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बोये जाते हैं बेटे, पर उग जाती हैं बेटियां…..

सोशल मीडिया। नेशनल जनमत डेस्क

बोये जाते हैं बेटें, उग जाती है बेटियां

खाद पानी बेटों को, पर लहराती हैं बेटियां।

स्कूल जाते हैं बेटे, पर पढ़ जाती हैं बेटियां।

मेहनत करते हैं बेटे, पर अव्वल आती हैं बेटियां।

रुलाते हैं जब खूब बेटे, तब हंसाती हैं बेटियां।

नाम करें न करें बेटे, पर नाम कमाती हैं बेटियां।

जब दर्द देते बेटे, तब मरहम लगाती हैं बेटियां।

छोड़ जाते हैं जब बेटे, तो काम आती हैं बेटियां।

आशा रहती है बेटों से, पर पूर्ण करती हैं बेटियां।

हजारों फरमाइश से भरे हैं बेटे, पर समय की नज़ाकत को समझती बेटियां।

महिला सशक्तिकरण को मजबूत बनाती इस कविता को
पूजा सागर की फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है

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