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महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध की स्मृति में आयोजित बौद्धिक सम्मेलन में 21-22 को रीवा में जुटेंगे दिग्गज

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

कलियुग के परमप्रताप से सोशल मीडिया की ऐसी ताकत बहुजनों के हाथ में लगी है जिसने देश की बहुसंख्यक, मेहनतकश आबादी को गांव, खेत, खलिहान से बाहर निकालकर उन्हे ये सोचने पर मजबूर किया कि कलियुग में असली ताकत खेत-खलिहान में नहीं पढ़ने-लिखने और सूचना के प्रवाह तंत्र में निहित है।

इससे पहले जातिवादियों द्वारा धर्म की चासनी में लपेटकर वर्ण व्यवस्था को थाल में ऐसे सजाकर पेश किया गया था ताकि वंचित वर्ग की बहुसंख्यक आबादी पढ़ने-लिखने से दूर रहे और हर जाति अपने पुश्तैनी काम में उलझी रहे।

कुर्मी खेती, नाई बाल काटना, तेली तेल निकालना, अहीर दूध व्यवसाय, गड़रिया पशुपालन और काछी को सब्जी उगाने के काम में लगाकर उनको शिक्षा से वंचित रखने की साजिश रची गई और खुद शिक्षा हासिल कर क्रूर जातिवादी लोग बुद्धिजीवी होने का राग अलापते रहे।

बौद्धिक संघ का मानना है- 

बौद्धिक संघ का मानना है कि पिछड़ेपन की मौजूदा परिभाषा के अनुसार जो समाज जितना अधिक लेखन, साहित्य, बौद्धिक कार्यों में पीछे है वही पिछड़ा है।

ऐसे ही प्रतिभाओं को एक मंच पर लाने के लिए ही 16 जुलाई 2017 को गाजियाबाद में शुरू किए गए बौद्धिक संघ सम्मेलनों की श्रृंखला का पांचवा पड़ाव मध्य प्रदेश के रीवा जिले तक पहुंच गया है।

क्या है कार्यक्रम- 

कार्यक्रम आयोजक बौद्धिक संघ मध्य प्रदेश के अध्यक्ष न्यूरो सर्जन डॉ. दिनेश पटेल के अनुसार पिछड़े वर्ग की सभी जातियों को खेती-किसानी या उनके पूर्वजों के पुस्तैनी व्यवसाय में सदियों से उलझाए रखा गया। अब हम इसी समाज से बुद्धिजीवी, साहित्यकार, पत्रकार, कवि और लेखकों की पौध तैयार करना चाहते हैं।

बौद्धिक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार सचान होरी का कहना है कि जो समाज अपने बौद्धिक वर्ग का जितना लालन, पालन और पोषण करता है वह स्थाई रूप से अग्रणी होता है और सामाजिक, राजनैतिक क्रांति का रास्ता लेखन से होकर ही गुजरता है।

बौद्धिक संघ मध्य प्रदेश के उपाध्यक्ष डॉ. महेश सिंह ने नेशनल जनमत को बताया कि महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध की स्मृति में 21 व 22 अप्रेल को सरदार पटेल सेवा संस्थान निराला नगर रीवा में आयोजित कार्यक्रम के दो मुख्य चरण हैं।

21 अप्रेल कवि सम्मेलन- 

21 अप्रेल को शाम 7 बजे से 11 बजे रात्रि तक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। जिसकी अध्यक्षता राजकुमार सचान होरी प्रसिद्ध कवि एवं साहित्यकार करेंगे। संचालन गाजियाबाद से पहुंच रहे कवि इंद्रप्रसाद अकेला करेंगे।

इस दौरान हरि सिंह पाल, पूर्व निदेशक आकाशवाणी दिल्ली, बाबा कानपुरी हास्य कवि गौतमबुद्ध नगर, बलराम सरस गीतकार एटा, मंजू गौतम कवयित्री लखनऊ, राम नरेश रमन झांसी, अशोक अंचल शिकोहाबाद, बाबू लाल दाहिया सतना, सुमन कुमारी लखनऊ तथा मप्र के कई चर्चित कवि काव्यपाठ करेंगे।

