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झांसी में कुर्मी समाज की कुप्रथा के विरुद्ध जंग का असर, मृतक के परिजन नहीं देंगे मृत्युभोज

नई दिल्ली/झांसी। नेशनल जनमत ब्यूरो

झांसी में समाजसेवी और युवा पटेल समाज के लोगों ने पटेल दहेज एवं कुप्रथा उन्मूलन समिति का गठन किया है. जिसका मुख्य उद्देश्य दहेज-मृत्युभोज- फिजूलखर्ची को कम करने के लिए सामूहिक विवाह को बढ़ावा देना है. इस समिति के सदस्यों का मानना है कि किसी की मृत्यु पर भोज का आयोजन करना वो भी भव्य तरीके से ऐसा प्रतीत होता है कि मृत्यु का जश्न मनाया जा रहा हो.

इसलिए समिति के सदस्यों की सामाजिक सदस्य की मृत्यु की जानकारी होने पर समिति की टीम उसके घर जाकर सांत्वना तो देती ही है साथ में ये भी निवेदन किया जाता है कि आप लोग अपने बुजुर्ग के मरने का जश्न ना मनाएं. तेरहवीं को प्रतिष्ठा और मान की वस्तु ना बनाकर साधारण ढ़ंग से शांतिपाठ करवाकर प्रसाद वितरण करवा दें.

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किशोरपुरा के घनश्याम दास पटेल के परिजनों ने कहा मृत्युभोज नहीं देंगे-

ग्राम किशोरपुरा में दिनांक 15 जून को राजेन्द्र पटेल सुट्टा के ताऊजी व श्री आनंद पटेल के दादाजी घमश्याम दास पटेल मुखियाजी का निधन हो गया था। इसके जानकारी होने पर पटेल दहेज एवं कुप्रथा उन्मूलन समिति के कार्यकर्ता गांव गए और शोक में डूबे परिवार से मुलाकात की व तेरहवीं के दिन मृत्युभोज ना करने का निवेदन गांव के सभी लोगों के सामने रखा।

परिवार व गाँव के सभी लोगों ने समर्थन प्रदान करते हुए कहा कि तेरहवीं के लिए कोई भी कार्ड वितरित नहीं किये जाएंगे और तेरहवी के दिन सिर्फ शांतिपाठ किया जाएगा।

इस दौरान सुरेंद्र निरंजन, राजेन्द्र सुट्टा, मधुकर दादा, डॉ वी के निरंजन,अवधेश निरंजन, विनोद पिपरा, अरुण सचान एवं ग्राम किशोरपुरा के हरसहाय वर्मा, ओमप्रकाश पटेल, जय प्रकाश पटेल, ज्योति प्रकाश जी उपस्थित रहे।

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मेरी मृत्यु के बाद भोज ना दिया जाए-

मीटिंग में मौजूद गांव के बरिष्ठजनों की उपस्थिति में हरसहाय वर्मा ने घोषणा करते हुए अपने परिजनों से निवेदन किया गया कि उनकी मृत्यु उपरांत मृत्युभोज का आयोजन ना किया जाए। इतना ही नहीं उन्होंन यहां तक कहा कि मैं अपनी अंतिम इच्छा में स्टांप के पेपर पर लिखवाकर जाऊंगा कि मेरे मरने के बाद मेरे मरने का जश्न ना मनाया जाए. उस पैसे को कहीं अन्य खर्च कर दिया जाए.

समिति के प्रमुख कार्य एवं उद्देश्य- 

1- बुंदेलखंड में कुर्मी समाज मे फैली कुप्रथाओं को दूर करने हेतु समाज मे जागरूकता फैलाना और कुप्रथाओं को दूर करने का प्रयास करना.

2- समिति के सदस्य दहेज न लेने का शपथ पत्र भी भरवाते हैं. अभी तक कुल 56 लोग शपथ पत्र दे चुके हैं कि वो अपनी या अपने बेटे की शादी में दहेज नहीं लेंगे।

3- बेटी का जन्म होने पर बेटी की मां से पौधा लगवाते हैं।

4- तेरहवीं में मृतकभोज का आयोजन न करने और लोगों से भी मृतकभोज ना खाने का निवेदन करते हैं। ललितपुर जिले में समाज मे 50% से ज़्यादा मृतक भोज समाप्त हो चुका है।

5- सभी प्रकार के नशे-गुटका,शराब आदि छोड़ने के लिए सभाएं करते हैं।

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कार्यकर्ता दहेज उन्मूलन समिति-  अरुण सचान, मुकेश सचान

कार्यकर्ता मृत्युभोज उन्मूलन- रतिराम पटेल, डॉ आर के निरंजन, मधुकर निरंजन दादा

कार्यकर्ता नशा उन्मूलन- डॉ. वी के निरंजन, डॉ. अवधेश निरंजन

कार्यकर्ता बेटी बचाओ- डॉ. प्रदीप पटेल, मनोज पटेल मड़वा, पुष्पेंद्र पटेल, मनोज पटेल लोड़ी

नेशनल जनमत के विचार- 

मृत्युभोज या तेरहवीं विशुद्ध रूप से ब्राह्मणों को लाभ पहुंचाने का एक साधन मात्र इस कुप्रथा से बाहर निकलकर समाज की बेहतरी की दिशा में ्प्रयास करनेकी जरूरत है. नेशनल जनमत का मानना है कि आप मृत्युभोज के स्थान पर-

1- अपने बुजुर्ग के नाम पर गांव के स्कूल में एक कमरा बनवा सकते हैं.

2- मृत्युभोज में खर्च होने वाले पैसे को बचाकर उसको गांव की किसी गरीब कन्या की शादी में लगवा सकते हैं.

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3- अपने पूर्वज के नाम के कोई भी सामाजिक कार्यक्रम की परंपरा प्रारंभ कर सकते हैं.

4- उस पैसे को अपने घर की किसी बेटी की शिक्षा के नाम पर खर्च करने के लिए अलग से एकाउंट में जमा करा सकते हैं.

5- मृत्युभोज का खर्चा बचाकर किसी बच्चे की एक साल की शिक्षा का खर्च वहन कर सकते हैं

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