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BHU VC की तानाशाही: लाठीचार्ज के बाद, गर्ल्स हॉस्टल खाली कराकर, छात्राओं को जबरन घर भेजने का फरमान

नई दिल्ली/वाराणसी: नेशनल जनमत ब्यूरो।

कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी के कार्यकाल में बीएचयू कैम्पस जातिवाद और अराजकता का अड्डा बनता जा रहा है। हैरत कि बात ये है कि प्रो. त्रिपाठी अराजकता और गुंडागर्दी को कम करने के बजाए लड़कियों पर पाबंदी लगाने के दकियानुसी ख्याल को ज्यादा मुफीद मानते हैं। शायद यही वजह है कि तीन दिन चले आंदोलन के दौरान छात्राओं से बातचीत करने की बजाए कुलपति महोदय लाठीचार्ज करवाके आंदोलन का दमन करना चाह रहे हैं।

बीएचयू में देर रात करीब 11 बजे वीसी हाउस पर प्रदर्शन कर रही छात्राओं पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया गया. पुलिस ने बीएचयू मेन गेट पर बैठी छात्राओं को बलपूर्वक हटाया. छात्राओं को दौड़ा-दौड़ाकर पीटने के बाद भी छात्राओं का उत्साह कम ना हुआ तो कुलपति महोदय ने लिखित आदेश दिया है कि सभी गर्ल्स हॉस्टल की लड़कियों को घर भेज दो, शाम  पांच बजे तक पूरा कैम्पस खाली करवा दो।

नाम ना छापने की शर्त पर बीएचयू के त्रिवेणी कैम्पस की छात्राओं ने ‘नेशनल जनमत’ को बताया कि यमुना, गोदावरी, कृष्णा, सरस्वती, गोमती, कावेरी समेत महिला महाविद्यालय हॉस्टल का पूरा कैम्पस ही खाली करवाने का आदेश दे दिया गया है। सूत्रों के हवाले से खबर मिल रही है कि इस बाबत कुलपति ने लिखित आदेश भी जारी कर दिया है।

गोमती छात्रावास की एक छात्रा ने बताया कि लड़कियों से हॉस्टल बार्डन द्वारा बोला जा रहा है कि अगर बैग लेकर निकलोगी तभी कैम्पस के बाहर जाने देंगे, बिना बैग लिए किसी को बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। फिलहाल बीएचयू प्रशासन का रवैया पूरी तरह से दमनकारी है। छात्राओं को इंसाफ देने की बजाए उनको डराया, धमकाया जा रहा है।

क्या हुआ था रात में- 

वीसी से मिलने के लिए छात्र-छात्राएं उनके आवास पर जा रहे थे तभी सुरक्षा कर्मियों से उनकी झड़प हुई. पुलिस के इस बलप्रयोग में मीडियाकर्मी समेत कई घायल हो गए. एक छात्रा की हालत गंभीर बतायी जा रही है.

छात्राओं के प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन हरकत में आ गया. रात 3.30 बजे आईजी, कमिश्नर और डीएम ने बीएचयू के कुलपति गिरीश चंद्र त्रिपाठी के साथ बैठक की.

बवाल तक शुरू हुआ जब पुलिस प्रशासन की टीम बीएचयू के मेनगेट पर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं को हटाने पहुंची. छात्र-छात्राओं के विरोध करने पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया. खबर है कि पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए हवाई फायरिंग भी की.

दो अक्टूबर तक बंद रहेगा कैंपस-

प्रदर्शन को देखते हुए बीएचयू कैंपस को 2 अक्टूबर तक बंद रखने का फैसला किया गया है. वहीं छात्राओं का कहना है कि प्रदर्शन जारी रहेगा. पूरे कैंपस को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. पुलिस और पीएसी के करीब 1500 जवान कैंपस में तैनात किए गए हैं.

लड़कियों का बीएचयू प्रशासन पर गंभीर आरोप-

बनारस हिंदू विश्विद्यालय में पढ़ने वाली एक छात्रा के साथ छेड़खानी हुई थी. छेड़खानी की घटनाओं के विरोध में बीएचयू की छात्राएं पिछले तीन दिन से प्रदर्शन कर रही हैं. प्रदर्शन कर रही छात्राएं कुलपति से आश्वासन की मांग कर रही हैं.

-लड़कियों का आरोप है कि जब उनसे शिकायत की गई तो उन्होंने कहा, “पीएम का दौरा है। अभी आप सभी लोग शांत रहिए।” उधर प्रोटेस्ट कर रही बीएफए स्टूडेंट आकांक्षा सिंह ने विरोध के दौरान सिर के बाल मुंडवा लिया था। उसका कहना है कि छेड़खानी होते रहे और हर वक्त हम खामोश रहे, ऐसा नहीं हो सकता है।

छात्राओं का आरोप है कि घटना के दौरान गेट पर सिक्‍युरिटी गार्ड तैनात था लेकिन उसने छोड़खानी का विरोध नहीं किया। छात्रा हॉस्‍टल में रहकर पढ़ाई करती है। जब मामले की जानकारी अन्‍य छात्राओं को हुई तो हास्‍टलर्स समेत अन्‍य छात्राओं ने विरोध जताना शुरू कर दिया। मामला बीएचयू प्रशासन तक पहुंचा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि न्‍याय के लिए विरोध कर रही छात्राओं को चुप रहने के लिए कहा जा रहा है।

इतना ही नहीं कई छात्राओं को हास्‍टल में ही बंद कर दिया गया है और विरोध दबाने की कोशिश की जा रही है। बनारस हिन्‍दू विश्‍वविद्यालय में छात्रा से छेड़खानी को लेकर अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं, इससे छात्राओं का आक्रोश बढ़ता ही जा रहा है।

कपड़े तक फाड़ने की धमकी देते हैं- 

प्रोटेस्ट कर रही रश्मि ने बताया,”हॉस्टल की खिड़कियों पर लड़के पत्थर में लेटर लिखकर फेंकते है। खिड़कियों पर खड़ा होने पर लड़कियों को अश्लील इशारे करते हैं। विरोध करने पर कहते है, कैंपस में दौड़ाकर कपड़े फाड़ देंगे।

स्टूडेंट पल्लवी ने कहा, ” कैंपस में ही लड़के फिजिकली एब्यूज कर रहे है। कपड़े फाड़ने की धमकी तक दी जाती है। कल की घटना के बाद हम सभी को खामोश रहने की चेतावनी दी गयी है। सर्कुलर जारी किया गया है शाम 6 बजे के बाद सुबह में अंधेरे तक लड़कियां ना निकले। ये कैसी आजादी है।

बीएचयू में ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं के साथ ही आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को भी भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बीएचयू में हुई नियुक्तियों में जातिवादी खेल को लेकर एससी, एसटी कमीशन के अलावा राष्ट्रपति सचिवालय से नोटिस भेजकर जवाब तलब किया गया है।

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