22 अप्रेल बौद्धिक सम्मेलन- 

22 अप्रेल दिन रविवार को पटेल सेवा संस्थान में ही 11 बजे से शाम 4 बजे तक बौद्धिक संघ सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

मीडिया में भागीदारी क्यों और कैसे? – नीरज भाई पटेल, संपादक नेशनल जनमत, मान्यता प्राप्त पत्रकार, लखनऊ

बौद्धिक संघ के मुख्य कार्यक्रम -बलराम सरस, वरिष्ठ साहित्यकार एटा, उ प्र

ओबीसी साहित्य विमर्श और दलित साहित्य से समन्वय – हरिसिंह पाल वरिष्ठ साहित्यकार, नई दिल्ली

बुद्धि जीवी कौन? और उनके सामाजिक दायित्व – राजकुमार सचान होरी, वरिष्ठ साहित्यकार – गाजियाबाद

वैज्ञानिक धर्म और मूल निवासियों की राह – राजीव पटेल, चिन्तक और वरिष्ठ लेखक- पटना

कार्यक्रम के दौरान महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध द्वारा रचित महाकाव्य ‘बुद्ध चरित्र चन्द्रोदय ‘ का संगीतमय प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा।

23 अप्रेल बौद्धिक संघ सेमिनार-

23 अप्रैल का बौद्धिक संघ का सेमिनार 11 बजे से सरदार पटेल डिग्री कालेज रीवा में आयोजित किया जाएगा। पुस्तकों के माध्यम से बौद्धिक क्रांति, बाबा कानपुरी वरिष्ठ कवि, लेख नोएडा, काव्य मंचों, नाटकों, ललित कलाओं से बौद्घिक उत्थान, इंद्र प्रसाद अकेला, राष्ट्रीय कवि, मुरादनगर गाजियाबाद

विनीत विक्रम बौद्ध क्रांतिकारी कवि- 

महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध पांच महाकाव्य लिखने वाले साहित्यकार और महाकवि थे। इनका जन्म 2 दिसम्बर 1925 को मध्यप्रदेश के सतना जिले के सोनवर्षा गांव में एक कुर्मी कृषक परिवार मे हुआ था।

आगरा विश्वविद्यालय से पोस्टग्रेजुएशन के बाद मध्य प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में शिक्षक, प्रवक्ता एवं प्राचार्य के पद पर कार्यरत रहे। 1984 में प्राचार्य पद से सेवानिवृत्त होकर पूर्ण रूप से सामाजिक कार्य और बौद्धिक चिंतन में जुड़ गए। बौद्ध धर्म एवं दर्शन का विशेष अध्ययन करते हुए 14 अक्टूबर 1985 को बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया।

समाज को बौद्धिक चिंतन देते हुए 27 फरवरी 2010 में आपका महापरिनिर्वाण हुआ।

प्रकाशित कृतियाँ-

5 महाकाव्य- चन्द्रगुप्त मौर्य, पाण्डवपुराण, जयदेव, चारूवाक, बुद्ध चरित्र चन्द्रोदय

2 खण्ड काव्य -शंबूक वध, नागौर का नाहर,

अन्य रचनाएं– सोमलता, करील के कांटे, कवित्तों के कतरे, गजरे, पहेली के पहलू, मुकरी के मोड़, चुटकुलों की चटनी सहित अन्य रचनाएं

गद्य रचनाएं– बुद्ध या राम, सम्यक संदेश, जातिवाद का सर्वेक्षण, धर्मपरिवर्तन क्यों? बौद्ध धर्म का स्वरूप, बौद्ध दर्शन के दृष्टिकोण,

सम्पादन- धर्म चक्र नामक वार्षिक बौद्ध पत्रिका के प्रधान संपादक

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