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कुलपति त्रिपाठी का एक और कारनामा, यौन उत्पीड़न के ‘दोषी’ को बना दिया विश्वविद्यालय अस्पताल का हेड

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय में छात्रा के साथ हुई छेड़छाड़ का मसला अभी पूरी तरह से हल भी नहीं हो पाया था कि वहां के कुलपति नए विवादों में फंसते नजर आ रहे हैं। बीएयू के वाइस चांसलर गिरीश चंद्र त्रिपाठी पर विश्वविद्यालय में नियुक्ति करने का अधिकार खत्म होने से करीब एक दिन पहले कई अहम नियुक्तियां करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

जीसी त्रिपाठी ने यौन उत्पीड़न के दोषी पाए गये एक प्रोफेसर की भी नियुक्ति को मंजूरी दी है। जीसी त्रिपाठी ने 26 सितंबर को विश्वविद्यालय की एक्जिक्यूटिव की बैठक में इन नियुक्तियों को मंजूरी दी।

वीसी जीसी त्रिपाठी का कार्यकाल 27 नवंबर को खत्म होने वाला है। मानव संसाधन मंत्रालय के आदेश के अनुसार केंद्रीय विश्वविद्यालयों के वीसी अपने कार्यकाल के आखिरी दो महीनों में कोई भी नियुक्ति हीं कर सकते।

जीसी त्रिपाठी ने ओपी उपाध्याय को बीएचयू परिसर में स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल का मेडिकल सुपरिटेंडेंट नियुक्त किया है। ईसी की बैठक में एक सदस्य ने उपाध्याय की नियुक्ति पर सवाल उठाया क्योंकि फिजी की एक अदालत उपाध्याय को यौन उत्पीड़न का दोषी करार दे चुकी है।

उपाध्याय अप्रैल 2016 से बीएचयू के अस्पताल के कार्यकारी प्रमुख हैं। फिजी की अदालत ने साल 2013 में उपाध्याय को एक 21 वर्षीय महिला के यौन उत्पीड़न का दोषी पाया था।

वहीं मंगलवार को इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए उपाध्याय ने कहा, “यूनिवर्सिटी ने मेरे मामले में कानूनी सलाह ली है और ये तय हुआ कि देश से बाहर की अदालत का फैसला हमारे यहां लागू नहीं होगा। इसलिए मेरा इंटरव्यू लिया गया और चयन समिति ने मुझे चुना। मैं फिजी में अध्ययन अवकाश पर गया था। वो मामला फिरौती का था मैंने विरोध किया तो मुझे झूठे मामले में फंसा दिया गया।”

उपाध्याय की नियुक्ति के प्रस्ताव के बारे में पूछे जाने पर जीसी त्रिपाठी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “हां, ऐसा प्रस्ताव था और मुझे याद है कि उस पर आपत्ति की गयी थी। लेकिन ये मसला इलाहाबाद कोर्ट में लंबित है तो हमें कोर्ट के आदेश का इंतजार करना होगा।”
साभार-जनसत्ता

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