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फजीहत के बाद जागी योगी सरकार, CO-SO-ACM हटाए गए, अखिलेश बोले BHU में छिन गई बोलने की आजादी

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

बीएचयू में छेड़खानी के विरोध में प्रदर्शन कर रहीं छात्राओं पर लाठीचार्ज करने के बाद कुलपति जीसी त्रिपाठी को तो आलोचनाओं का सामना करना ही पड़ा। इसके साथ ही पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के नाते पीएम और सीएम योगी आदित्यनाथ को भी फजीहत झेलनी पड़ी।

सोशल मीडिया पर इस बाबत जागरूक लोगों ने सरकार की जमकर बखिया उधेड़ी। तमाम लानत झेलने के बाद आखिरकार योगी सरकार नींद से जागी और सीओ-एसओ, एसीएम को हटाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी।

बीएचयू के लंका थाने के एसओ को लाइन हाजिर कर दिया गया है। वहीं एसएसपी ने भेलूपुर के सीओ को भी पद से हटा दिया है। इसके अलावा सीएम योगी आदित्यनाथ ने बीएचयू घटना की रिपोर्ट मांगी है।

जैतपुरा के एसओ संजीव मिश्र को लंका थाने का नया एसओ बनाया गया है। वहीं वाराणसी के अपर नगर मजिस्ट्रेट( ACM) को भी नहीं बख्शा गया। अपर नगर मजिस्ट्रेट सुशील कुमार का कार्यभार बदल दिया गया है।

अखिलेश ने कहा बोलने की आजादी छीनी- 

वहीं बीएचयू में हुई इस घटना की यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए अपने ट्वीट में लिखा, “नारी रक्षा व गरिमा की बात करने वालों ने BHU में छात्राओं व प्रेस पर लाठी चार्ज कर साबित कर दिया है कि अब आवाज़ उठाने की आज़ादी भी छिन गई है।”

क्या हुआ था उस रात- 

छात्राएं यूं ही सड़क पर नहीं उतर गईं शुक्रवार की रात छात्राओँ को ना सिर्फ अश्लील इशारे किए गए बल्कि एक छात्रा को दबोचने का प्रयास हुआ। उसको आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाई गई। कुलपति महोदय क्या ये साधारण सी घटना है आपके लिए? आप बीएचयू के अभिवावक हैं क्या एक अभिवावक का यही फर्ज है जो आपने निभाया है?

तीन दिन चले धरने में बात तक करने नहीं आए वीसी- 

बावन घंटे तक धरना चला और वीसी बात नहीं कर सके। प्रोक्टोरियल बोर्ड के दफ्तर के सामने किसी लड़की के कपड़े फाड़ने के प्रयास हुए, दबोचा गया, क्या इसे कोई भी समाज इसलिए सहन करेगा क्योंकि वे ‘तेज’ हो गई हैं ! शर्मनाक है।

इन सवालों को टालने की जगह के लिए राजनीति बताना और भी शर्मनाक है। आप जांच करते, बात करते। लाठीचार्ज वो भी लड़कियों पर? क्या हिन्दू मुस्लिम टापिक पर इतना भरोसा हो गया है कि आप समाज को कैसे भी रौंदते चलेंगे और लोग सहन कर लेंगे?

लड़कियों का बीएचयू प्रशासन पर गंभीर आरोप-

-लड़कियों का आरोप है कि जब कुलपति से शिकायत की गई तो उन्होंने कहा, “पीएम का दौरा है। अभी आप सभी लोग शांत रहिए।” उधर प्रोटेस्ट कर रही बीएफए स्टूडेंट आकांक्षा सिंह ने विरोध के दौरान सिर के बाल मुंडवा लिया था। उसका कहना है कि छेड़खानी होते रहे और हर वक्त हम खामोश रहे, ऐसा नहीं हो सकता है।

छात्राओं का आरोप है कि घटना के दौरान गेट पर सिक्‍युरिटी गार्ड तैनात था लेकिन उसने छोड़खानी का विरोध नहीं किया। छात्रा हॉस्‍टल में रहकर पढ़ाई करती है। जब मामले की जानकारी अन्‍य छात्राओं को हुई तो अन्‍य छात्राओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया। मामला बीएचयू प्रशासन तक पहुंचा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इतना ही नहीं कई छात्राओं को हास्‍टल में ही बंद कर दिया गया है और विरोध दबाने की कोशिश की जा रही है। बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय में छात्रा से छेड़खानी को लेकर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, इससे छात्राओं का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

कपड़े तक फाड़ने की धमकी देते हैं-

प्रोटेस्ट कर रही रश्मि ने बताया,”हॉस्टल की खिड़कियों पर लड़के पत्थर में लेटर लिखकर फेंकते है। खिड़कियों पर खड़ा होने पर लड़कियों को अश्लील इशारे करते हैं। विरोध करने पर कहते है, कैंपस में दौड़ाकर कपड़े फाड़ देंगे।

नेहा यादव ने कहा, ” कैंपस में ही लड़के फिजिकली एब्यूज कर रहे है। कपड़े फाड़ने की धमकी तक दी जाती है। कल की घटना के बाद हम सभी को खामोश रहने की चेतावनी दी गयी है। सर्कुलर जारी किया गया है शाम 6 बजे के बाद सुबह में अंधेरे तक लड़कियां ना निकले। ये कैसी आजादी है।

बीएचयू में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ ही आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बीएचयू में हुई नियुक्तियों में जातिवादी खेल को लेकर एससी, एसटी कमीशन के अलावा राष्ट्रपति सचिवालय से नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।

 

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