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बुंदेलखंड: सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग कर रहे किसानों को MP पुलिस ने कपड़े उतरवाकर पीटा

नई दिल्ली/ बुंदेलखंड, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

मध्यप्रदेश के 6 और उत्तर प्रदेश के 7 जिले यानि बुंदेलखंड के 13 जिलों के किसान परेशान हैं। लोकसभा चुनाव से पहले बुंदेलखंड के हालात सुधारने के पीएम मोदी ने बड़े-बड़े वादे किए थे लेकिन हकीकत ये है कि इस समय पूरे बुंदेलखंड में सूखे के हालात हैं। किसानों की परेशानी से ना तो यूपी की आदित्यनाथ सरकार को और ना ही मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार को कोई लेना-देना है।

किसानों की परेशानी क समझने के बजाए उनकी मांगों को कुचलने के लिए शिवराज सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। हालिया मामला मध्य प्रदेश बुंदेलखंड के टीकमगढ़ जिले का है।

टीकमगढ़ जिले को सूखा-ग्रस्त घोषित करने की मांग को लेकर किसान प्रदर्शन कर रहे थे। कलेक्टर को ज्ञापन देने जा रहे किसानों की पुलिस के साथ झड़प हो गई, जिसके बाद पुलिस वालों ने कई किसानों को थाने ले जाकर उनकी जमकर पिटाई कर दी।

पुलिस ने कार्रवाई करते हुए किसानों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले भी छोड़े। किसानों का आरोप है कि वे प्रदर्शन कर वापस अपने गांव दुनातर लौट रहे थे कि पुलिसवालों ने उनकी गाड़ी को रोक लिया और उन्हें थाने ले गए जहां पर कपड़े उतरवाकर उनकी जमकर पिटाई की गई।

यह घटना मंगलवार की है। युवा कांग्रेस के खेत बचाओ-किसान बचाओ अभियान के तहत हजारों की संख्या में किसान टीकमगढ़ जिले को सूखा-ग्रस्त करने की मांग कर रहे थे। युवा कांग्रेस के राज्य प्रमुख कुणाल चौधरी प्रदर्शन की शुरुआत करते हुए किसानों को लेकर कलेक्टर के कार्यालय की तरफ बढ़ रहे थे कि पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोकने का प्रयास किया।

कुणाल चौधरी ने बताया कि कलेक्टर ने हम लोगों में तीन लोगों को अपने कमरे में आने की अनुमति देते हुए ज्ञापन सौंपने के लिए कहा था और इसीलिए हम कलेक्टर के ऑफिस पहुंचकर उन्हें टीकमगढ़ सूखा-ग्रस्त घोषित करने के मामले में ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

कुणाल और किसान ऑफिस के बाहर धरने पर बैठ गए और कलेक्टर से आग्रह करने लगे कि वे बाहर आकर ज्ञापन स्वीकार करें। इसी बीच पुलिस ने आकर किसानों पर लाठीचार्ज कर दिया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इतना ही नहीं किसानों को कलेक्टर के ऑफिस के बाहर से हटाने के लिए वॉटर कैनन का भी इस्तेमाल किया गया।

प्रदर्शन के बाद जब किसानों का एक ग्रुप ट्रेक्टर ट्रोली में बैठकर वापस जाने लगा तो दाहात थाने के पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक लिया। कुणाल ने आरोप लगाया कि पुलिस ने किसानों को लॉकअप में बंद करके उनके कपड़े उतरवाकर बेरहमी से पिटाई की।

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