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नेहरू मंत्रिमंडल में जो ओहदा बाबासाहेब का था, बीजेपी में वही कद मेरा है- स्वामी प्रसाद मौर्या

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

कभी बसपा सरकार में कद्दावर नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे  स्वामी प्रसाद मौर्या को भाजपा में रहकर अपनी हैसियत का अंदाजा अब होने लगा है. अब वर्तमान योगी सरकार में श्रम मंत्री बनाए गए स्वामी प्रसाद दिल बहलाने के लिए अपनी तुलना बाबा साहब से कर रहे हैं.उनका कहना है कि बाबा साहब भी नेहरू सरकार में लेबर मिनिस्टर थे और मैं योगी सरकार में लेबर मिनिस्टर हूं।

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योगी सरकार में लेबर मिनिस्टर स्वामी प्रसाद मौर्य को एहसास हो रहा है कि उनका ओहदा बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के बराबर हो गया है। यह बात उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कही। दरअसल योगी सरकार के 100 दिन के काम गिनाने गए स्वामी प्रसाद मौर्य से पत्रकारों ने पूछा था कि वे लंबे समय तक बहुजन समाज पार्टी में नंबर दो की पोजिशन पर रहे हैं, पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के भी करीबी थे। लेकिन योगी सरकार में उन्हें लो प्रोफाइल वाली लेबर मिनिस्ट्री का मंत्री बनाया गया है ऐसे में उन्हें कैसा महसूस होता है।

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इस सवाल का जवाब देते हुए स्वामी प्रसाद ने कहा कि योगी सरकार में यह ओहदा पाने पर मैं गर्वान्वित महसूस करता हूं। क्योंकि यूपी कैबिनेट में मेरा वही ओहदा है जो डॉ. अंबेडकर का नेहरू मंत्रीमंडल में था। “मुझे यूपी सरकार में श्रम मंत्री होने पर गर्व है।”

बाबा साहेब ने दिया था इस्तीफा आप कब देंगे- 

स्वामी प्रसाद मौर्या के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि बाबा साहेब ने तो मुद्दोंं पर इस्तीफा दे दिया था आप ऐसा कब करेंगे। तुलना करने से पहले थोड़ा तो सोचा होता कि आप किसकी बात कर रहे हैं।

बता दें कि बाबा साहब डॉ.अंबेडकर ने वर्ष 1951 में महिला सशक्तिकरण का हिन्दू संहिता विधेयक पारित करवाने का प्रयास किया था। इस बिल के पारित न होने पर स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था। वहीं यूपी में जिस तरह से महिला उत्पीड़न की घटनाएं सामने आ रही हैं, उनपर स्वामी प्रसाद मौर्य मुंह सिलकर बैठे हुए हैं।

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आती रही हैं नाराजगी की खबरें-

यूपी विधानसभा के टिकट बंटवारे के बाद उपेक्षित स्वामी प्रसाद मौर्य ने अमित शाह पर धोखा देने का आरोप लगाते हुए कहा था कि अमित शाह ने 30 सीटों का लालच देकर बसपा छुड़वाई थी मगर अब 3 सीट भी नहीं दे रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बेटा-बेटी सहित अपने 30 करीबियों को टिकट देने की मांग की थी मगर बीजेपी ने ऐसा करने से इंकार कर दिया था।

ओबीसी सम्मेलनों में नहीं मिला था महत्व- 

इसके अलावा बीजेपी के द्वारा आयोजित पिछड़ा वर्ग सम्मेलनों में भी कोई खास जिम्मेदारी ना दिए जाने से स्वामी प्रसाद मौर्य नाराज हो गए थे. तकरीबन दो महीने तक पार्टी के मंचों पर नहीं दिखे थे. इसके बाद मंत्री बनाकर उनकी नाराजगी कम करने की कोशिश की गई थी.

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