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कलियुग के द्रोणाचार्य बजरंग त्रिपाठी ने लगाया अवनीश यादव के सपनों पर ग्रहण

आजमगढ़। नेशनल जनमत ब्यूरो।

कभी  द्रोणाचार्य जैसे धूर्त , मक्कार औऱ जातिवादी गुरू ने अपने एक होनहार शिष्य एकलव्य का अंगूठा कटवाकर उसके तीर चलाने के हुनर को बर्बाद कर दिया था. द्रोणाचार्य की मानसिकता के लोग आज भी समाज में एकलव्यों का जीवन बर्बाद कर रहे हैं.

ऐसा ही एक मामला आजमगढ़ जिले के बेलइसा के चिल्ड्रेन सीनियर सेकंडरी स्कूल का है. जहां फीस का स्टेटमेंट मांगने पर स्कूल मैनेजर बजरंग त्रिपाठी ने 10 वीं कक्षा के छात्र अविनाश यादव की जिंदगी बर्बाद कर दी.

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क्या था पूरा मामला- 

इस देश की शिक्षा व्यवस्था को कोसते हुए अवनीश अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि  ‘इतना लड़ने के बाद भी मैं हार गया,वाह रे मेरा देश. वाह रे इसकी शिक्षा व्यवस्था.’

दरअसल , अवनीश की कहानी को हम सबके सामने लाने का श्रेय इलाहाबाद विश्वविद्यालय की पूर्व उपाध्यक्ष शालू यादव को जाता है . शालू यादव अपनी फेसबुक वॉल पर अवनीश यादव की कहानी लिखते हुए कहती हैं कि ,

इतना लड़ने के बाद भी मैं हार गया. वाह रे मेरा देश. वाह रे इसकी शिक्षा व्यवस्था ‘. ये स्टेटमेंट है 18-19 साल के हाईस्कूल के छात्र ‘अवनीश यादव’ का . अवनीश आजमगढ़ बेलइसा के ‘चिल्ड्रेन सीनियर सेकंडरी स्कूल’ के छात्र है.

इनके पिता जी ने स्कूल की मोटी फीस का साल भर का स्टेटमेंट मांग लिया. स्कूल मैनेजमेंट ने स्कूल फीस का स्टेटमेंट तो नही दिया लेकिन ‘अवनीश’ को ‘टीसी’ दी और स्कूल से निकाल दिया. स्कूल मेनेजर ‘बजरंग त्रिपाठी’ जो छात्रो से साल भर रीढ़ तोड़ देने वाली फीस वसूलते है उन्होंने एक बार भी नही सोचा कि छात्र का इसी बार दसवी का बोर्ड एग्जाम है.

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स्कूल से निकाल देने पर उसका एक साल बर्बाद हो जायेगा. इतना सब होने पर भी ‘अवनीश’ और उनके पिता ने हार नही मानी. अवनीश बताते है कि उन्होंने कक्षा 6ठी की एक किताब में ‘बाल अधिकारो और बाल आयोग’ के विषय में पढ़ा था.

बाल आयोग में कि शिकायत- 

उसी से प्रेरित होकर इन्होंने ‘बाल आयोग’ में स्कूल के तानाशाही रवैये की शिकायत दर्ज करायी. बाल आयोग के हस्तक्षेप के बाद स्कूल में उनका पुन: एडमिशन हुआ. अवनीश बताते है कि इस पूरी लड़ाई के दौरान उन्हें राष्ट्रपिता ‘गाँधी’ जी का कथन”हो सकता है आप कभी न जान सके की आपके काम का क्या परिणाम हुआ, लेकिन यदि आप कुछ करेंगे नही तो कोई परिणाम नही होगा’.,  ने प्रेणना दी.

अवनीश अपनी लड़ाई जीत चुका था. लेकिन आज जब सीबीएससी बोर्ड दसवी के नतीजे आये तो उन्हे परीक्षा से अनुपस्थित बताकर उनका परिणाम शून्य बताया गया. अवनीश अपनी ऍफ़ बी पोस्ट में बेहद निराश दिखे. मात्र 18 -19 साल का एक लड़का जो पूरे भ्रष्ट एजुकेशन सिस्टम से लड़ रहा है उसका यूँ हार जाना हमारे समाज की कमजोरी है.

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हमारी कमजोरी है. पूरे देश भर जब शिक्षा के निजीकरण की पुरजोर कोशिश की जा रही है. फीस वृद्धि से लेकर, फेलोशिप रोकने की कवायद की जा रही है. जब फीस वृद्धि के ख़िलाफ लड़ रहे पंजाब यूनिवर्सिटी, जेएनयू, के छात्रो का बर्बर दमन हो रहा है. तब इस गुमनाम साथी की ये लड़ाई बहुत मायने रखती है.

उसे हारने ना देना बहुत मायने रखता है. साथ आईये, आवाज उठाईये और ‘अवनीश’ की लड़ाई को ये मानकर चलिए हम सबकी लड़ाई है.

अब सोशल मीडिया पर अवनीश का मामला छा गया है. यहां मौजूद हर आदमी अवनीश के लिए न्याय की  मांग के साथ ही जातिवादी बजरंग त्रिपाठी को सख्त से सख्त सजा देने की मांग कर रहा है.

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