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भ्रष्टाचार के नाम पर टूटे महागठबंधन में 19 के मुकाबले, नीतीश-मोदी सरकार में 22 दागी मंत्री शामिल

नई दिल्ली। नेशनल  जनमत ब्यूरो 

भ्रष्टाचार और राजनैतिक सफाई के नाम पर नीतीश कुमार द्वारा तोड़े गए महागठबंधन के मुकाबले नई बनी नीतीश-बीजेपी गठबंधन सरकार में दागियों की संख्या ज्यादा है। एडीआर की इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ईमानदारी के पुरोधा नीतीश कुमार और देश की पवित्र पार्टी बीजेपी के गठबंधन पर सोशल मीडिया पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि भाजपा के साथ मिलकर नीतीश कुमार की अगुवाई में बनी बिहार की नई सरकार के 75 फीसदी से ज्यादा मंत्रियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं.

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बिहार की पिछली महागठबंधन सरकार में दागी मंत्रियों की संख्या तुलनात्मक रूप से कम थी. महागठबंधन सरकार में नीतीश की पार्टी जदयू के साथ राजद और कांग्रेस शामिल थी.

रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में जदयू-भाजपा-लोजपा की मौजूदा सरकार के 29 में से 22 मंत्रियों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं जबकि पिछली महागठबंधन सरकार में कुल 28 मंत्रियों में से 19 मंत्री दागी थे.

इस बारे में वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल लिखते हैं कि-

तो बिहार के कुल 29 में से 22 नए मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे हैं. यानी हर तीन में दो मंत्री क्रिमिनल केस लड़ रहा है.

मौजूदा मंत्रिमंडल का लेखा-जोखा इस प्रकार है.

हत्या- 1 मंत्री पर (नीतीश कुमार)

हत्या की कोशिश – 2

खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाना-4

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ठगी, प्रॉपर्टी हड़पना- 1

चोरी- 3

आर्थिक घोटाला- 2

महिला के खिलाफ अपराध- 1

चुनाव के दौरान फर्जीवाड़ा- 6

चुनाव के दौरान दबाव डालना- 2

किसी को जबरन कब्जे में रखना- 2

समुदायों के बीच कटुता फैलाना- 1

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यानी एक एक मंत्री पर कई कई केस हैं. ये गंभीर मामलों का लेखाजोखा है, जिसे इन मंत्रियों ने अपने एफिडेविट में दर्ज किया है.

पिछली सरकार में 28 में से 19 मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे थे. यानी सफाई के नाम पर और भी दागदार मंत्रिमंडल बिहार की जनता पर थोप दिया गया है.

स्रोत- ADR का एफिडेविट का अध्ययन, जिसे आप चुनाव आयोग की वेबसाइट पर चेक कर सकते हैं।

एडीआर का लिंक- 

 https://adrindia.org/content/analysis-criminal-background-financial-education-gender-and-other-details-ministers-bihar-0

9 पर गंभीर मामले हैं- 

बिहार इलेक्शन वॉच और एडीआर की ओर से मुख्यमंत्री सहित 29 मंत्रियों के चुनावी हलफनामे के विश्लेषण के बाद यह रिपोर्ट तैयार की गई. रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा सरकार के जिन 22 मंत्रियों ने अपने ख़िलाफ़ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, उनमें नौ के ख़िलाफ़ गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं.

नई सरकार के नौ मंत्रियों की शैक्षणिक योग्यता 8वीं पास से लेकर 12वीं पास तक है, जबकि 18 मंत्री स्नातक या इससे ऊंची डिग्री वाले हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली कैबिनेट में दो महिलाएं शामिल की गई थीं, जबकि नई कैबिनेट में सिर्फ एक महिला हैं.

बहरहाल, नीतीश की अगुवाई वाली नई कैबिनेट में करोड़पतियों की संख्या घटकर 21 हो गई है, जबकि पिछली सरकार में इनकी संख्या 22 थी. 29 मंत्रियों की औसत संपत्ति 2.46 करोड़ रुपये है.

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26 जुलाई को जदयू अध्यक्ष नीतीश ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था, जिससे दो साल पुरानी महागठबंधन सरकार गिर गई थी. लेकिन इस्तीफे के कुछ ही घंटों के भीतर उन्होंने भाजपा और लोजपा के साथ मिलकर नई सरकार बना ली.

27 जुलाई को ही नीतीश को दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई, साथ ही भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी को राज्य का उप-मुख्यमंत्री बनाया गया.

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