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भूतपूर्व मोदी भक्त, वर्तमान में मोदी पीड़ित… एक पत्रकार की लेखनी से निकला दर्द पढ़िए !

नई दिल्ली, अनुज वर्मा ( नेशनल जनमत) 

अपनी और अपने विभिन्न विभागों के अधिकारियों की मनमानी के आगे पंगु इस सरकार को अब बड़ी-बड़ी बातें करने का कोई भी नैतिक अधिकार शेष नहीं है। जबकि इनकी गलत व कुटिल नीतियों के कारण किसान, व्यापारी, मजदूर, शिक्षक सब के सब हताश ,परेशान व पीड़ित हों और आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने को विवश हों।

राष्ट्रीयता के नाम पर भावनात्मक रूप से देश की जनता को ठगने वाले स्वायम्भू राष्ट्रभक्तों आपके दल की सरकार ने अपनी हठधर्मिता व सत्ता स्वार्थ के कारण मानव ही नहीं अपितु मानवता का भी हनन किया है।अभी समय है ,सचेत होइए ,और सुधरने का प्रयास कीजिये अन्यथा की स्थिति आप और आपके भविष्य के लिए भयावह होगी।

यदि आप स्वयं को हिन्दुओं का सबसे बड़ा हितैषी मानते व बतलाते हैं ,तो आपको आपकी उसी धर्म की व्यवस्थानुसार बताना चाहूँगा कि मानवता की हत्या का क्षमादान आपको न तो यहाँ मिलेगा और न ही वहाँ अभयदान।

समय रहते सही करने का प्रयास करना गलत नहीं है, सो आप भी करिए अन्यथा रहते लोकतन्त्र तक आप तथा आपके दल की भविष्य में यात्रा मात्र गिरते जनाधार और पराजय के कारणों की समीक्षा में ही व्यतीत होगी।

आपमें संवेदना, मानवता गायब हो गई है- 

आपकी गतिविधियों से कहीं भी प्रतीत नहीं होता कि आपमें संवेदना, मानवता जैसे भी कोई गुण शेष बचे हों। जनहित के मुद्दों पर ढोल बजाने के साथ मात्र धार्मिक उन्माद को संबल बनाकर राजनीति करना आपके सत्ता स्वार्थ को स्वतः ही सिद्ध कर रहा है। फिर ऐसी स्थितियों में तो आप तथा आप जैसे अन्य किसी भी राजनैतिक दल में विशेष कोई अन्तर शेष नहीं रहा।

जिसको सही अथवा गलत के मूल्यांकन की कसौटी पर कसा जा सके। क्या ” चोर चोर मौसेरे भाई “वाली उक्ति आपकी वर्तमान कार्यशैली से चरितार्थ हो आपको पूर्व की सरकारों के समकक्ष लाकर खड़ी नहीं कर रही। मुद्दा चाहे जो हो हमें नहीं लगता कि आप किसी भी कसौटी पर खरे सिद्ध हो पा रहे हो, सिवाय मानवता हनन के।

आप सत्ता स्वार्थ की आसक्ति में उलझे हुए हैं- 

अब प्रतीत होने लगा है कि अन्य की भांति आप भी सत्ता स्वार्थ की आसक्ति में उलझे हुए हैं। बड़े अरमानों के साथ देश की व्यवस्था परिवर्तन की आशा में महीनों तक तन, मन, धन से आपकी विजय यात्रा को धरातल पर उतारने का यथा संभव अनवरत प्रयास हमने किया था।

इसके पीछे आशा व विश्वास यही था कि अब निश्चित ही समस्त दुराग्रहों से रहित राष्ट्रहित व जनहित के उद्देश्य वाले नेतृत्व की सरकार बनने जा रही है जो स्वतन्त्र भारत को नित नए आयाम प्रदान कर जन सरोकारों से सीधी जुड़ती जाएगी। काश ऐसा संभव हो सका होता।

आपको स्मरण रखना होगा कि आपने पूर्व में कोई चमत्कार नहीं किया था जिससे कि इतने बड़े जनसमर्थन के रूप में आप विजयी अभियान के साथ सत्ता तक पहुंचे थे, ऐसा भ्रम पालना मात्र आपका भ्रम ही है।

आप किसी चमत्कार से नहीं जीते थे- 

आपको याद करना पड़ेगा कि तत्समय की सरकार की आप जैसी मनमानी नीतियों के साथ ही विभिन्न तथाकथित भ्रष्टाचार व लूट खसोट के नित नए नए मामले जनता के समक्ष या तो आ रहे थे अथवा लाए जा रहे थे। स्थिति जैसी भी थी परन्तु प्रत्येक स्थिति में वह आपके लिए आगामी चुनावी रण में कमजोर विपक्ष को खड़ा करने का ही कार्य हो रहा था।

जिसका लाभ आपको देश के महान जनमानस ने नई व शुचिता पूर्ण व्यवस्था की आशा में दिल खोलकर प्रदान भी किया था। उन सभी कसौटियों पर खरा उतरना आपका नैतिक उत्तरदायित्व होना चाहिए था पर अफसोस आप वहाँ असफल ही रहे। मानवता को मत मारिए देश नहीं बचेगा।

जब देश ही नहीं बचेगा तो शासन कहां करेंगे। इस यक्ष प्रश्न को मानस पटल पर उकेरिए और राष्ट्र हित का ढोल बजाने के बजाय धरातल पर मानवता को सरसाने व राष्ट्रहित साधने का कार्य आरम्भ करिए। अन्यथा भविष्य में आप क्या ,किसी पर भी देश की जनता विश्वास नहीं कर पाएगी।।

 (लेखक अनुज वर्मा”विकल” सीतापुर निवासी पत्रकार व कवि हैं) 

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