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बिजली चोरी रोकने के दावों के बीच, ऊर्जा मंत्री के ही जिले में सपा सरकार से भी ज्यादा बढ़ी चोरी

नई दिल्ली/मथुरा। नेशनल जनमत ब्यूरो 

योगी सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा भले ही प्रदेश में बिजली चोरी रोकने के बड़े-बड़े दावे कर रहे हों लेकिन उनके अपने जिले मथुरा से खबर आ रही है कि बिजली चोरी समाजवादी पार्टी की सरकार से भी ज्यादा बढ़ गई है। इस खबर से जहां श्रीकांत शर्मा के दावों की पोल खुली है वहीं सोशल मीडिया पर लोग श्रीकांत शर्मा को बड़बोला भी बता रहे हैं।

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35 से 40 फीसदी तक बिजली चोरी- 

योगी सरकार के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के जिले में 35 फीसदी तक बिजली चोरी हो रही है। चोरी के यह आंकड़े बिजली विभाग ने जारी किए हैं। प्रदेश में बिजली चोरी रोकने को अभियान चलाए जा रहे हैं। मशीनरी दौड़ रही है। लेकिन बिजली मंत्री के जिले में ही विभाग बिजली चोरी रोकने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

स्थिति ये है कि चोरी का प्रतिशत समाजवादी पार्टी के मुकाबले कम होने के मुकाबले बढ़ता ही जा रहा है। कुछ फीडर क्षेत्रों में तो 40 फीसदी तक बिजली चोरी के मामले सामने आ रहे हैं। इस पर बिजली अधिकारी तर्क दे रहे हैं कि पछले साल के मुकाबले बिजली की खपत भी बढ़ गई है।

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इस बारे में बिजली विभाग का तर्क है कि गत वर्ष अप्रैल, मई और जून माह में 344 मिलियन यूनिट बिजली मथुरा को दी गई थी। जबकि इस साल इन महीनों में मथुरा जिले को 400 मिलियन यूनिट बिजली दी गई है। यानि तर्क ये है कि बिजली ज्यादा मिल रही है इसलिए चोरी ज्यादा हो रही है।

अधीक्षण अभियंता देहात विनोद कुमार गंगवार ने बताया कि सबसे ज्यादा चोरी देहात के डिवीजन थर्ड में मांट, राया और नौहझील में हो रही है। यहां चोरी का प्रतिशत 35 फीसदी है।

बलदेव, फरह और औरंगाबाद इलाके वाले डिवीजन फर्स्ट में पच्चीस प्रतिशत से ऊपर, कोसीकलां, शेरगढ़ और चौमुंहा में 24 प्रतिशत से ऊपर, चतुर्थ डिवीजन गोवर्धन, राधाकुंड, मथुरा गोवर्धन रोड और शहर के एक चौथाई इलाके में बिजली चोरी, लाइन लॉस 26 फीसदी से अधिक है।

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एसई ने बताया कि अब लाइन लॉस कम करने और बिजली चोरी रोकने के लिए पूरे सिस्टम को सुधारा जा रहा है। गांवों में मीटर लगाकर बिल भेजने व वसूली पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए टीम बनाई गई हैं।

क्या कहा था बिजली मंत्री ने- 

ऊर्जा मंत्री का कहना था कि कि बिजली चोरी में पहली बार पकड़े जाने पर पांच साल और दूसरी बार पकड़े जाने पर सात साल की सजा का प्रावधान किया जा रहा है।

जबकि हकीकत ये है कि इधर बिजली विभाग की टीमें उन्हीं मामलों में चोरी की रिपोर्ट लिखाती हैं, जिनमें बिजली चोर से लेन-देन नहीं हो पाता। सवाल यह है कि जो उपभोक्ता ही नहीं है, उसे चोरी के एक्ट में कैसे लाया जाएगा और फील्ड में अभियान चलाने वालों की निगरानी कैसे हो पाएगी।

कैसे रुकेगी चोरी, विभाग में भारी झोल- 

योगी सरकार की ओर से कहा गया है कि जिस क्षेत्र में बिजली चोरी नहीं होगी, वहीं 24 घंटे बिजली दी जाएगी। यह फरमान अखिलेश सरकार में भी पावर कारपोरेशन ने सुनाया था, लेकिन इससे लाइन लॉस कम नहीं हुआ। शहर में ही कुछ क्षेत्र चोरी के लिए बदनाम हैं, लेकिन इनकी ओर से विभाग पर राजनीतिक दबाव हमेशा रहा है।

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इसके अलावा ज्यादातर चोरी के मामलों में विभाग की प्रवर्तन टीम पहले अनाप-शनाप अधिभार लगाती हैं और बाद में लेन-देन के प्रयास किए जाते हैं। इस तरह की शिकायतें अधिकारियों को आए दिन मिल रही हैं।

विभाग के अपने अवर अभियंता स्तर के इंजीनियर भी चोरी पकड़े जाने पर पहले आपसी समझौता से ही मामला खत्म करने का प्रयास करते हैं। चोरी की रिपोर्ट तो केवल लक्ष्य पूरा करने को लिखाई जाती रही हैं।

तकनीकी पहलू यह भी है कि जिसके पास कनेक्शन ही नहीं है, वह विभाग का उपभोक्ता नहीं है। लिहाजा उस पर बिजली चोरी कानून लगाने में कानूनी पेचीदगी सामने आ सकती है।

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