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भगवाराज : उ.प्र. के बाद झारखंड में भी JNU छात्रनेता बीरेन्द्र कुमार समेत छह पर फर्जी केस दर्ज !

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

केन्द्र की बीजेपी सरकार या यूं कहें कि मोदी सरकार के तानाशाही रवैये से अब उसकी राज्य सरकारें भी सबक ले रही हैं. विरोध को बर्दाश्त न करके उसको कुचल कर आंदोलन की आवाज दबाने का चलन राजनीति में नया तो नहीं है लेकिन लोकतंत्र के लिए हानिकारक जरूर है. सरकारी तंत्र के इस रवैये से लोगों में अंदर ही अंदर आक्रोश पनप रहा है जो किसी भी देश या राज्य की शांति के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं.

लखनऊ में मुख्यमंत्री के काफिल को काला झंडा दिखाने पर 11 छात्र-छात्राओं को जेल भेज दिया गया. लखनऊ में ही दलितों-मुस्लिमों पर हो रहे हमलों के विरोध में ज्वाइंट एक्शन कमेटी तिरंगा यात्रा निकालती है तो 22 छात्रों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया जाता है.

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अब खबर ये है कि जेएनयू में यूनाइटेड ओबीसी फोरम के नेता और आदिवासियों के जल-जंगल-जमीन समेत अन्य अधिकारों के लिए आवाज बुलंद करने वाले छात्र नेता बीरेन्द्र कुमार के साथ ही मुस्तकीम सिद्दिकी, रंजीत इंकलाब गोड्डा, नीतीश आनंद, अनुराग, राजू खान पर फर्जी तरीके संगीन धारा लगाकर FIR करके झारखंड पुलिस जेल में डालने के लिये गिरफ्तार करने की पुरजोर कोशिश कर रही है.

यूनाइटेड ओबीसी फोरम की तरफ से छात्रनेता मुलायम सिंह यादव ने नेशनल जनमत को बीरेन्द्र कुमार के समर्थन में एक पत्र भेजा है-

आखिर संघियों और भाजपा सरकार को जेएनयू से इतनी खुन्नस क्यों है? 

झारखंड की संघी मानसिकता की भाजपा सरकार के इशारे पर 19 जून को गोड्डा पुलिस के द्वारा साथी बिरेंद्र व 6 अन्य लोगों पर फर्जी केस  दर्ज कर लिया. साथी बीरेन्द्र कुमार पिछले दिनों CNT/SPT एक्ट में संशोधन एवं बढ़ते सांप्रदायिक हमलों के खिलाफ जल, जंगल व जमीन और लोकतंत्र को बचाने के लिये उठने वाली लोकतांत्रिक आवाजो में दिल्ली से लेकर झारखंड तक शामिल रहे है.  पिछड़े, दलित और आदिवासियों की आवाज दबाने के लिये भाजपा सरकार व उसकी पुलिस किसी भी हद तक जाकर षड्यंत्र के तहत फर्जी केस लगाकर आंदोलनकारियों को चुप कराना चाहती है.

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ओबीसी फोरम हर लड़ाई में साथ- 

यूनाइटेड ओबीसी फोरम इस सरकारी दमन तथा जल-जंगल और जमीन को बचाने के लिए जनता के पक्ष में आवाज उठाता रहा है. फोरम साथी बीरेन्द्र व अन्य साथियों की लड़ाई में साथ है. साथी बीरेंद्र को अल्पसंख्यकों, आदिवासियों, दलितों, महिलाओं के हक-अधिकार के मुद्दे पर बोलने पर अशांति भड़काने का मुकदमा दर्ज किया गया जिसकी हम निंदा करते हैं। पिछले दिनो पटना में हुई बैठक में भी साथी बीरेंद्र को निशाना बनाकर पटना पुलिस ने फर्जी आरोपो में फंसाने की कोशिश की थी.

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संघर्षशील साथी हैं बीरेन्द्र कुमार –

बीरेन्द्र कुमार जेएनयू के छात्र नेता हैं और झारखण्ड के ही दुमका जिले के रहने वाले हैं। पिछले दिनों जेएनयू में सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ते हुए उन्होंने और यूनाइटेड ओबीसी फोरम के साथियों ने जेएनयू के संघी प्रशासन का दमन भी झेला है. पिछले दिनों गोड्डा में किसानों की उपजाऊ 1700 एकड़ जमीन मोदी जी के चहेते उद्योगपति अडानी को दिए जाने के खिलाफ किसान आंदोलन में भी ये दोनों शुरुआती दौर से सक्रिय रहे हैं। यही वजह है कि इंसाफ की इस आवाज को झारखण्ड की संघी सरकार दबाने पर आमादा है।

यूनाइटेड ओबीसी फोरम बीरेन्द्र कुमार पर रघुवर सरकार के इस खुले फासीवादी हमले के खिलाफ सभी लोकतांत्रिक राजनीतिक शक्तियों, सामाजिक न्याय पसंद व लोकतंत्र पसंद नागरिकों, मानवाधिकार कार्यकर्त्ताओं तथा बहुजनों को एकजुट होकर विरोध के लिए आगे आने की अपील करता है. 

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साथी बीरेन्द्र कुमार अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं- 

सामाजिक न्याय की लड़ाई और जनांदोलनों से भाजपा सरकार हर जगह इतनी डरी हुई है कि सामाजिक न्याय की लड़ाई को लड़ने वाले कार्यकर्ताओं को तुरंत गिरफ्तार कर जेल में डालने का काम कर रही है।
जहाँ एक तरफ झारखंड की भाजपा सरकार रघुवर दास के इशारे पर मेरे ऊपर तथा साथी Mustaqim Siddiqui, Ranjit Inquilab Godda, Nitish Anand, अनुराग, राजू खान पर फर्जी तरीके संगीन धारा लगाकर FIR करके झारखंड पुलिस हमलोगों को जेल में डालने के लिये गिरफ्तार करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

वहीं दूसरी तरफ लखनऊ में उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार योगी आदित्यनाथ के इशारे पर साथी Dileep Yadav, अमीक जमाई, विवेक कुमार, रामकरन निर्मल समेत 22 साथियों को कल न्यायिक हिरासत में डाल दिया है।
RSS और भाजपा के द्वारा जारी इस दमन के समय में हम साथी दिलीप यादव, अमीक जमाई, विवेक कुमार, रामकरन निर्मल एवं सभी 22 साथियों के साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई को लड़ने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर हमलोग आपके साथ हैं।

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