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आरक्षण और EVM छेड़छाड़ के विरोध में मोदी सरकार के खिलाफ बामसेफ का हल्ला बोल 7 जुलाई से

नई दिल्ली/पटना। नेशनल जनमत ब्यूरो 

संविधान से मिले हिस्सेदारी के अधिकार को मोदी सरकार धीरे-धीरे खत्म करती जा रही है। देश की बड़ी परीक्षाओं मेडीकल से लेकर इंजीनियरिंग तक मूलनिवासी ओबीसी-एससी-एसटी वर्ग के छात्रों को रोकने का संघीय कुचक्र रचा जा रहा है। इस कुचक्र के खिलाफ लोगों को जागरूक करके संघर्ष के लिए तैयार करने की जरूरत है।

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बिहार के गया में आयोजित बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ के बिहार राज्य के 18 वें अधिवेशन में आरक्षण और ईवीएम में की जा रही गड़बड़ी को प्रमुखता से उठाया गया। अध्यक्षता कर रहे बामसेफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बामन मेश्राम ने ेकहा कि हमें ये समझने की जरूरत है कि आरक्षण विरोधी बीजेपी सत्ता में आई कैसे उसके लिए आपको ईवीएम में हुई गड़बड़ी का खेल समझना होगा।

पारदर्शी चुनाव के लिए ईवीएम हटाना जरूरी- 

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वामन मेश्राम ने कहा कि गलत तरीकों से शासन सत्ता हासिल करके भगवाधारी लोग आज संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या कर रहे हैं। इसलिए मुक्त निष्पक्ष और पारदर्श चुनाव कराने के लिए लोकतंत्र का गला घोंटने वाली इस ईवीएम मशीन का हटना जरूरी है। ईवीएम से चुनाव जीतकर मनुवादी हम सबके अधिकारों पर डाका डाल रहे हैं।

ओबीसी में क्रीमीलेयर असंवैधानिक है-

इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी आरक्षण में क्रीमीलेयर के प्रावधान का संविधान में कहीं जिक्र नहीं ये पूरी तरीके असंवैधानिक निर्णय है। ओबीसी का क्रीमीलेयर हटाने और आरक्षित वर्ग को पद्दोन्नति में आरक्षण देने से ही समतामूलक समाज की स्थापना हो सकती है।

 हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाए रखना चाहती है बीजेपी- 

वामन मेश्राम ने कहा कि बीजेपी हिन्दू मुस्लिम का मामला उछालकर इनको आपस में लड़ाए रखना चाहती है इसलिए बीजेपी राज में मुस्लिमों की भीड़ द्वारा सुनियोजित तरीके से हत्याएं की जा रही हैं, जो देश के लिहाज से बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

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7 जुलाई से केन्द्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन- 

मुस्लिम- दलित हत्या, आरक्षण और ईवीएम से छेड़छाड़ जैसे मुद्दों को लेकर बामसेफ एवं राष्ट्रीय मूलनिवासी संघ सात जुलाई से पूरे बिहार में प्रदर्शन शुरू करेगी। धीरे-धीरे पूरे देश में इस सरकार की तानाशाही के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।

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इस मौके पर डॉ. अजय कुमार, डॉ. अनुज लुगुन, डॉ. कर्यानंद आर्य, विश्वनाथ चौधरी, शैलेन्द्र कुमार, विद्याज्योति, सुनीता सोनू, इमरोज आलम, उमा साहनी समेत ओबीसी, एससी, एसटी संगठनो से जुड़े तमाम सक्रिय कार्यकर्ता और उत्साही मूलनिवासी लोग तकरीबन 5 हजार की संख्या में मौजूद रहे।

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