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भक्तों के दिमाग में यह अच्छे से बैठा दिया गया है कि मोदी हारे तो देश में मुस्लिमों का राज आ जाएगा

नई दिल्ली। हिमांशु कुमार (नेशनल जनमत ब्यूरो)

भक्त मोदी के हर कदम का समर्थन क्यों करते हैं ? चाहे नोटबन्दी हो या जीएसटी, रेल किराये में बढ़ोत्तरी हो या विदेशी निवेश, भक्त मोदी के समर्थन में अपनी जान देने के लिये तैयार हैं।

आखिर युवाओं की ऐसी क्या मजबूरी है जो उन्हें भक्त बना देता है। असल में भक्तों को लगता है मोदी की हार मतलब मुसलमानों, ईसाइयों और कम्युनिस्टों की जीत। मुसलमानों, ईसाइयों और कम्युनिस्टों को दुश्मन बताने का काम राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने 9O साल से किया है,

मेरी एक भक्त से नोटबन्दी पर बात हुई…

जब मैनें भक्त को सभी तरह से घेरकर मनवा लिया कि नोटबन्दी से ना तो आतंकवाद पर रोक लगेगी, ना काले धन पर ना अमीरों को कोई नुकसान होगा, तो भक्त ने अपना ब्रह्मास्त्र निकाला,

बोला तो क्या गुरु तेग बहादुर को आरे से चिरवा देने वाले मुगलों की तरफ हो जाऊं ? यानि मोदी के विरोध का मतलब है मुगलों का समर्थन,
यह अलग बात है कि भारत के मुसलमानों का मुगलों से कोई लेना देना नहीं है।

लेकिन भक्त के दिमाग में यह अच्छे से बैठा दिया गया है कि मोदी का साथ छोड़ा तो मुसलमानों का राज आ जाएगा। नेहरू और इंदिरा गांधी और उनके परिवार को मुसलमान घोषित करने वाले मेसेज फैलाए जा रहे हैं।

संघ ने यह प्रचार करने में अपनी पूरी ताकत लगा दी है कि मोदी के अलावा हर पार्टी और नेता मुसलमानों और कम्युनिस्टों की तरफ हैं और ये लोग आतंकवादी व देशद्रोही हैं,

पूरी राजनीति को ऐसी झूठी ज़मीन पर किया जा रहा है, जहां रोज़गार और बराबरी की राजनीति गायब है और झूठा प्रचार राजनीति बन गया है,

यह धारणाओं का युद्ध है, हमें धारणाओं और झूठ के काले बादलों को उड़ाने के लिये युवाओं को सच्ची जानकारी देनी पड़ेगी।

(लेखक मानवाधिकार कार्यकर्ता है ंफिलहाल हिमांचल प्रदेश में रह रहे हैं। ) 

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