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BHU : छात्र हितों के लिए USO करेगा देश भर की यूनिवर्सिटियों में आंदोलन

दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो ।

मोदी सरकार की छात्र विरोधी नीतियों का यूनिवर्सिटियों में अब जमकर विरोध हो रहा है. बीएचयू इस तरह के विरोध का केंद्र बनता जा रहा है. बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी की छात्रा रही नेहा यादव ने आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राओं की लड़ाई को तेज कर दिया है

ठ9द9द0 वह यूनाइटेड स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन (USO) के बैनर तले सेंट्रल यूनिवर्सिटियों में फीस और कम्बाइंड एंट्रेस को लेकर बड़ी लड़ाई लड़ने जा रही हैं. इसके लिए वह 14 जून को काशी से अपने आंदोलन की शुरूआत करेंगी. हालांकि नेहा इसके लिए सांसदों और नेताओं से मिलकर भी अपनी बात रख रही हैं और आने वाली पीढ़ियों के छात्र-छात्राओं की भलाई के लिए इस बड़े मुद्दे को उनसे सदन में उठाने की अपील भी कर रही हैं.

नेहा ने हाल ही में मैनपुरी से सांसद तेज प्रताप यादव से भी मिली हैं. तेज प्रताप ने पूरे मुद्दे को सदन में उठाने का भरोसा भी दिया है.

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क्या हैं अहम मुद्दे-

1- सभी सेंट्रल यूनिवर्सिटियां मानव संसाधन मंत्रालय से संचालित होती हैं, ऐसे में कोर्स की फीस समान होनी चाहिए. सेंट्रल यूनिवर्सिटियों में फीस का मामला इतना बड़ा है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र-छात्राएं कई बार एडमिशन ले ही नहीं पाते हैं. यह फीस भी बहुत कम की जानी चाहिए। यदि गांव देहात के किसान के बच्चों को शिक्षित करना चाहते हैं, तो फीस को कम करना अति आवश्यक है. यूजीसी एक समान फीस का निर्धारण करे. सेंट्रल यूनिवर्सिटियों में दोहरी फीस की नीति बंद होनी चाहिए.

2- पूरे प्रदेश में जो भी सेंट्रल यूनिवर्सिटियां हैं, वहां पर कम्बाइंड एंट्रेंस टेस्ट के द्वारा एडमिशन लिए जाने चाहिए. इससे छात्रों के साथ न्याय हो सकेगा. छात्रों को अच्छी यूनिवर्सिटियों में भी पढ़ने का मौका मिलेगा. मेधावी छात्रों को यूनिवर्सिटियां दरकिनार नहीं कर सकेंगी.

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3- सेंट्रल यूनिवर्सिटियों का सेंट्रलाइजेशन कर दिया जाए. सभी के रूल्स एवं रेगुलेशन समान किए जाएं. इससे सभी को फायदा होगा. यूनिवर्सिटियों के संचालन में भी मदद मिलेगी.

4- हॉस्टल सुविधाओं में छात्र और छात्राओं के साथ समान व्यवहार किया जाए. आउटिंग की सुविधा छात्रों की तरह छात्राओं को भी मिलें. आज लड़कियां लड़कों से कम नहीं हैं. ऐसे में यह भेदभाव सेंट्रल यूनिवर्सिटियों में होना गंभीर मुद्दा है.

5- फेलोशिप की धनराशि समान की जाए। सेंट्रल यूनिवर्सिटियों की फीस में ही नहीं, फेलोशिप में भी बड़ा अंतर होता है. इस खाई को खत्म करना बहुत जरूरी है. इससे हर साल लाखों छात्र-छात्राओं का भला होगा.

6- छात्र संघ को लेकर भी समान फैसले किए जाएं. मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) इसको लेकर दोहरा रवैया न अपनाए. जेएनयू, इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्र संघ के चुनाव होते हैं, तो बीएचयू में क्यों नहीं हो रहा है. ऐसी कई सेंट्रल यूनिवर्सिटियां हैं जहां छात्र संघ का चुनाव नहीं हो रहा है. छात्र संघ को बहाल किया जाए. छात्र संघ के चुनाव राजनीति की पौधशाला होते हैं.

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इन मुद्दों को उठाने के लिए नेहा यादव ने अपने सहयोगी छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर यूनाइटेड स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन बनाया है. इसके बैनर तले वह 14 जून को उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे आपराधिक मामले, महिलाओं पर अत्याचार, कानून-व्यवस्था ध्वस्त समेत दर्जनों मामलो के लेकर काशी में एक दिवसीय आंदोलन कर रही हैं. अधीनस्थ चयन सेवा आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति न होने से लाखों अभ्यर्थियों की नौकरियों पर रोक लगी हुई है. इसे भी आंदोलन में अभ्यर्थी उठाएंगे.

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