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दर्दनाक: BHU के अस्पताल में प्रतिबंधित गैस से बेहोश होते थे मरीज, BJP विधायक की कंपनी से आती थी गैस

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी के कार्यकाल में बीएचयू में अराजकता और जातिवाद अपने चरम पर पहुंच चुका था। ‘नेशमल जनमत’ ने इस मुद्दे को लगातार उठाया है कि कुलपति त्रिपाठी ने अपने समय में नियुक्तियों में होने वाले भेदभाव के साथ ही छात्राओं से छेड़छाड़, गुंडागर्दी और दकियानूसी मानसिकता से विश्वविद्यालय की गरिमा को नुकसान पहुंचाया है।

छेड़छाड़ का विरोध कर रहीं छात्राओं पर लाठीचार्ज के बाद कुलपति की मानसिकता बीएचयू से निकलकर दिल्ली तक पहुंची। आखिरकार बदनामी से बचने के लिए मानव संसाघन विकास मंत्रालय ने कुलपति जीसी त्रिपाठी को छुट्टी पर भेज दिया गया है, लेकिन उसके बाद भी उनके समय के एक से बढ़कर एक कारनामे सामने आते जा रहे हैं।

दरअसल केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार का संयुक्त जांच दल, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के अस्पताल में तीन दिन के अंदर सामान्य से ज्यादा मौतों की जांच कर रहा है। इस जांच दल को पता चला है कि बीएचयू के अस्पताल में मरीजों को बेहोश करने के लिए इंडस्ट्रियल गैस का इस्तेमाल किया जाता था। मालूम रहे इस गैस का प्रयोग मरीजों पर किया जाना प्रतिबंधित है।

जांच टीम ने पाया कि इस गैस का प्रयोग उन मरीजों पर किया जाता था जिनकी सर्जरी करने के लिए उन्हें बेहोश करना जरूरी होता था। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार छह जून से आठ जून के बीच बीएचयू के अस्पताल में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई जो अस्पताल में सर्जरी के लिए भर्ती हुए थे। मरीजों की मौत के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मामले की जाँच का आदेश दिया था।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार उसके पास मौजूद जाँच रिपोर्ट में कहा गया है, “पता चला है कि अस्पताल में नॉन-फार्मास्यूटिकल (गैर-चिकित्सकीय) नाइट्रस आक्साइड का प्रयोग किया जा रहा था। ये गैस उन गैसों की श्रेणी में नहीं आती जिनका इस्तेमाल चिकित्सा के लिए किया जाता है।”

18 जुलाई को दी गयी इस रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने तैयार किया है। हालांकि जांच में ये नहीं कहा गया है कि क्या सामान्य से ज्याद संख्या में हुई मौतों के लिए नाइट्रस आक्साइड (एन2ओ) जिम्मेदार है या नहीं?

बीजेपी विधायक की कंपनी से खरीदी जाती है गैस- 

रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बीएचयू अस्पताल में गैस की आपूर्ति करने वाली इलाहाबाद स्थिति निजी कंपनी परेरहट इंडस्ट्रियल एंटरप्राइजेज के पास मेडिकल गैस बनाने या बेचने का लाइसेंस नहीं है।

कंपनी के निदेशक अशोक कुमार बाजपेयी इलाहाबाद उत्तरी के बीजेपी विधायक हर्षवर्धन बाजपेयी के पिता हैं। उनके पास कंपनी के 1.21 करोड़ रुपये के शेयर हैं। कंपनी के मालिक स्टील, केमिकल, पेपर मिल और सौर ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां भी चलाते हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इलाहाबाद के असिस्टेंट ड्रग इंस्पेक्टर द्वारा दिये गये एक आरटीआई के जवाब में बताया गया कि उत्तर प्रदेश फूड सेफ्टी विभाग ने कंपनी के नैनी स्थित कारखाने को कोई लाइसेंस नहीं दिया है, न तो नाइट्रोजन ऑक्साइड बनाने का और न ही ऑक्सीजन बनाने का।

हर्षवर्धन बाजपेयी ने माना कि उनकी कंपनी के पास गैस बनाने और बेचने का लाइसेंस नहीं लेकिन उन्होंने बीएचयू अस्पताल में हुई मौतों के लिए गैस को वजह बताने के आरोपों को खारिज किया।

नेशनल जनमत ने लगातार दिखाया सच- 

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