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बिहार कोटे के मंत्री अश्विनी चौबे के दावे में कितना दम? क्या बिहारी वाकई बढ़ा रहे हैं AIIMS में भीड़

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे के देश के प्रतिष्ठित एम्स नई दिल्ली में बिहार के लोगों की वजह से भीड़ बढ़ने के बयान पर एक तरफ भीड़ बढ़ गई है तो दूसरी बिहार के लोगों का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट रहा है।

इस बयान को बिहार के लोगों ने बिहार की जनता का अपमान मानते हुए सोशल मीडिया पर अश्विनी चौबे से पूछा कि- मंत्री जी जिस बिहार राज्य के कोटे से मंत्री की कुर्सी पाए हो उसी बिहार के लोगों को बुरा भला कहे रहे हो।

दरअसल केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे ने रविवार को एक कार्यक्रम में कहा था कि बिहार के लोग छोटी सी बीमारी को लेकर भी एम्स पहुंच जाते हैं. लेकिन मंत्री जी ने बिहार के लोगों की मूल समस्या को नहीं समझा।

स्वास्थ्य मंत्री को दावा करने से पहले ये सोचना चाहिए था कि एम्स की चौखट पर देश भर से मरीज पहुंचते हैं. वो हरतरफ से ना उम्मीद होकर वहां पहुंचते हैं। दरअसल पिछड़े इलाकों के लिए एम्स उम्मीद और भरोसे की वो आखिरी किरण हैं, जहां से आगे सारे रास्ते बंद हो जाते हैं।

बिहार से एम्स आए राजेश बताते हैं कि बीमार बेटे को दिखाने के लिए यहां 4 दिन से पड़े हैं. वहीं एक आंख की रोशनी गंवा चुके मध्य प्रदेश के रीवा का रवि पिछले 18 दिनों से एम्स में इलाज करवा रहा है. उसने बताया कि रीवा में डेढ़ महीने में दो डॉक्टरों को दिखाया, जब सुधार नहीं हुआ तो उम्मीद लिए एम्स आ पहुंचा.

दरभंगा निवासी राममोहन कहते हैं कि मेरी शुरुआत सर्दी खांसी से हुई फिर बीमारी और डॉक्टरों के बीच धरपकड़ का खेल चलने लगा. डॉक्टर बदलते रहे, सालों बाद जब पता चला कि बीमारी दिल की है तो दिखाने दिल्ली आ गए.

मानों बिहार के लोग मेडीकल टूरिज्म को बढ़ावा देने आते हो- 

बिहार से ही सांसद और केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी चौबे के कहने का अंदाज कुछ ऐसा रहा जैसे बिहार के मरीज मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने दिल्ली के एम्स आ धमकते हैं. अश्विनी चौबे ने अपने एक भाषण में कहा कि चार-चार, पांच-पांच लोग मामूली बीमारी वाले एक मरीज को लिए एम्स आ जाते हैं. फिर सिफारिश लगवाते हैं, क्या ये ठीक है?

उन्होंने यहां तक कहा कि मैंने एम्स के निदेशक को निर्देश दिया है कि कोई मरीज, किसी साधारण बीमारी के साथ एम्स आता है तो उसको वहीं रेफर कर दीजिए. जहां से वो आया है।

दरअसल चौबे जी भूल गए कि जो भीड़ एम्स में धक्के खा रही होती है वो कहती है कि डायबिटिज जैसी बीमारी में बिहार के डॉक्टर ने केस खराब कर दिया और नौबत किडनी पर असर तक आ पड़ी है.

वक्त के मारे मरीज और उनके तीमारदार बताते हैं कि एम्स में कम से कम लूट-खसोट तो नहीं है, पैसे बनाने की होड़ नहीं है. वहां तो बीमारी से भी लड़ते हैं और टेस्ट और दवाइयों के नाम पर हो रही कमीशनखोरी से भी मरते हैं. जनता कहती है कि वो दिल्ली देखने नहीं, डॉक्टर से दिखाने और जान बचाने आई है.

आंकड़ों के मुताबिक एम्स में रोजाना करीब 13 हजार मरीज आते हैं. इसमें सबसे ज्यादा दिल्ली, फिर यूपी, इसके बाद हरियाणा, फिर बिहार, राजस्थान और पंजाब से आने वाले मरीजों का नंबर है.

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