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‘ब्रांड मोदी’ की जमीनी हकीकत, 3 साल में 17,000 अमीर भारतीयों ने विदेशी मुल्क की नागरिकता ले ली

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

प्रधानमंत्री बनते ही नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने पहला काम विदेश भ्रमण का शुरू किया। पीएम की विदेश यात्राओं पर जब विपक्ष सहित जागरूक जनता ने सवाल उठाए तो पीएम के पक्षकारों के साथ ही गोदी मीडिया ने प्रचारित करना शुरू किया कि पीएम के दौरों से दुनिया भर में भारत की इज्जत बढ़ रही है।

प्रशंसा और चापलूसी के क्रम में देश और देश की समस्याएं पीछे छूटती चली गईं और प्रधानमंत्री देश से ज्यादा बड़े ब्रांड साबित किए जाने लगे। इस ब्रांडिंग में बीजेपी की नौकरीपेशा आईटी सेल की भूमिका के अलावा तथाकथित मुख्यधारा के कहे जाने वाले मीडिया संस्थानों ने जबरदस्त रोल प्ले किया।

ऐसे समय में जब प्रधानमंत्री दावा कर रहे हों कि भारत के पासपोर्ट का वज़न दुनिया भर में बढ़ गया है, ठीक उसी समय ये खबर आना कि उनके प्रधानमंत्री बनने के बाद ही 17,000 के करीब अमीर भारतीय भारत के पासपोर्ट का त्याग कर देते हैं, ब्रांड मोदी की छवि को धूमिल करते हैं।

देश के जाने माने उद्योगपति ने छोड़ा देश- 

मुंबई के मशहूर बिल्डर हीरानंदानी ग्रुप के संस्थापक सुरेंद्र हीरानंदानी ने भारत की नागरिकता छोड़ दी है. अब वे साइप्रस के नागरिक हो गए हैं. साइप्रस की ख़्याति टैक्स हैवेंस के रूप में है, मतलब जहां कर चुकाने का झंझट कम है.

हीरानंदानी ने कहा है कि इस कारण से उन्होंने नागरिकता नहीं छोड़ी है. भारतीय पासपोर्ट पर वर्क वीज़ा लेना मुश्किल हो जाता है इसलिए नागरिकता छोड़ी है. अब हीरानंदानी जी को किस लिए वर्क वीज़ा चाहिए था, वही बता सकते हैं.

उन्होंने कहा है कि मेरा बेटा हर्ष भारत का नागरिक रहेगा और भारत में कंपनी का काम देखेगा. हर्ष की शादी अभिनेता अक्षय कुमार की बहन से हुई है. फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार सुरेंद्र हीरानंदानी भारत के 100 अमीर लोगों में से हैं.

हर साल बढ़ रही है देश छोड़ने वालों की संख्या- 

दुनिया भर में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर है, जिसके अरबपति नागरिकता छोड़ देते हैं. 2015 और 2017 के बीच 17,000 अति अमीर भारतीयों ने भारत का त्याग कर दिया.

न्यू वर्ल्ड वेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार 2017 में 7,000 अमीरों ने भारत की नागरिकता छोड़ दी और दूसरे मुल्क की नागरिकता ले ली. 2016 में 6,000, 2015 में 4,000 अमीर भारतीयों ने प्यारे भारत का त्याग कर दिया.

सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (सीबीडीटी) ने मार्च के महीने में पांच लोगों की एक कमेटी बनाई है. यह देखने के लिए कि अगर इस तरह से अमीर लोग भारत छोड़ेंगे तो उसका असर कर संग्रह पर क्या पड़ेगा.

भारत का पासपोर्ट दुनिया में 86 वें नंबर पर- 

जर्मनी का पासपोर्ट हो तो आप 177 देशों में बिना वीज़ा के जा सकते हैं. सिंगापुर का पासपोर्ट हो तो आप 176 देशों में बिना वीज़ा के जा सकते हैं. तीसरे नंबर पर आठ देश हैं जिनका पासपोर्ट होगा तो आप 175 देशों में वीज़ा के बग़ैर यात्रा कर सकते हैं.

डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, इटली, जापान, नार्वे, स्वीडन और ब्रिटेन तीसरे नंबर पर हैं. 9वें नंबर पर माल्टा है और 10वें पर हंगरी. एशिया के मुल्कों में सिंगापुर का स्थान पहले नंबर पर है.

दुनिया में भारत के पासपोर्ट का स्थान 86वें नंबर पर है. भारत का पासपोर्ट है तो आप मात्र 49 देशों में ही वीज़ा के बिना पहुंच सकते हैं.

अब सवाल वही क्या इतनी मामूली वृद्धि की मार्केटिंग प्रधानमंत्री मोदी के अलावा देश में कोई और कर सकता है. शायद नहीं क्योंकि मौजूदा पीएम को पता है कि गोदी मीडिया कभी उनकी बात का विश्लेषण करेगा नहीं.

उनके इसी बिना सर पैर के बयान को बार-बार छापा जाएगा, दिखाया जाएगा, किस पत्रकार के पास इतनी फुर्सत है जो प्रधानमंत्री की कही बात का विश्लेषण करें उसे सत्यता की कसौटी पर कसें, गोदी मीडिया तो प्रधानमंत्री के भाषण को बिना विश्लेषण के अक्षरश: दिखाया जाएगा ताकि लोग यही समझें कि पीएम बात तो सही कह रहे हैं।

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