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मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों से नाराज, BJP के मराठा सांसद नाना पटोले ने थमाया इस्तीफा

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

इंसान जब संस्थान से ऊपर खुद को समझने लगता है तो मान लेना चाहिए कि उसके बुरे दिन शुरू हो चुके हैं। वर्तमान समय में भारतीय जनता पार्टी के सबसे बड़े स्टार प्रचारक नरेन्द्र मोदी और उनके खासमखास अमित शाह को भी ये रोग बुरी तरह से जकड़ चुका है।

शायद यही वजह है कि पार्टी के भीतर से भी अब इस जोड़ी के विरोध में आवाजें उठने लगी हैं। पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, सांसद शत्रुघ्न सिन्हा, पूर्व मंत्री अरुण शौरी तो लगातार इस एकाधिकार के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहे हैं।

अब महाराष्ट्र से पार्टी के सांसद नाना पटोले ने मराठाओं वाला दमखम दिखाते हुए मोदी जी की नीतियों के खिलाफ अपनी लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। महाराष्ट्र के गोंदिया से सांसद नाना पटोले ने मोदी सरकार की किसान विरोधी नीतियों से नाखुश होकर यह फैसला लिया है।

किसानों के मुद्दे पर लगातार नाराजगी जताते रहे हैं- 

इससे पहले भी प्रखर किसान नेता नाना पटोले और पार्टी के बीच खींचतान की खबरें आती रही हैं। सितंबर महीने में हुई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में गैरहाजिर होकर उन्होंने अपनी नाराजगी साफ जाहिर की थी।

तब इसकी सफाई में पटोले ने कहा था कि वह अपने संसदीय क्षेत्र गोंदिया में पहले से तय कार्यक्रम में व्यस्त थे, इसी वजह से उन्होंने इस अहम बैठक में शिरकत नहीं की थी।

यही नहीं पटोले लगातार प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज के तरीकों की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने अक्टूबर महीने में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मुलाकात की थी। दोनों के बीच करीब ढाई घंटे तक चर्चा हुई थी। तब माना जा रहा था कि वह शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।

बता दें कि इससे पहले नाना पटोले ने 2009 में किसानों के मुद्दे पर कांग्रेस से नाराज होकर विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था। 2014 के चुनाव में वह बीजेपी से चुनाव जीते और सांसद बने। बीजेपी से चुने जाने के बाद भी नाना मोदी के प्रभाव में आए बिना अपनी बात मुखरता से कहते रहते थे।

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