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BHU में OBC-SC-ST के आरक्षण को चालाकी से खत्म करने के विरोध में राष्ट्रपति के नाम खुला खत

नई दिल्ली/वाराणसी। नेशनल जनमत ब्यूरो 

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी के जातिवादी रवैये और सम्पूर्ण भारत में एससी-एसटी-ओबीसी के अवसर की समता के प्रतिनिधित्वकारी अधिकार को खत्म करने की साजिश का पर्दाफ़ाश करने के लिए एससी, एसटी, ओबीसी छात्र संघर्ष समिति के बैनर तले छात्र-छात्राएं लगातार संघर्षरत हैं।

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इसी क्रम में पहले रैली निकाली गई, धरना-प्रदर्शन किया गया। इसी क्रम में बुधवार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्गों के आरक्षण को निष्प्रभावी बनाये जाने के विरुद्ध छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रपति महोदय के नाम ज्ञापन सौंपा गया।

महामहिम राष्ट्रपति महोदय,

आपको भारतीय संविधान के संरक्षक के रूप में निर्वाचित होने व शपथ लेने पर लाखों शुभकामनाएं। आपने जिस समय में पदभार संभाला है, देश में संविधान के अनुच्छेद 16, खासकर 16(4), के खिलाफ परिस्थितियों का निर्माण बड़ी तेजी के साथ हो रहा है।

आपकी कुलाध्यक्ष्ता में चलने वाले केंद्रीय विश्वविद्यालयों में, मानव संसाधन विकास मंत्रालय व विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमानुसार 25 अगस्त 2006 से सभी शैक्षणिक पदों पर अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था है।

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इसके लिए यूजीसी द्वारा जारी विस्तृत दिशा निर्देश आरक्षण पर भारत सरकार के नियमों व सुप्रीम कोर्ट के प्रसिद्ध निर्णयों (इंदिरा साहनी व आर के शबभरवल) से सम्पोषित थे।

समय -समय पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय व यूजीसी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सभी पदों पर रिजर्वेशन का निर्धारण विषयवार/विभागवार न करके विश्वविद्यालय स्तर पर करने के दिशा-निर्देश जारी किये थे तथा विश्वविद्यालय तदनुसार नियुक्तियां भी कर रहे थे।

यह आसानी से समझा जा सकता है कि विषयवार आरक्षण का निर्धारण करने पर अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित शैक्षिणिक पदों की संख्या ज्यादातर विभागों में लगभग नगण्य हो जाती है तथा छोटे विभागों में तो पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

हाल ही में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू) व इलाहबाद विश्वविद्यालय के मामले में, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरक्षण का निर्धारण विषयवार करने को कहा है तथा यूजीसी को उचित दिशा निर्देश बनाने को कहा है। यह उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी है।

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दूसरे शब्दों में यह अनुच्छेद 16(4) को ख़त्म करने के बराबर है| इस अनिश्चितता में इलाहबाद विश्वविधालय में शैक्षणिक पदों पर नियुक्तियां बंद हैं जबकि बीएचयू के कुलपति आनन-फानन में विज्ञापन निकालकर रात-दिन एक करके धुआंधार नियुक्तियां करने में लगे हैं तथा सभी शैक्षणिक पदों को अनारक्षित वर्ग के लोगों से भर देना चाहते है| हम आपका ध्यान बीएचयू में हो रही निम्नलिखित अनियमितताओं की ओर आकर्षित कराना चाहते हैं:

१. जब बीएचयू से सूचना अधिकार के तहत वर्तमान में आरक्षण की स्थिति व रोस्टर के सम्बन्ध में जानकारी मांगी गयी तो उसने सूचना देने में असमर्थता दिखाई| ऐसा लगता है बीएचयू मनमाना रोस्टर बनाकर ही अपना खेल खेलने में लगा है जबकि नियमानुसार रोस्टर का पूर्व प्रकाशन जरूरी है।

२. रिजर्वेशन रोस्टर व आरक्षित पदों की संख्या को बीएचयू की वेबसाइट पर नहीं डाला गया है जो कि भारत सरकार, मानव संसाधन विकास मंत्रालय व यूजीसी के निर्देशो का उलंघन है|

3. इंटरव्यू के २१ दिन पहले साक्षात्कार पत्र देने की प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया जा रहा है| लोकल एक्सपर्ट को बुलाकर इंटरव्यू किया जाता है और तुरंत ही कार्यकारी परिषद् की बैठक किये बिना अथवा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये औपचारिक घोषणा कर ही नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाते हैं| ऐसा बीएचयू सहित किसी भी विश्वविद्यालय में पहले नहीं देखा गया है|

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. ऐसा प्रतीत होता है कि कुलपति निजी स्वार्थ में ये सब जल्दबाजी कर रहे हैं जैसा कि समय समय पर बीएचयू के कुलपति पर आरोप स्थानीय अख़बारों में प्रकाशित होते रहते है| वर्तमान कुलपति का कार्यकाल भी तीन महीने बाद समाप्त हो रहा है|

हमारा पूर्ण विश्वास है कि ये सब आरक्षण विरोधी नियुक्तियां मानव संशाधन विकास मंत्रालय व बीएचयू के कुलपति की मिली-भगत से हो रही हैं ऐसे में हमारा आपसे अनुरोध है कि निम्नलिखित कार्रवाही करके संविधान के अनुच्छेद १६(४) व ४६ को स्थापित करने का कष्ट करें:

१. आप बीएचयू के कुलाध्यक्ष(विजिटर) होने के नाते, कुलपति द्वारा पिछले १ महीने में की गयी व की जा रही सभी नियुक्तियों पर रोक लगाने का कष्ट करें।

२. भारत के राष्ट्रपति होने के नाते मानव संशाधन विकास मंत्रालय व यूजीसी को यथाशीघ्र अगस्त २००६ में आरक्षण पर यूजीसी द्वारा जारी किये गए दिशा निर्देशों को कानूनी रूप देने का कार्य करने का निर्देश दें जो कि देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समान रूप से लागू हो।

महोदय, इस मामले में आपके द्वारा की जाने वाली कार्यवाही आपके लिए किसी परीक्षा से कम नहीं है तथा बीएचयू में जो हो रहा है वह विजिटर के रूप में आपके कार्यों का भी आइना है|

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सादर धन्यवाद

भवदीय
अनुसूचित जाति, जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के समस्त छात्र-छात्राएं
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय
वाराणसी-221005

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