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बीजेपी पर नीतीश का हमला, गैर आदिवासी ही बनाना था सीएम तो झारखंड बना ही क्यों

रांची (झारखंड)। नेशनल जनमत ब्यूरो

बिहार में महागठबंधन पर लग रहे मीडिया कयासों के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बीजेपी और पीएम नरेन्द्र मोदी के फैसले पर करारा हमला बोला है. रांची में नीतीश ने कहा कि जब गैर आदिवासी को ही झारखंड का मुख्यमंत्री बनाना था, तो इस राज्य को बिहार से अलग करने की जरूरत ही क्या थी. नीतीश कुमार बुधवार को मोरहाबादी मैदान में आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से आयोजित सरकार गिराओ, झारखंड बचाओ महारैली को संबोधित कर रहे थे.

पिछड़ों और आदिवासियों के मुद्दे उठा रहे हैं नीतीश –

विपक्ष को एकजुट करने की मुहिम को बढ़ाते हुए अब नीतीश कुमार ना सिर्फ बिहार से बाहर कदम बढ़ा रहे हैं बल्कि दलितों, पिछड़ों से लेकर आदिवासियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. न्यायिक सेवाओं में बिहार में आरक्षण लागू करना इसी सामाजिक न्याय मुहिम का एक हिस्सा है. इसलिए नीतीश कुमार ने रैली में आदिवासी अधिकारों के प्रति मुखर होते हुए कहा कि किसी से मेरा व्यक्तिगत द्वेष नहीं है. किसी प्रकार का दुराग्रह नहीं है. लेकिन जब यहां गैर आदिवासी मुख्यमंत्री बना, तो आश्चर्य हुआ.

झारखंड गठन की मूल भावना से हुआ है खिलवाड़-

नीतीश कुमार ने कहा कि कानून में किसी को मुख्यमंत्री बनाने की कोई रुकावट नहीं है. किसी भी पार्टी को यह तय करने का अधिकार है कि मुख्यमंत्री कौन होगा. इस पर प्रश्न चिह्न नहीं उठाता हूं, लेकिन झारखंड गठन की मूल भावना क्या थी. इसलिए मैंने यह बात पटना में भी कही थी. बहुत लोगों को अच्छी नहीं लगी थी. उम्मीद थी कि अलग राज्य बनने पर झारखंड तरक्की करेगा. एक नंबर का स्टेट बनेगा, लेकिन जो कुछ हो रहा है, हम सब देख रहे हैं.

चंपारण सत्याग्रह से की आदिवासी सेगेंल अभियान की तुलना-

नीतीश कुमार ने आदिवासी सेंगेल अभियान की तुलना चंपारण सत्याग्रह से की.उन्होंने कहा चंपारण सत्याग्रह महात्मा गांधी ने किसानों व रैयतों के खिलाफ हो रहे अत्याचार और टैक्स लगाने के विरोध में शुरू किया था. अब 2017 में झारखंड सरकार सीएनटी-एसपीटी में छेड़छाड़ कर रही है. इसके इसलिए भी अहिंसात्मक आंदोलन चलाने की जरूरत है. राज्यपाल से मिल कर सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन पर स्वीकृति नहीं देने का आग्रह करेंगे. इस दौरान आदिवासी सेंगेल समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुरमू मौजूद रहे.

झारखंड में भी लागू होगी शराबबंदी-

नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में शराबबंदी से भले ही पांच हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है, लेकिन लोगों के 10 हजार करोड़ रुपये अपने परिवार में गए हैं. सड़क दुर्घटनाओं और अपराध में कमी आई है. झारखंड में भी शराबबंदी को लेकर महिलाएं आवाज उठाने लगी हैं. मुझे पूरा विश्वास है कि आनेवाले दिनों में झारखंड में शराबबंदी लागू करनी पड़ेगी. झारखंड के आदिवासी नेता शिबू सोरेन, बाबूलाल मरांडी समेत कई नेता शराबबंदी के पक्षधर है.

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