You are here

भीम आर्मी की बढ़ती ताकत से बेचैन हैं मायावती, कल ही जाएंगी सहारनपुर !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

सहारनपुर में दलितों पर हुए अत्याचार के विरोध में सामंतवादी ताकतों के खिलाफ लड़ने वाली भीम सेना ने रविवार को जंतर मंतर पर जबरदस्त प्रदर्शन किया. इस दौरान भीम आर्मी के मुखिया रावण ने खुले मंच से आव्हान किया कि दलितों के कोटे से चुने जाने वाले नेता अगर दलितों के काम ना आए तो उन्हे सदन में मत पहुंचने दो. ऐसा लगता है कि बसपा अध्यक्ष मायावती ने इस भीड़ और भाषण को गौर से देखा और सुना है. इसके बाद ही 23 मई को सहारनपुर जाने का फैसला ले लिया है.

इसे भी पढ़े- दलित कोटे से जीतकर जो दलितों के काम ना आए उसे फिर जीतने मत दो- रावण

मायावती की चुप्पी पर उठे थे सवाल-

भूतपूर्व आई.जी.और सामाजिक चिंतक एस.आर.दारापुरी ने लखनऊ में मायावती की चुप्पी पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा था कि एक तरफ मायावती हरीशंकर तिवारी के घर दबिश को लेकर बसपा के प्रदेश अध्यक्ष को गोरखपुर भेजती हैं और विधान सभा से वाक-आऊट कराती है वहीं मायावती सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में दलितों पर जाति-सामंतों द्वारा किये गए हमले पर खामोश हैं.जिस में दलितों के 60 घर बुरी तरह से जला दिए गए, 14 दलित औरतें, बच्चे तथा बूढ़े लोग घायल हुए ना खुद गईं ना ही किसी को वहां भेजा. वह केवल एक सामान्य बयान देकर रस्म अदायगी करके बैठ जाती है.

शब्बीपुर जाएंगी मायावती-

तयशुदा कार्यक्रम के तहत मायावती शब्बीपुर जाएंगी. यह गांव वही है जहां दलितों और ठाकुरों के बीच हिंसक झड़प हुई थी.इसके बाद दलितों के 60 घर जला दिए गए थे. जारी किये गए कार्यक्रम के अनुसार मायावती 23 मई को सुबह 8 बजे अपने दिल्ली निवास से सड़क मार्ग से घटनास्थल के लिए प्रस्थान करेंगी.

समाज से चुनकर भी लोग पार्टियों के गुलाम बने रहते हैं- 

भीड़ से खचाखच भरे जंतर-मंतर परिसर में उत्साह से लबरेज चन्द्रशेखर आजाद रावण ने कहा था कि वो सांसद जिन्होंने सहारनपुर हिंसा के विरोध में पार्टी के डर से आवाज नहीं उठाई, वे दलित समाज के दुश्मन हैं. आजाद ने आंदोलन में आए हुए लोगों से आह्वान किया कि ऐसे समाज विरोधी लोग अगली बार जीतकर संसद में नहीं जाने चाहिए

Related posts

Share
Share