You are here

सर छोटूराम और चौ. चरण सिंह का इतिहास गवाह है कि कांग्रेस, RSS, BJP को छोड़े बिना जाटों का भला नहीं होगा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

राजस्थान में पिछले दिनों जोधपुर की जयनारायण व्यास यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ कार्यालय के उद्घाटन को लेकर आयोजित कार्यक्रम में बवाल मचा रहा. सामाजिक न्याय समर्थकों ने कार्यक्रम के कांग्रेसीकरण पर सवाल उठाते हुए इसका विरोध किया।

छात्रों ने छात्रसंघ अध्यक्ष कांता ग्वाला और छात्र नेता चेतन ग्वाला पर आरोप लगाया कि उन्होंने हनुमान बेनीवाल का चुनावों के दौरान इस्तेमाल किया और अब इनोगरेसन के मौके पर कांग्रेसी अशोक गहलोत को बुलाकर जाटों का अपमान किया और जाट एकता को तोड़ने का काम किया.

कार्यक्रम के दौरान हनुमान बेनीवाल के समर्थकों ने हनुमान बेनीवाल जिंदाबाद, कांग्रेस मुर्दाबाद, अशोक गहलोत मुर्दाबाद के नारे लगाए.
हमारा इस विवाद को लेकर कहना है कि यह मामला हनुमान बेनीवाल और अशोक गहलोत में से किसी के भी विरोध और समर्थन का मामला नहीं है, यह मामला कौम के हितों और संविधान के सपनों का मामला है.

सर छोटूराम ने हमेशा आरएसएस-बीजेपी का विरोध किया- 

यह मामला इस बात का है कि पूरी बीसवीं सदी में जाटों का संघर्ष हिंदू महासभा, जनसंघ, भाजपा और कांग्रेस के साथ चलता रहा. राष्ट्र निर्माताओं में शामिल रहबरे-आज़म चौधरी छोटूराम ने ज़िंदगी भर हिंदू महासभा (आज का आरएसएस और बीजेपी) और कांग्रेस के विरोध में राजनीति की.

चौधरी छोटूराम ने ज़िंदगी भर चेताया कि ये लोग कभी भी किसान का भला नहीं कर सकते क्योंकि मंडी-फंडी के संगठन हैं. चौधरी छोटूराम ने साल 1920 में कांग्रेस के साथ चलते लंबे संघर्ष के बाद इस्तीफा दिया. यह इस्तीफा कोई आसान इस्तीफा नहीं था क्योंकि उस ज़माने में कांग्रेस ही राजनीति का विकल्प मानी जाती थी.

इसी संघर्ष और समझ के बलबूते पर चौधरी साहब ने पंजाब में 1937 में मुसलमानों-किसानों-दलितों की एकजुटता से यूनियनिस्ट पार्टी की सरकार बनाई.

कांग्रेस छोड़ने के बाद ही चौधरी चरण सिंह सीएम-पीएम बन पाए- 

चौधरी चरण सिंह का ज्यादातर समय कांग्रेस में गुजरा, लेकिन आखिर में किसानों, गरीबों और मजदूरों के हितों के काम करने के लिए चरण सिंह ने भी 1967 में कांग्रेस छोड़ी दी. कांग्रेस छोड़ने के बाद चौधरी चरण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री बन सके और देश के प्रधानमंत्री बने.

चौधरी चरण सिंह का तो कांग्रेस की इंदिरा गांधी से ऐसा तगड़ा विरोध था कि चरण सिंह ने इंदिरा गांधी को गिरफ्तार तक करवाया.
चौधरी देवीलाल 1952 से 1971 तक कांग्रेस में रहे, बाद में उन्होंने भी कांग्रेस छोड़ दी.

चौधरी देवीलाल की पार्टी ने 1985 के हरियाणा विधानसभा के चुनावों में 90 में से 85 सीटें जीतकर कांग्रेस का सुपड़ा साफ कर दिया. बाद में वे देश के उपप्रधानमंत्री भी बने.

निष्कर्ष यही है कि कांग्रेस ने हमेशा जाटों का इस्तेमाल किया. जाट राजनीति में भारत की विविधता के साथ तभी न्याय कर पाये जब उन्होंने कांग्रेस से बगावत की. जाटों की राजनीति तभी आगे बढ़ी जब उन्होंने जाट-मुस्लिम-दलित एकता को बनाये रखे.

