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देश भर में प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण की मांग करके CM नीतीश कुमार ने खेला बड़ा राजनीतिक दांव

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने रिजर्वेशन पर बड़ा दांव खेला है। पहले बिहार में संविदा-आउटसोर्सिंग की नौकरियों में आरक्षण देने की घोषणा की अब प्राइवेट नौकरियों में आरक्षण की वकालत करके राजनीतिक तापमान को गर्मा दिया।

पिछले बुधवार को बिहार सरकार ने एक बड़े फैसले के तहत सरकार की ओर से प्राइवेट कंपनियों को दिये गये आउटसोर्सिंग वाले काम में भी रिजर्वेशन लागू करने का फैसला लिया। अब इसका असर देश की राजनीति पर भी देखा जा सकता है।

इस फैसले से राज्य की हजारों प्राइवेट नौकरियां रिजर्वेशन के दायरे में आ जाएंगी। बिहार सरकार का यह फैसला देश में पहला ऐसा मामला है जब प्राइवेट कंपनियों में अपरोक्ष तरीके से रिजर्वेशन की कवायद की गयी है और नीतीश के इस फैसले का बीजेपी ने जिस मजबूती से समर्थन किया है उसका असर राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ना निश्चित है।

इस बीच जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा है कि निजी क्षेत्र में अारक्षण की मांग को लेकर आम राय बनाने की कोशिश की जाएगी और संसद के आगामी सत्र में इस पर सरकार से कानून पास कराने का आग्रह किया जाएगा।

निजी क्षेत्र में आरक्षण की वकालत करके नीतीश कुमार सामाजिक न्याय की राजनीति में एक बड़े खिलाड़ी बनके उभरने की चाहत रखते हैं। इस दांव से उनका पिछड़ा और दलित वोट बैंक भी एकजुट हो जाएगा।

इस फैसले से मिलेगी सवर्णों की नाराजगी- 

नीतीश कुमार ने इस कदम से बड़ा जोखिम भी लिया है। नीतीश सरकार के फैसले के तुरंत बाद बीजेपी के सीनियर नेता और राज्यसभा सांसद सीपी ठाकुर ने इसका विरोध भी कर दिया।

नीतीश कुमार अब इस फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। सरकार के फैसले को सपोर्ट करने वालों का तर्क है कि अगर कुछ लोगों में अंसतोष होता है तो उससे कहीं अधिक लोग फैसले से खुश होंगे। उनका मानना है कि जब तक विपक्ष में रूप में लालू सामने रहेंगे, सवर्ण समाज नाराज होकर भी उनके साथ ही जुड़ा रहेगा।

इसके अलावा 2019 से पहले नीतीश कुमार बीजेपी के सामने इस मुद्दे के बहाने अपनी राजनीतिक अहमियत बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं। नीतीश को पता है कि नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी इस मुद्दे पर न पूरी तरह आक्रामक ढंग से समर्थन में आएगी, न ही विरोध में।

ऐसे में पिछड़ों की राजनीति में नीतीश नए सिरे से नेता के रूप में उभर सकते हैं। नीतीश के इस दांव को लालू प्रसाद से गठबंधन तोड़कर एनडीए में जाने के बाद खुद को राष्ट्रीय राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है।

पटेल आरक्षण को भी दिया समर्थन- 

नीतीश कुमार ने गुजरात चुनाव से ठीक पहले वहां पटेल आरक्षण को भी सपॉर्ट दिया है। उन्होंने कहा है कि गुजरात में पटेलों को सरकारी नौकरी और संस्थाानों में उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए आरक्षण दिया जाना चाहिए।

सिन्हा ने कहा, ओमिदयार नेटवर्क को छोड़ने के बाद मुझसे डी. लाइट डिजाइन के निदेशक मंडल में स्वतंत्र निदेशक बने रहने के लिए कहा गया था. केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने के बाद मैंने डी. लाइट डिजाइन के निदेशक मंडल से तत्काल इस्तीफा दे दिया था और कंपनी से अपने संबंध तोड़ दिए थे.

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