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कमिश्वर की जांच में खुलासा, VC त्रिपाठी के गलत रवैये से भड़का छात्राओं का गुस्सा, दिल्ली तलब

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

‘नेशनल जनमत’ ने लगातार लिखा है कि कुलपति जीसी त्रिपाठी के राज मे बीएचयू में जातिवाद, अश्लीलता और अराजकता बढ़ी है। अब इस बात पर पर कमिश्नर वाराणसी ने भी अपनी जांच में मोहर लगा दी है। अब अगर संघवाद नहीं चला तो कुलपति की कुर्सी जा सकती है।

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में शुक्रवार को लड़कियों के साथ हुई छेड़छाड़ के मामले में विश्वविद्यालय के कुलपति जीसी त्रिपाठी पर गाज गिर सकती है। कमिश्नर की जांच रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि बीएचयू बवाल कुलपति के गलत रवैये के कारण ही इतना बढ़ा है।

दरअसल छात्राओं ने आरोप लगाया था कि कुलपति पीड़ित छात्राओं से मुलाकात ही नहीं करना चाहते। इस मामले की जांच प्रदेश सरकार द्वारा कमिश्नर वाराणसी को सौंपी गई थी। कमिश्ननर नितिन गोकर्ण की जांच में इस बात की पुष्टि हो गई है कि छात्राओं के आरोप सही हैं।

कुलपति का रवैया छात्राओं के प्रति असहयोगात्मक था। जिससे नाराज होकर बीएचयू के हजारों छात्र-छात्राओं को विरोध प्रदर्शन के लिए बाध्य होना पड़ा था।

कमिश्नर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि बीएचयू में छात्रों के विरोध प्रदर्शन को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन खुद जिम्मेदार है। वाराणसी कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बीएचयू कुलपति जीसी त्रिपाठी को दिल्ली तलब किया है।

ऐसा माना जा रहा है कि बीएचयू में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद कुलपति को छुट्टी पर भेजा सकता है। बीएचयू में छात्रों पर की गई बर्बरतापूर्वक पुलिसिया कार्रवाई से विश्वविद्यालय की छवि पूरे देश में धूमिल हुई है।

कमिश्नर ने यूपी के चीफ सेक्रेटरी राजीव कुमार को दी गई रिपोर्ट में कहा, विश्वविद्यालय प्रशासन ने पीड़िता की शिकायत पर उचित कार्रवाई नहीं की, और न ही विश्वविद्यालय परिसर में उपजे विवाद को ठीक ढंग से संभाला गया।

क्या हुआ था रात में- 

 

लड़कियों का बीएचयू प्रशासन पर गंभीर आरोप-

प्रोटेस्ट कर रही स्टूडेंट आकांक्षा सिंह ने विरोध के दौरान सिर के बाल मुंडवा लिया था। उसका कहना है कि छेड़खानी होते रहे और हर वक्त हम खामोश रहे, ऐसा नहीं हो सकता है।

छात्राओं का आरोप है कि घटना के दौरान गेट पर सिक्‍युरिटी गार्ड तैनात था लेकिन उसने छोड़खानी का विरोध नहीं किया। छात्रा हॉस्‍टल में रहकर पढ़ाई करती है। जब मामले की जानकारी अन्‍य छात्राओं को हुई तो हास्‍टलर्स समेत अन्‍य छात्राओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया।

मामला बीएचयू प्रशासन तक पहुंचा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि न्‍याय के लिए विरोध कर रही छात्राओं को चुप रहने के लिए कहा जा रहा है।

इतना ही नहीं कई छात्राओं को हास्‍टल में ही बंद कर दिया गया है और विरोध दबाने की कोशिश की जा रही है। बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय में छात्रा से छेड़खानी को लेकर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, इससे छात्राओं का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

कपड़े तक फाड़ने की धमकी देते हैं- 

प्रोटेस्ट कर रही रश्मि ने बताया,”हॉस्टल की खिड़कियों पर लड़के पत्थर में लेटर लिखकर फेंकते है। खिड़कियों पर खड़ा होने पर लड़कियों को अश्लील इशारे करते हैं। विरोध करने पर कहते है, कैंपस में दौड़ाकर कपड़े फाड़ देंगे।

स्टूडेंट पल्लवी ने कहा, ” कैंपस में ही लड़के फिजिकली एब्यूज कर रहे है। कपड़े फाड़ने की धमकी तक दी जाती है। कल की घटना के बाद हम सभी को खामोश रहने की चेतावनी दी गयी है। सर्कुलर जारी किया गया है शाम 6 बजे के बाद सुबह में अंधेरे तक लड़कियां ना निकले। ये कैसी आजादी है।

बीएचयू में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ ही आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बीएचयू में हुई नियुक्तियों में जातिवादी खेल को लेकर एससी, एसटी कमीशन के अलावा राष्ट्रपति सचिवालय से नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।

आपको बता दें बीते शुक्रवार को छेड़छाड़ मामले में कुछ लड़किया वीसी से मिलकर शिकायत दर्ज कराना चाहती थीं। लेकिन कुलपति कार्यालय की ओर से सिर्फ 4-5 लड़कियों को मिलने के लिए कहा गया।

जिसके बाद विश्वविद्यालय के छात्र और छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन शुरु कर दिया।  पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठी चार्ज किया था।

दो अक्टूबर तक बंद रहेगा कैंपस-

प्रदर्शन को देखते हुए बीएचयू कैंपस को 2 अक्टूबर तक बंद रखने का फैसला किया गया है. वहीं छात्राओं का कहना है कि प्रदर्शन जारी रहेगा. पूरे कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. पुलिस और पीएसी के करीब 1500 जवान कैंपस में तैनात किए गए हैं.

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