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CM योगी द्वारा खुदके और केशव मौर्य के केस वापसी आदेश पर, लोग बोले क्या रामराज्य में ऐसा होता है ?

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

‘रामराज्य’ में राजा पर कोई आरोप नहीं हो सकता शायद इसीलिए मुख्यमंत्री योगी की सरकार ने खुद के और अपने उपमुख्यमंत्री के ऊपर लगे आपराधिक मामलों को वापस लेने का आदेश दिया है।

क्या इसी रामराज्य के लिए बीजेपी सरकार को उत्तर प्रदेश में धार्मिक भाईयों ने सत्ता सौंपी थी। अब सीएम, डिप्टी सीएम ही नहीं बीजेपी के हर नेता के खिलाफ मुकदमा वापस होगा।

दाग धुलने की पवित्र मशीन बीजेपी ने दाग धुलने का नयया तरीका इजाद किया है। अब रामराज्य में राजा पर खुद मुकदमा दर्ज हो ये तो अच्छा नहीं लगेगा ना।

ये एक बानगी भर है उत्तर प्रदेश में राजनेताओं पर लगे 20,000 मुकदमे वापसी के फैसले पर लोगों की सोशल मीडिया पर ऐसी ही प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

दरअसल सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या समेत दर्जनों नेताओं पर लगे केस वापस लेने का निर्देश योगी सरकार ने दिया है। 21 दिसंबर को विधानसभा के शीतकालीन सत्र में यह विधेयक पास हुआ था। शासन की तरफ से जिलों के डीएम को इस मामले में पत्र भी भेजा गया है।

20 हजार बीजेपी नेताओं से मुकदमे वापस होंगे- 

प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश दंड विधि (अपराधों का शमन और विचारणों का उपशमन) (संशोधन) विधेयक, 2017 विधानसभा में पेश किया था। संशोधन के बाद इस फैसले पर मोहर लग गई कि राजनेताओं पर लगे 20,000 मुकदमे वापस होंगे।

इस विधेयक में पहले 2013 तक की अवधि में दर्ज हुए मामले शामिल किए गए थे लेकिन बाद में संशोधन करके इसकी अवधि 31 दिसम्बर 2015 तक कर दी गई।

जिलों में जो पत्र भेजे गए हैं उनमें वह जिले भी शामिल हैं जहां सीएम योगी और डिप्टी सीएम केशव मौर्या के खिलाफ भी मुकदमें दर्ज हैं। जिलाधिकारी को इन सारे मुकदमों वापस लेने को कहा गया है।

गोरखपुर के डीएम को भेजा गया पत्र- 

सरकार की तरफ से गोरखपुर के डीएम को पत्र भेजकर कहा गया है कि 1995 में दर्ज मुकदमा वापस लें। डीएम से कहा गया है कि इसके लिए उनकी तरफ से कोर्ट में आवेदन किया जाए।

इस केस में योगी आदित्यनाथ, शिवप्रताप शुक्ला जो इस समय केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री हैं और सहजनवां से बीजेपी विधायक शीतल पांडेय समेत 10 लोगों के खिलाफ निषेधाज्ञा भंग करने का केस कोर्ट में चल रहा है।

गोरखपुर के एडीएम (सिटी) रजनीश चंद्र ने इस बात की पुष्टि की है कि मुक़दमा रद्द के संबंध में कोर्ट में अपील करने का आदेश मिला है. रजनीश चंद्र ने बताया, ‘अभियोजन अधिकारी से संबंधित अदालत में मुक़दमा रद्द करने के लिए अपील करने को कहा गया है.

पीपीगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज रिपोर्ट के अनुसार, आईपीसी की धारा 188 (वैध रूप से जारी किसी आदेश का किसी लोक सेवक द्वारा उल्लंघन करना) के तहत योगी आदित्यनाथ और 12 अन्य के ख़िलाफ़ पीपीगंज कस्बे में ज़िला मजिस्ट्रेट द्वारा निषेधाज्ञा लागू किए जाने के बावजूद सभा करने पर 27 मई 1995 को केस दर्ज किया गया था.

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