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BHU में दलित शिक्षिका को गालियां देकर औकात में रहने की धमकी देने वाले प्रो. कुमार पंकज पर FIR दर्ज

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में जातिवाद का अड्डा बनकर रह गया है। विभिन्न विभागों में आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं से भेदभाव के मामले तो आ ही रहे हैं अब हिन्दी विभाग के प्रोफेसर कुमार पंकज पर एक दलित शिक्षिका को जातिसूचक गालियां देकर जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा है। शिक्षिका की तहरीर पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

बीएचयू के आर्ट फैकेल्टी के डीन, पत्रकारिता विभाग के प्रभारी और हिंदी के वरिष्‍ठ अध्‍यापक डॉ. कुमार पंकज के खिलाफ़ शनिवार की दोपहर बनारस के लंका थाने में एक एफआइआर दर्ज हुई है। एफआइआर पत्रकारिता विभाग की रीडर डॉ. शोभना नर्लिकर ने करवायी है जो बीते 15 साल से यहां पढ़ा रही हैं। डॉ. नर्लिकर का आरोप है कि डॉ. कुमार पंकज ने उनके साथ अपशब्‍दों का इस्‍तेमाल किया है, जातिसूचक गालियां दी हैं और जान से मारने की धमकी दी है।

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प्रो. कुमार पंकज ( हिंदी विभाग)

बीएचयू प्रशासन ने एफआईर  में भी अड़ंगा लगाया- 

घटना 6 जुलाई की है जब कला संकाय के डीन कुमार पंकज ने  डॉ. शोभना नर्लिकर के साथ यह अभद्रता की। नर्लिकर ने बताया कि उन्‍होंने इसकी शिकायत चीफ प्रॉक्‍टर से लिखित तौर पर की थी जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। उसके बाद वे लंका थाना गईं जहां उनकी एफआइआर दर्ज करने से पुलिस ने मना कर दिया। उनका कहना है कि विश्‍वविद्यालय प्रशासन ने पुलिस पर दबाव डालकर मामला दर्ज करने से रोक दिया था। तीन दिन तक भटकने के बाद किसी तरह डॉ. शोभना ने वाराणसी के एसएसपी को फोन पर अपनी व्‍यथा सुनाई जिसके बाद एसएसपी के आदेश से शनिवार की दोपहर मुकदमा दर्ज हो सका।

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क्या है मामला- 

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FIR के मुताबिक 6 जुलाई को डॉ. शोभना को आर्ट फैकेल्टी डीन प्रो. कुमार पंकज ने दोपहर 2 बजे अपने रूम में बुलाया और उनसे कहा कि “विगत 14 वर्षों से विभाग का माहौल तुमने गंदा कर रखा है।  डॉ. शोभना ने जब  हाथ जोड़कर उनसे कहा कि उनके मुंह से ऐसे शब्‍द ठीक नहीं लगते, तो डॉ. कुमार पंकज ने जातिसूचक शब्‍द का प्रयोग करते हुए भद्दी-भद्दी गालियां दी और “कहा कि औकात में रहो नहीं तो जान से मरवा दूंगा”। मामला आइपीसी की धारा 504, 506 और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(डी) के तहत दर्ज किया गया है।

एफआइआर में तीन अन्‍य शिक्षकों के नाम दर्ज हैं जो इस घटना के प्रत्‍यक्षदर्शी थे, डॉ. ज्ञान प्रकाश मिश्र, स्‍वर्ण सुमन और अमिता। इन तीनों ने प्रो. कुमार पंकज के इस व्‍यवहार पर आपत्ति जतायी थी। डॉ. शोभना ने पुलिस से सुरक्षा की मांग भी की है क्‍योंकि उन्‍हें डर है कि उनके साथ कोई हादसा न हो जाए। बता दें कि डॉ. शोभना पत्रकारिता शिक्षण में आने से पहले पांच वर्ष तक लोकमत समाचार और आइबीएन में बतौर पत्रकार काम कर चुकी हैं।

बहुत समय से उत्पीड़न सहना पड़ रहा था- 

डॉ. शोभना ने बताया कि दलित होने के नाते बहुत लंबे समय से उन्हे दुर्व्‍यवहार और उत्‍पीड़न झेलना पड़ रहा है। 23 मई से लगातार डॉ. कुमार पंकज उनकी हाजिरी नहीं लगा रहे थे और रिकॉर्ड में अनुपस्थित दिखा रहे थे। 6 जुलाई को अपने कमरे में बुलाकर उन्‍होंने पहले डॉ. शोभना की अनुपस्थिति की बात उठायी जबकि 23 मई को खुद पंकज ने ही उनकी परीक्षा ड्यूटी लगाई थी। वे कहती हैं कि उन्‍होंने दिन भर ड्यूटी की थी, सेमेस्‍टर परीक्षाओं में भी मौजूद रही थीं। डॉ. शोभना ने अपनी ड्यूटी के साक्ष्‍य जैसे ही कुमार पंकज को दिखाए, वे भड़क गए और गाली-गलौज करने लगे।

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दलित होने के कारण रोका गया प्रमोशन- 

डॉ. शोभना के अनुसार दलित होने के कारण उनका प्रमोशन रोक दिया गया है वरना वे इस वक्‍त पत्रकारिता में ही विभागाध्यक्ष होतीं। 2011 में ही वे रीडर बन गई थीं और 2014 में उनका प्रमोशन लंबित था जिसे रोक दिया गया। वे आरोप लगाती हैं कि इस सारे उत्‍पीड़न के पीछे मेरी जाति ही आधार है।

डॉ. शोभना ने बताया मैं गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हूं। महाराष्‍ट्र में मीडिया विशेषज्ञ के रूप में लोग जानते हैं। मेरी क्‍या गलती है सिवाय इसके कि मैं दलित जाति से आती हूं। उन्‍होंने 6 जुलाई की घटना के बारे में बताया कि प्रोफेसर का गुस्सा इतना था कि बोले- “साले हरामखोर महाराष्‍ट्र के निचली जाति के दलित साले चमारन आ रहे…औकात में रहो, वरना तुमको मार डालूंगा”। सबके सामने बोले… तुम्‍हारी औकात ही नहीं है प्रोफेसर बनने की… डॉ. शोभना ने बताया कि जब चीफ प्रॉक्‍टर को शिकायत करने के बाद कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्‍होंने कुलपति जीसी त्रिपाठी से मिलने की कोशिश की लेकिन वे शहर से बाहर हैं।

 

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