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एक तरफ तो भगवान को दाता कहते हो, दूसरी तरफ मंदिरों में पैसे चढ़ा कर उसी दाता को भिखारी बना देते हो

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो । 

वो बाबा किसी के घर नहीं गया था किसी को बुलाने और कहने की अपनी लड़की मुझे दे दो ।

बाबा ने जो किया गलत किया, लेकिन ये लड़कियाँ जिनकी बेटियाँ है क्या इनके अच्छे बुरे की जिम्मेदारी उन माँ बाप की नहीं थी वो कैसे अपनी बेटी को उसके आश्रम में छोड़ आये ? भगवान के नाम पर ।

लड़कियों से छुटकारा पाने का एक शातिर तरीका अपना रखा है कुछ लोगों ने । धर्म के नाम पर कुछ भी कर लो, कोई कुछ कह ही नहीं सकता ।

लड़की शाम सहेलियों के साथ घर से बाहर जाने को या पिक्चर जाने को बोले तो घरवालो के सीने पर सांप लोट जाता है. छत की बालकनी में खड़ी हो जाए तो पूरे मोहल्ले में चर्चे होने लगते है. किसी से हंस कर बात कर ले तो मां-बाप शर्मिंदा महसूस करते है. रूढ़ियाँ बीच मे आ जाती है, परिवार की इज्जत पर बन आती।

– लेकिन उसी लड़की को साध्वी बनाकर ऐसे ढोंगियों के हवाले करते माँ बाप की इज्जत में बट्टा नहीं लगता ?

– अपने कलेजे के टुकड़े को बिना उसकी मर्जी के अपने से दूर कर किसी भेड़िए के पास छोड़ आते हैं तब तब इनकी आत्मा नहीं कचोटती ?

“ढोंगी बाबओं से भी पहले ऐसे भक्तों को जेल में डालना चाहिए, ये सब बाबा इन्ही भक्तों के खड़े किए हुए राक्षस हैं”

ये राक्षस धर्म नाम की अफीम चटाते रहते हैं और लोग पागल हुए ,जयकारे लगाते घूमते रहते हैं । जितनी सजा बाबा को मिले उससे अधिक सज़ा ऐसे माँ बाप को भी मिलनी चाहिए ।

अपील-

केन्द्र की मोदी सरकार में अगर हिम्मत है तो उसको चाहिए एक ऐसा बिल पास करें। जिससे हमारे मन्दिरों- मस्जिदों के चढ़ावो का 50% हर माह हमारे देश का कर्ज उतारने एवं कर्ज से मरते किसानों पर सर्वे कराकर मानक के अनुकूल उनको सहायता देने में खर्च हो। जिससे किसानों की दशा में सुधार हो और उस पैसे को सरकार देश के विकास पर खर्च कर सके ख़ासकर शिक्षा एवं स्वास्थ्य।

प्राप्त सूचना के आधार पर भारत में कुछ मन्दिरों की एक महीने की कमाई के ये आंकड़े आपको सोचने को मजबूर कर देंगे-

1. तिरुपति बालाजी- 1 हजार 325 करोड़

2. वैष्णौ देवी- 400 करोड़

3. रामकृष्ण मिशन- 200 करोड़

4. जगन्नाथपुरी- 160 करोड़

5. शिर्डी सांईबाबा- 100 करोड़

6. द्वारकाधीश- 50 करोड़

7. सिद्धी विनायक- 27 करोड़

8. वैधनाथ धाम देवगढ- 40 करोड़

9. अंबाजी गुजरात- 40 करोड़

10. त्रावणकोर- 35 करोड़

11. अयोध्या– 140 करोड़

12. काली माता मन्दिर कोलकाता 250 करोड़

13. पदमनाभन मंदिर- 5 करोड़

14. सालासर बालाजी- 300 करोड़

इसके अलावा भारत के छोटे बड़े मन्दिरों की सालाना आय 280 लाख करोड़*और *भारत का कुल बजट 15 लाख करोड़।

*अगर हर आदमी गरीब किसानों की मदद करे तो भारत से गरीबी महज साल भर मे हट सकती है। याद रहे भगवान तो केवल आपके प्यार का भूखा है, उसे पैसे से नहीं खरीदा जा सकता।

एक तरफ़ तो भगवान को दाता कहते हो दूसरी तरफ़ मंदिरो मे पैसे चढा कर उसी भगवान को भिखारी बना रखा है l

*वैसे भी आपके उस पैसे से भगवान नही भगवान के ठेकेदार मौज उड़ा रहे है

(लेखक मनोज कुमार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस से जुड़े हैं) 

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