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BHU के द्रोणाचार्यों शर्म करो, एकलव्यों का अंगूठा काटना बंद करो’, PhD प्रवेश प्रक्रिया के खिलाफ फूटा गुस्सा

वाराणसी/नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

पूरे देश के तकरीबन हर केन्द्रीय विश्वविद्यालय से शोध प्रवेश प्रक्रिया में खामी होने की आवाज उठती रहती है। छात्र साक्षात्कार के अंकों में जातिगत आधार पर भेदभाव का आरोप लगाते रहे हैं। अब ‘बीएचयू शोध मोर्चा’ ने बीएचयू की में शोध प्रवेश प्रक्रिया में गम्भीर खामियों का आरोप लगाते हुए आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।

गुरुवार को बीएचयू प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छित्तूपुर गेट पर संकल्प सभा का आयोजन किया गया। जिसमें जाने माने लेखक और सामाजिक चिंतक प्रो. चौथीराम यादव भी शामिल हुए।

प्रमुख मांगे- 

* बीएचयू शोध प्रवेश प्रक्रिया में गम्भीर खामियां; प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए

* समस्या के हल होने तक संघर्ष जारी रखने का `बीएचयू शोध मोर्चा’ ने लिया संकल्प

* कुलपति जी.सी. त्रिपाठी के कार्यकाल में अयोग्य लोगों की नियुक्तियां ही नहीं हुईं, भेदभाव को बढ़ावा भी मिला

सभा की अध्यक्षता करते हुए हिंदी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष व जाने माने लेखक प्रो. चौथीराम यादव ने कहा कि राष्ट्रवाद का राग अलापने वाली मौजूदा सरकार शिक्षण संस्थानों में अपने लोगों को भरने में मशगूल है; इस प्रक्रिया में कैम्पसों की आवाज दबाई जा रही है और लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है। प्रो. यादव ने कहा कि बेहतर शिक्षा और शोध के लिए लोकतंत्र बेहद जरुरी है।

बीएचयू में छात्रनेता रहे सुनील यादव ने कहा कि कुलपति जी.सी. त्रिपाठी की विदाई के वक्त अयोग्य लोगों की नियुक्तियों के सन्दर्भ में हुए रहस्योद्घाटन में कुछ भी नया नहीं है, दरअसल यह बीएचयू के कामकाज में राजनैतिक दखलन्दाजी का ही असर है। जिसके चलते न सिर्फ अयोग्य लोगों की नियुक्तियां हुईं, बल्कि शिक्षा एवं शोध में मनमानेपन और भेदभाव को बढ़ावा भी दिया जा रहा है।

सुनील यादव ने कहा कि मनमानेपन और भेदभाव को सबसे ज्यादा स्पष्ट तरीके से बीएचयू की शोध प्रवेश प्रक्रिया में देखा जा सकता है| सुप्रीम कोर्ट से लेकर सरकार तक परीक्षा में इंटरव्यू की भूमिका को घटाने के पक्ष में हैं, लेकिन बीएचयू की शोध प्रवेश परीक्षा में 70 नम्बर का इंटरव्यू होता है।

शोध प्रवेश परीक्षा में इतने ज्यादा नम्बर का इंटरव्यू अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 70 नम्बर का यह इंटरव्यू; प्रशासनिक पदों पर बैठे बीएचयू के अध्यापकों को मनमाना अधिकार देता है कि वे चाहें तो योग्य विद्यार्थियों को शोध में प्रवेश लेने से वंचित कर दें, और चाहें तो अपने अयोग्य चहेतों को भी पीएचडी की डिग्री दिलवा दें।

सभा को सम्बोधित करते हुए शुभम कुमार सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि शोध प्रवेश परीक्षा में इंटरव्यू के नम्बर घटाने की मांग को लेकर `बीएचयू शोध मोर्चा’ के बैनर से शुरू हुआ यह आन्दोलन; अपने अंजाम तक पहुंचे बगैर न थकेगा, न रुकेगा।

सभा के बाद छित्तूपुर गेट से सीर गेट तक मार्च निकाला गया। मार्च के दौरान `बीएचयू के द्रोणाचार्यों शर्म करो – एकलव्यों का अंगूठा काटना बंद करो’, `70 नम्बर के साक्षात्कार को ख़त्म करो’, ‘शोध प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाओ’ नारे लगे।

सभा में एवं मार्च में कन्हैया, विनय, चन्द्र प्रकाश, सौरभ, राहुल, अखिलेश, रविन्द्र भारतीय, अनुपम कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र शामिल रहे।

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