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जातिवार जनगणना के आंकड़े घोषित करने की मांग, 25 को विधानसभा का घेराव करेगी RVCP

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

छात्र हितों की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाने वाले छात्र संगठन  राष्ट्रीय विद्यार्थी चेतना परिषद  ने देवरिया जिले में आयोजित एक छात्र सम्मेलन में मोदी-योगी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि मोदी और योगी सरकार की छात्र विरोधी नीतियों के कारण परिषद के छात्रों को आंदोलन के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।

राष्टीय विद्यार्थी चेतना परिषद ने मोदी सरकार से ओबीसी की आबादी के  आंकड़े जारी करने की मांग की है। परिषद ने मोदी सरकार को चेताते हुए कहा है कि यदि आगामी 25 अगस्त तक मोदी सरकार ने ओबीसी जनगणना के आंकड़े नहीं बताए तो परिषद लखनऊ विधानसभा का घेराव करेगी।

इस मौके पर राष्टीय विद्यार्थी विद्यार्थी चेतना परिषद के संयोजक मनोज यादव ने बोलते हुए कहा कि पीएम मोदी ने हर साल 2 करोड़ नौजवानों को रोजगार देने का वादा किया था पर युवाओं को रोजगार देना तो दूर मोदी ने अपनी गलत आर्थिक नीतियों के कारण लोगों का रोजगार छीनकर उन्हें बेरैजगार बना दिया। मोदी की गलत नीतियों के कारण आज पूरा आईटी क्षेत्र बर्बाद हो गया है।

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चेतना परिषद के राष्टीय अध्यक्ष डा. उदयभान ने न्यायपालिका में दलितों पिछड़ों को भागीदारी देने की मांग कीं। डॉ. उदयभान ने कहा कि जब दलित और पिछड़े समुदाय के लोग आईएएस बन सकते हैं, डॉक्टर बन सकते हैं, इंजीनियर बन सकते हैं, उद्योगपति बन सकते हैं, फिल्म स्टार बन सकते हैं, खिलाड़ी बन सकते हैं, तो फिर उच्च न्यायपालिका में जज क्यों नहीं बन सकते। इसके लिए डॉ. उदयभान ने न्यायिक नियुक्ति आयोग के गठन की जरूरत पर बल दिया और समाजिक भागीदारी को प्राप्त करने के लिए आयोग की मांग के लिए ओबीसी,एससी,एसटी, औऱ मुस्लिम समेत वंचित समुदाय के लोगों से आग्रह किया कि इसे प्राप्त करने के लिए लिए जनजागरण करने की अपील की।

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इस मौके पर उपस्थित असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिव कुमार सिंह ने विश्वविद्यालयों में शोध छात्रों के एडमीशन में पारदर्शिता लाने की मांग की। औऱ आरक्षण व्यवस्था को नियमत: लागू करने की मांग की।

छात्र सम्मेलन में बोलते हुए बीएचयू के छात्र सौरभ ने कहा कि मोदी जी अपने आपको ओबीसी कहते हैं तो फिर मोदी जी अगर असली ओबीसी हैं तो ओबीसी को उसकी आबादी के हिसाब से 60 फीसदी भागीदारी दें। इस देश में जब दलितों को उनकी आबादी के हिसाब से नौकरियों में भागीदारी मिल सकती है , आदिवासियों को उनकी आबादी के हिसाब से भागीदारी मिल सकती है तो फिर ओबीसी को उनकी आबादी के हिसाब से भागीदारी क्यों नही मिल सकती। आज देश में पिछड़ों के ही हकों को मारा जा रहा है।

राष्ट्रीय विद्यार्थी चेतना परिषद के प्रदेश अध्यक्ष और काशीविद्यापीठ के शोध छात्र इस्तखार अली ने विश्वविद्यालय की गलत शिक्षा नीति तथा रोजगार के अवसर को खत्म करने के खिलाफ छात्रों नौजवानों को लामबंद करके आगे जन आंदोलन को तेज करने पर विशेष ध्यान देने की अपील की। विद्यार्थी चेतना परिषद के नेता रणधीर पाल ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों पर दलितों पिछड़ों की बैकलॉग भरने की मांग की।

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इस अवसर पर राष्ट्रीय विद्यार्थी चेतना परिषद के नेता राजेश यादव रणधीर पाल असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ शिव कुमार सिंह पूर्व जिला पंचायत सदस्य कमला प्रसाद गोरखपुर विश्वविद्यालय के शोध छात्र विपिन कुमार तथा बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोध छात्र सौरभ तथा अन्य गणमान्य लोग उपस्थित उपस्थित रहे।उपस्थित लोगों आरक्षण बचाने और सामाजिक जनजागरुकता लाने के लिए इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए रणबीर यादव और देवरिया की पूरी टीम को धन्यावाद दिया।

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