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SP-BSP गठबंधन पर सवाल उठाने वाली BJP, ममता को हराने के लिए धुर विरोधी माकपा के साथ आई

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

वामपंथी विचारधारा और दक्षिणपंथी विचारधारा एक दूसरे की धुर विरोधी मानी जाती हैं। वामपंथ जहां मजदूरों व श्रमिकों के हाथ में ताकत की बात करता है वहीं दक्षिणपंथी ताकतें हिन्दुवादी चरमपंथियों को देश की सत्ता सौंपने पर जोर देता है।

हालांकि अन्य विपक्षी दल इन दोनों ही पार्टियों को जातिवाद के स्तर पर एक ही मानते हैं। तमाम सामाजिक चिंतक इस बात पर सवाल उठाते रहे हैं कि दोनों दलों के शीर्ष स्तर पर सिर्फ ब्राह्मणों का ही वर्चस्व क्यों है ?

खैर अब मजेदार खबर ये है कि इन दोनों धुर विरोधी विचारधाराओं से निकली पार्टियों ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का विजय रथ रोकने के लिए मित्रता कर ली है।

पंचायत चुनाव में आए हैं साथ- 

पश्चिम बंगाल में आगामी पंचायत चुनावों के मद्देनजर विचारधारा और राजनीति के लिहाज से एक दूसरे के धुर विरोधी भाजपा और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को हराने के लिए नदिया जिले में हाथ मिला लिए हैं.

माकपा के जिला स्तर के एक नेता ने इसे ‘सीट बांटने के लिए एक औपचारिक सामंजस्य’ बताते हुए कहा कि पार्टी को कई सीटों पर ऐसा करना पड़ा क्योंकि कई गांववाले तृणमूल के खिलाफ आर-पार की लड़ाई चाहते थे.

माकपा भाजपा को अकसर ‘विभाजनकारी ताकत’ बताती रही है. भाजपा की नदिया जिला शाखा के अध्यक्ष ने इसे एक ‘अकेला मामला’ बताया है.

दोनों दलों के कार्यकर्ता रैली में साथ आए- 

दोनों दलों में यह भाईचारा अप्रैल के आखिरी हफ्ते में दिखना शुरू हुआ था जब दोनों दलों ने पंचायत चुनाव प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस की कथित हिंसा के खिलाफ नदिया जिले के करीमपुर-राणाघाट इलाके में एक संयुक्त विरोध रैली का आयोजन किया था.

इस रैली के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ता अपने अपने झंडे लेकर पहुंचे थे. माकपा के नदिया जिला सचिव एवं राज्य समिति के सदस्य सुमित डे ने यह बात मानी कि पार्टी को जमीनी स्तर पर कई सीटों पर ऐसा करना पड़ा क्योंकि कई गांववाले तृणमूल के खिलाफ आर पार की लड़ाई चाहते थे.

पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई के अध्यक्ष दिलीप घोष ने भी माना कि दोनों दलों के समर्थक रैली में मौजूद थे. दिलीप ने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘मुझे जानकारी मिली कि हमने तृणमूल कांग्रेस की हिंसा के खिलाफ एक रैली बुलायी थी. माकपा कार्यकर्ता भी आए थे और हमारी रैली में शामिल हुए थे क्योंकि उन पर भी हमला हुआ था.’

नाम न बताने की शर्त पर राज्य के एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया कि जहां भाजपा अपने उम्मीदवार नहीं उतार सकी वहां उसने वोटरों और पार्टी कैडर दोनों को ही टीएमसी की हिंसा के खिलाफ खड़े होने के पर्याप्त संकेत दिए हैं.

सपा ने उठाए सवाल- 

इस गठबंधन पर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ. निर्भय सिंह पटेल ने खिंचाई करते हुए कहा कि सपा-बसपा साथ आए थे तब तो मोदी जी समेत तमाम भाजपाईयों ने तमाम तरह की बातें की थीं अब इस दक्षिणपंथ-वामपंथ के गठबंधन को क्या कहेंगे ?

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