बीजेपी ने जाट-दलित-मुस्लिम के बीच खाई पैदा की- 

बीजेपी के बारे में सिर्फ इतना ही कहना है कि बीजेपी और आरएसएस ने जाट बहुल इलाके पश्चिमी यूपी, हरियाणा और राजस्थान में जाट-मुस्लिम-दलित एकता को तोड़ने का काम किया. जाटों का दंगों में झोककर उन्हें वोट बैंक बना दिया.

जाटों के पास अब कोई राष्ट्रीय चेहरा नहीं है, नेता नहीं है. रही सही कसर हरियाणा की आरएसएस और बीजेपी सरकार ने 2016 में जाट आरक्षण आंदोलन के समय जाट युवाओं पर गोली चलाने का आदेश देकर पूरी कर दी.

साल 2013 में 27 अगस्त से 13 सितंबर तक चले मुजफ्फरनगर दंगों ने इस पूरे इलाक़े को सामाजिक और राजनीतिक रूप से बदल कर रख दिया. यह दंगा संघ प्रयोजित दंगा था, जिसमें बाद में बीजेपी के संगीत सोम की गिरफ्तारी हुई. बीजेपी और भारतीय किसान यूनियन के सत्रह नेताओं पर एफआईआर दर्ज हुई. दंगों में 21 दिनों में 43 लोगों की ज़ान गई और 93 लोग घायल हुये.

मीडिया का जातिवादी चरित्र- 

मुजफ्फरनगर दंगों को ब्राह्मणवादी मीडिया ने खुलकर जाट-मुस्लिम दंगों के तौर पर प्रचारित किया. 30 अगस्त 2016 को नंगला मंदौड़ में जाटों की महापंचायत में बीजेपी नेताओं ने मुसलमानों से बदला लेने का आह्वान किया.

जाटों को ज़मकर हिंदू बनाम मुसलमान के खेल में धकेला गया. बार-बार उनको हिंदू के नाम पर भड़काया गया और मुसलमानों के ख़िलाफ खड़ा किया गया. यहीं से जाट जाट नहीं रहें वे हिंदू बन गये.

उन्होंने अपने इतिहास, महापुरूषों और विरासत को भुला दिया. ऐसा होते ही इस पूरे इलाके की पकड़ जो अब तक जाटों के पास थी, वह पकड़ सवर्णों के हाथ में चली गई और जाटों को हिंदू बना दिया गया. बाद में कैराना, सुनपेड, अखलाक और बिजनौर एक के बाद एक होते चले गये.

कांग्रेस, आरएसएस और बीजेपी की इसी गुलामी ने आज जाटों को तबाही के मज़र पर लाकर खड़ा कर दिया है.
कांग्रेस, आरएसएस और बीजेपी को छोड़े बिना जाटों को मुक्ति नहीं मिल सकती.

( लेखक जितेन्द्र महला, राजस्थान के सामाजिक कार्यकर्ता और स्वतंत्र पत्रकार हैं ) 

रौबीली मूंछ वाले ‘द ग्रेट दलित’ चंद्रशेखर रावण का जातिवाद सरकार ने क्या हाल बना डाला, खड़े होइए, लिखिए, बोलिए

सरदार पटेल जयंती पर अखिलेश का कुर्मी समाज से हिस्सेदारी का वादा, बोले भाई को मिलेगा भाई जैसा सम्मान

मोदी सरकार के जश्न में जर्मन अर्थशास्त्री का खलल, अमेरिका के इशारे पर भारत में हुई नोटबंदी !

राष्ट्रनिर्माता: राजनीति और ऊंची प्रतिमाओं के खांचे से कहीं विशालकाय है सरदार का कद

झूला झुलाने के बाद भी बाज नहीं आ रहा चीन, अब 1000 किमी लंबी सुरंग से ब्रह्मपुत्र की धारा मोड़ने की साजिश

सरदार पटेल जयंती के लिए सपा कार्यालय तैयार, देखिए नरेश उत्तम पटेल से खास बातचीत

मोदी सरकार नोटबंदी का जश्न मनाने को तैयार, लेकिन 1 साल बाद भी सारे नोट नही गिन पाया RBI, गिनती जारी

Related posts

Share
Share