं कि करीब तीन साल पहले खेत की बाड़ में लगे कटीले तार से एक गाय घायल हो गई थी। जब वह उसके पास गए तो उसने हाथ पर जीभ फेरना शुरू कर दिया। फिर जफरुद्दीन उसे घर ले आए और उसके चोट पर दवाएं लगाईं। यही से उनका मन गौ सेवा में रम गया। उस गाय को उन्होंने अपने घर पर ही रख लिया। धीरे-धीरे गाय ठीक हो गई और कुछ समय बाद दूध भी देने लगी। इस तरह उनके परिवार के लिए दूध का इंतजाम हो गया।

जहां भी घायल गाय दिखती हैं घर ले आते हैं- 

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अब गौ प्रेम इतना बढ़ गया है जफरुद्दीन का की उन्हें जहां भी कटीले तार से घायल गाय दिखती हैं, उसे अपने घर ले आते हैं। इलाज के दौरान गाय को पकड़ने के लिए पड़ोसियों की मदद लेते हैं। अब तक करीब 100 से ज्यादा गायों की मरहम पट्टी करके इलाज कर चुके हैं। इन दिनों वे अपने घर पर इलाज के बाद ठीक हुई तीन गायों को रखे हुए हैं। बाकी को छोड़ दिया। चारे का इंतजाम आसपास के गांवों से मांग कर करते हैं।

नेशनल जनमत यूपी के मुख्यमंत्री से अपील करता है कि ऐसे सच्चे गौभक्तो को बुलाकर सम्मानित करना चाहिए ताकि वो ऐसे बेजुबानों की और भी मदद कर सके।

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