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बेतुका बयान देने वाले चीफ प्रॉक्टर ओएन सिंह हटाए गए, VC बोले छुट्टी जाने से अच्छा है इस्तीफा दे दूं

नई दिल्ली/वाराणसी, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

‘नेशनल जनमत’ इस बात का मुद्दा लगातार उठाता रहा है कि कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने अपनी दकियानूसी मानसिकता का इस्तेमाल करके बीएचयू जैसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान को अराजकता और जातिवाद का अड्डा बना दिया है।

अब जब कुलपति छेड़छाड़ कि शिकार लड़कियों के बार में बयान दे सकते हैं कि- लड़कियां रात में रेप कराने ही निकलती हैं। ऐसे कुलपति के राज में उनके चीफ प्राक्टर का अनोखा बयान तो बनता ही है। हालांकि अब बीएचयू प्रशासन ने फौरी तौर पर चीफ प्राक्टर को हटाकर कुलपति जीसी त्रिपाठी को बचाने का प्रयास किया है।

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) में छात्रा के साथ छेड़छाड़ पर उचित कार्रवाई न होने के विरोध में स्टूडेंट्स के उपद्रव मामले में चीफ प्राक्टर ओएन सिंह से इस्तीफा ले लिया है. हालांकि ओएन सिंह ने पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए वाइस चांसलर जीसी त्रिपाठी को खुद अपना इस्तीफा सौंपने की बात कही है, जिसे स्वीकार भी कर लिया गया है.

उधर, इस पूरे घटनाक्रम में छात्राओं पर शनिवार की रात हुए लाठीचार्ज का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मंगलवार को कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी, जिसमें उन्होंने यूनिवर्सिटी प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया. कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने कुलपति को तत्काल हटाने की मांग की है.

वाराणसी के कमिश्नर नितिन गोकर्ण ने मुख्य सचिव राजीव कुमार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी. रिपोर्ट में उन्होंने यूनिवर्सिटी के प्रशासन को दोषी ठहराया है. इस बीच बीएयचू प्रशासन ने इस पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है.

‘BHU प्रशासन की लापरवाही से बढ़ा मामला’

शासन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, गोकर्ण ने अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव को भेज दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि BHU प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर संवेदनशील तरीके से गौर नहीं किया और वक्त रहते इसका समाधान नहीं किया गया. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर वक्त रहते इस मामले को सुलझा लिया गया होता, तो इतना बड़ा विवाद खड़ा नहीं होता.

कुलपति का राग बाहरी लोगों ने बिगाड़ा है माहौल- 

इस बीच, कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने फिर अपने बचाव में कहा कि कार्रवाई उन लोगों पर की गई, जो यूनिवर्सिटी की संपत्ति को आग लगा रहे थे. उन्होंने एक समाचार चैनल से बातचीत में छात्राओं पर हुए लाठीचार्ज और परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने की बात को झुठलाते कहा कि प्रधानमंत्री के दौरे को प्रभावित करने के लिए ‘बाहरी तत्वों’ ने कैम्पस का माहौल बिगाड़ा.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग कैम्पस में पेट्रोल बम फेंक रहे थे, पत्थरबाजी कर रहे थे. किसी भी छात्रा पर कोई कार्रवाई नहीं की गई. कार्रवाई का एक भी प्रमाण नहीं है.

BHU प्रशासन ने घटना की न्यायिक जांच के आदेश दिए- 

इस बीच, BHU प्रशासन ने पूरी घटना की न्यायिक जांच कराने का फैसला किया है. इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वी.के. दीक्षित की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की गई है. BHU प्रशासन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यूनिवर्सिटी में 65 और संवेदनशील स्थलों को चिन्हित किया गया है, जहां सीसीटीवी कैमरे स्थापित होंगे.

प्रथम चरण में यूनिवर्सिटी के द्वारा और महिला छात्रावास पर इन्हें लगाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. सुरक्षा तंत्र में महिला सुरक्षाकर्मियों को भी शामिल किया जा रहा है.

यूपी सरकार ने भी दिए न्यायिक जांच के आदेश-

उधर लखनऊ में, कैबिनेट की बैठक से निकले ऊर्जा मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा से जब पत्रकारों ने पूछा गया कि BHU मामले को लेकर सरकार ने क्या कार्रवाई की है, तो उन्होंने कहा कि सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं. हालांकि अगले ही पल वह अपनी बात से मुकर गए और कहा कि स्थानीय अधिकारी ही इस मामले की जांच करेंगे.

मंत्री शर्मा ने कहा, ‘कुछ लोग BHU का माहौल बिगाड़ने की कोशिश में जुटे हैं. ऐसे लोगों को सरकार कामयाब नहीं होने देगी. असामाजिक तत्वों से सख्ती के साथ निपटा जाएगा. पुलिस ने ऐसे लोगों को चिह्न्ति करने का काम शुरू कर दिया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’

विपक्ष ने साधा बीजेपी पर निशाना-

मायावती- 

BHU मामले पर बहुजन समाज पार्टी (BSP) की अध्यक्ष मायावती ने मंगलवार को एक बयान जारी कर कहा कि भाजपा सरकार के गलत रवैये व उपेक्षा के कारण BHU पुलिस ज्यादती, हिंसा, आगजनी व उपद्रव का शिकार हो रहा है. इस मामले में BHU के कुलपति त्रिपाठी का रवैया भी छात्र-छात्रा हितैषी न होकर काफी अड़ियल व तानाशाही पूर्ण लगता है.

उन्होंने कहा, ‘BHU की छात्राएं अपनी सहपाठी छात्रा के साथ छेड़खानी के मामले का विरोध कर रही थीं, लेकिन कुलपति के भड़काऊ रवैये के कारण छात्रों का आंदोलन तीव्र हुआ और अंतत: वे पुलिस की जुल्म-ज्यादती के शिकार हुए.’

राज बब्बर- 

वहीं, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर मंगलवार को भी बनारस में मौजूद रहे और इस मुद्दे पर उन्होंने अपनी नजर बनाए रखी. उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान BHU के कुलपति को हटाने की मांग की. उन्होंने कहा, ‘उप्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नारा बदल गया है. अब बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ की जगह नया नारा बेटी पढ़ाओ, बेटी पिटवाओ हो गया है. कुलपति को तुरंत हटाया जाना चाहिए. उनके पद पर रहते निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती.’

 

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