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उधर PM मोदी पर हमलावर हुए लालू, इधर ‘सरकारी तोते’ CBI को याद आया 11 साल पुराना मामला

नई दिल्ली । नेशनल जनमत ब्यूरो। 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव इन दिनों बीजेपी पर कुछ ज्यादा ही हमलावर हैं। ऐसे में अचानके से 11 साल पुराने गड़े मुर्दे उखाड़ने को लेकर लालू यादव के समर्थकों में रोष है। सोशल मीडिया पर आक्रोश व्यक्त करते हुए  समर्थकों का कहना है कि बीजेपी ने लालू यादव के डर से सीबीआई और इनकम टैक्स विभाग को उनके पीछे लगा दिया है।

समर्थकों का कहना है कि हिम्मत है तो अरुण जेटली और नितिन गडकरी की जांच कराओ इनके पास इतनी अकूत संपत्ति कहां से आ गई।तकरीबन एक महीने पहले भी आयकर विभाग ने लालू यादव के ठिकानों पर छापा मारा था लेकिन आयकर विभाग को उस छापे में क्या हासिल हुआ ये आजतक नहीं पता लग सका। आयकर विभाग के उस छापे के बाद सोशल मीडिया से लेकर सड़क पर आरजेडी कार्यकर्ता भाजपा के विरोध में उतर गए थे।

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12 ठिकानों पर हो रही छापेमारी- 

खबरों के मुताबिक सीबीआई ने लालू यादव के पटना स्थित आवास सहित 12 ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है। सीबीआई ने 2006 में हुए रेलवे के होटल आवंटन से जुड़े मामले में लालू यादव पर रेल मंत्री रहते गड़बड़ी करने के आरोप का आरोप लगाया है। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी, बिहार के उप मुख्यमंत्री और उनके बेटे तेजस्वी यादव, आईआरसीटीसी के तत्कालीन एमडी पीके गोयल,  लालू के विश्वासपात्र प्रेमचंद गुप्ता की पत्नी सुजाता और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

11 साल बाद सीबीआई की नींद टूटी और याद आया कि रेलवे में घोटाला हुआ था- 

ताज्जुब की बात है कि अगर सीबीआई सरकारी बंधन से मुक्त है तो 11 साल पुराने मामले की जांच अब क्यों की जा रही है। सीबीआई का कहना है कि 2006 में रेल मंत्री रहते लालू यादव ने रांची और पुरी के बीएनआर होटलों के रखरखाव के लिए प्राइवेट कंपनियों को टेंडर दिया था। यह टेंडर निजी सुजाता होटल्स को दिया गया था। बीएनआर होटल रेलवे के हैरिटेज होटल हैं जिन्हें उसी साल (2006 में) आईआरसीटीसी ने अपने नियंत्रण में ले लिया था।

केस दर्ज किए जाने के बाद दिल्ली, पटना, रांची, पुरी और गुरुग्राम सहित 12 स्थानों पर छापेमारी की गई है। छापेमारी की खबर सनते ही बड़ी संख्या में लालू यादव के समर्थकों का लालू यादव के आवास के पास इकट्ठे होने का सिलसिला शुरू हो गया। उनके घर के पास जुटने वाले लोगों का कहना है कि मोदी सरकार के इशारे पर लालू यादव को फंसाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल किया जा रहा है।

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लालू यादव की 27 अगस्त की पटना रैली से परेशान है भाजपा- 

लालू यादव आने वाले 27 अगस्त को पटना में गैर भाजपाई दलों की रैली करने जा रहे हैं। इस रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, नीतश कुमार, अखिलेश यादव, मायावती, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वामपंथी दलों के नेता, ओमप्रकाश चौटाला, डीएमके, आरएलडी, जेडीयू समेत लगभग सारे देश के गैर-भाजपाई दलों के नेता इस सभा का हिस्सा बनने जा रहे हैं।

लालू के घर के बाहर जुटे समर्थकों में से राजेश पासवान का कहना है कि लालू यादव द्वारा  विपक्ष को जोड़ने की कोशिशों के कारण ही भाजपा बुरी तरह से डर गई है। भाजपा की कोशिश है कि लालू यादव किसी भी कीमत पर 27 अगस्त को होने वाली रैली न कर पाएं। इसी कारण बीजेपी लगातार लालू यादव के खिलाफ सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है।

लालू यादव की मांग आबादी के हिसाब से भागीदारी दो-  

लालू यादव आबादी के हिसाब से पिछड़ी , दलित और आदिवासी जातियों को भागीदारी देने की बात कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने शंकराचार्य पद भी दलित और पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने की बात कही है। आरजेडी नेता राकेश यादव का कहना है कि भाजपा लालू यादव की इस राजनीति से बुरी तरह डरी हुई है। इसीलिए लालू यादव को शांत करने के लिए ही भाजपा उनके खिलाफ कभी आयकर विभाग का इस्तेमाल कर रही है तो कभी सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है।

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