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भीम आर्मी के ‘रावण’ पर एफआईआर के विरोध में तीन गांवों ने नहर में बहाया हिन्दू धर्म

सहारनपुर। नीरज भाई पटेल

सहारनपुर में पहले अंबेडकर फिर महाराणा प्रताप यात्रा के नाम पर हुए बवाल में दलित संगठन लगातार प्रशासन पर एकतरफा और जातिगत दुराग्रह पूर्ण कार्रवाई करने का आरोप लगा रहे हैं. इसी बीच भीम आर्मी के चन्द्रशेखर आजाद उर्फ रावण और अन्य दलित युवाओं पर एफआईआर ने दलितों के आक्रोश को और बढ़ा दिया. आक्रोशित तीन गांवों के दलित समाज के 180 परिवारों ने एकतरफा कार्रवाई से क्षुब्ध होकर बौद्ध अपनाने का ऐलान किया. इसके साथ ही उन्होंने नहर में देवी-देवताओं की मूर्तियां एवं कैलेंडर का विसर्जन कर दिया.

सरकार और प्रशासन पर लगाए जातिवाद के आरोप-

180 परिवारों द्वारा बौद्ध धर्म अपनाने के दावे से प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है. हालांकि एसएसपी ने इस पूरे मामले में जानकारी होने से इनकार किया है. दलितों ने कहा कि हमारे ऊपर जब हमले हो रहे थे, जब हमारे घरों में आग लगाई जा रही थी, जब हमारी बहन-बेटियों को मारा-पीटा जा रहा था, तब हिंदू धर्म के ये ठेकेदार कहां थे.

दलितों ने साफ कहा जब तक हम हिन्दू हैं दलित बने रहेंगे इसलिए हम लोग अब हिंदू धर्म को ही छोड़ रहे हैं. इसके बाद दलितों ने अपने घरों में रखीं हिंदू देवी-देवताओं की तश्वीरें और मूर्तियां भी पास की नहर में बहा दी. जिन लोगों ने हिंदू धर्म छोड़ा है उनमें शब्बीरपुर, रूपड़ी, ईगरी व कपूरपुर के लोग शामिल हैं.

गिरफ्तार युवाओं को नहीं छोड़ा तो सभी दलित छोड़ देंगे हिन्दू धर्म-

गांव वालों का कहना है कि पुलिस प्रशासन भीम आर्मी को बदनाम करने के लिए साजिश के तहत दंगा फैलाने का आरोप लगा रही हैं. दलितों का उत्पीड़न किया जा रहा है. दलित समाज के सैकड़ों लोगों ने चेतावनी दी कि यदि भीम आर्मी के गिरफ्तार युवाओं को नहीं छोड़ा गया तो सभी दलित हिंदू धर्म त्याग कर बौद्ध धर्म अपना लेंगें.

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