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36 जिंदगियां बचाने वाले बीलभद्र यादव का ऐलान “ब्लड बैंक नहीं तो शादी नहीं “

देवभोग (छत्तीसगढ़)- नेशनल जनमत ब्यूरो

जिस समय हिंसा, लूटपाट, हत्या, बलात्कार की खबरें आम होती जा रही है। ऐसे में 36 लोगों की जिंदगी बचाने की खबर रेगिस्तान में बारिश की बूंद की तरह लगती है. ये खबर भी ऐसे दौर में जब छत्तीसगढ़ का नाम लेते ही जेहन में नक्सली हिंसा और प्रतिहिंसा में मारे गए लोगों की खबरें आती हैं. इन खबरों के बीच छत्तीसगढ़ के देवभोग निवासी बीलभद्र यादव की जिंदादिली की चर्चा होना सुखद है। इन्होंने रक्तदान करके अभी तक 36 लोगों की जान बचाई है. बीलभद्र ने अपने मन में यह ठान रखा है कि वह पूरे जीवन जरूरतमंदों को रक्तदान करेंगे और वो भी बिना कोई शुल्क लिए।

ब्लड बैंक खुले बिना शादी नहींं करेंगे बीलभद्न-

बीलभद्र के रक्तदान करने का सिलासिला उस समय शुरू हुआ जब गांव की ही एक गरीब बच्ची को खून की जरूरत थी. परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी कि बाजार से खून खरीद कर बच्ची को दे सकें. तब बीलभद्र यादव ने रक्तदान कर उस मासूम बच्ची की जान बचाई। इस प्रयास के बाद बीलभद्र यादव ने जिंदगी भर जनसेवा में रक्तदान करने का निर्णय ले लिया।

अब तक बीलभद्र रक्तदान करके 36 लोगों की जिंदगी बचा चुके हैं. बीलभद्र की इच्छा है कि उनके गांव के आस पास ब्लड बैंक की स्थापना हो. उनका कहना है कि जब तक ब्लड बैंक की स्थापना नहीं हो जाती वो शादी नहीं करेंगे.

बाईक से उड़ीसा तक कर आए हैं रक्तदान-

बीलभद्र यादव पिछले चार साल से रक्तदान करते आए हैं। उन्हें कहीं से खबर मिल जाए कि किसी को रक्त की जरूरत है और वो खरीदने में सक्षम नहीं है, तो वे तुरंत जरूरतमंद से संपर्क साधते हैं। इसके बाद अपनी दोपहिया लेकर निकल जाते हैं। पिछले दिनों उन्होंने दोपहिया से करीब 300 किलोमीटर का सफर तय किया था और वे उड़ीसा के अस्पताल बलांगीर गए थे। जहां उन्होंने रक्तदान किया। रक्तदान करने के बाद वे अपने ही खर्च से वापस लौटे थे.बीलभद्र कहते हैं कि लोगों को खून देकर जिंदगी बचाकर दिल को सुकून मिलता है. ऐसा लगता है कि चलों ये जिंदगी किसी के काम तो आई.

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