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आप लिपटे रहिए धर्म की चासनी में, यहां देश में पहली बार जाति के नाम पर बन गया ‘ब्राह्मण आयोग’

नई दिल्ली। महेन्द्र यादव (नेशनल जनमत)

देश के मौजूदा माहौल में भगवा सरकारों पर मनु स्मृति के पुनर्स्थापना के आरोप लगते रहते हैं। लेकिन भगवा सरकारों से एक कदम आगे बढ़ते हुए आंध्र प्रदेश की तेलगु देशम पार्टी के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने वो कर दिखाया जो पूरे देश में कहीं नहीं हो पाया।

राजपूत, कायस्थ, वैश्य, शेख, सैयद, मुगल, पठान, जैन, जाट, कापू और तमाम गैर आरक्षित जातियो… आप लोगों को भी अपने-अपनी जाति के लिए कल्याण आयोग का गठन करवाना चाहिए। आप लोगों का साथ लेकर, आपकी दम पर ब्राह्मणों ने तो अपना काम करवा लिया. आप लोग देखते रह गए।

आपको लगता है कि सारा हिस्सा ओबीसी, एससी, एसटी चट कर रहे हैं..हकीकत देखिए..अपनी आने वाली पीढ़ी का भला सोचिए…आपको नहीं पता है, ये अलग बात है पर नई पीढ़ी को पता चल जाएगा कि ब्राह्मण कल्याण आयोग बना हुआ था और आप लोग सोए हुए थे…

ढूंढ़ ढूंढ़ कर केवल ब्राह्मणों पर पैसा लुटाया जा रहा है। सरकार ने ब्राह्मण कल्याण निगम तक बना रखा है। किसी और अपर कास्ट को भी इसका फायदा नहीं मिलता। पढ़ाई लिखाई से लेकर कंपटीशन तैयारी, रोजगार के लिए लोन, सब कुछ “ऑनली फॉर ब्राह्मण”।
“नो अदर ऑर अपर कास्ट एलाउड इन आंध्र प्रदेश।”

क्या इस देश में किसी एक और केवल एक जाति के लिए बाकायदा घोषित तौर पर कोई कल्याण आयोग बन सकता है…केवल एक जाति के लिए योजनाएँ बन सकती हैं…ऐसी सुविधा तो लुप्त होने जा रहीं कोरबा जनजाति तक के लिए नहीं है, जिन्हें राष्ट्रपति ने गोद लिया है….

ध्यान रहे, ये कोई निर्धन कल्याण निगम नहीं है, न ही सवर्ण कल्याण निगम है। ये केवल और केवल ब्राह्मण कल्याण निगम है। जो कह रहा है कि उसका बजट दुगुना करो।

गरुड़, भारती, गायत्री, कश्यप, द्रोणाचार्य, चरक, चाणक्य,भार्गव, वशिष्ठ – इन सबको सवर्ण खामखां अपना मानते रहे हैं। आंध्रप्रदेश में देखिए…इनके नाम पर चलने वाली योजनाओँ का लाभ किसी गैर ब्राह्मण सवर्ण तक लेने की नहीं सोच सकता।

क्या “आंधप्रदेश ब्राह्मण कल्याण निगम” में ब्राह्मण की जगह गोंड, कोरबा, कोरकू, कुशवाहा, कुर्मी, यादव, प्रजापति, रजक, चौहान, अग्रवाल, जाटव, अंसारी, कुरैशी, कायस्थ, जाट, कापू, कम्मा, या किसी अन्य जाति का नाम रखकर देखिए…कितना जातिवादी-सा लगने लगेगा।

तुष्टिकरण लगने लगेगा, जाति के आधार पर देश को बाँटने की साजिश लगनी लगेगी।

(लेखक महेन्द्र यादव मध्य प्रदेश निवासी वरिष्ठ पत्रकार हैं) 

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