You are here

सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार ने मीडिया मैनेज करने के लिए विज्ञापनों पर खर्च किए 3,755 करोड़

नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सरकारी खर्चे में कमी करने की नसीहत देने वाले पीएम नरेन्द्र मोदी की कथनी-करनी में कितना फर्क है, ये बात मोदी सरकार द्वारा मीडिया मैनेज करने के लिए लुटाई कई भारी भरकम रकम से साबित होती है।

सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने विज्ञापन और दृश्य प्रचार निदेशालय (डीएवीपी) के माध्यम से बीते बरस सिर्फ प्रिंट मीडिया के विज्ञापनों पर 468.53 करोड़ रुपये खर्च किए.

सूचना और प्रसारण राज्यमंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने सोमवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि वर्ष 2016-17 में विज्ञापनों पर सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों ने डीएवीपी के माध्यम से जहां 468.53 करोड़ रुपये खर्च किए, वहीं वर्ष 2015-16 में यह राशि 508.22 करोड़ रुपये और वर्ष 2014-15 में यह राशि 424.84 करोड़ रुपये थी.

एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि सरकार के मंत्रालयों ने वर्ष 2016-17 में डीएवीपी के माध्यम से रेडियो आकाशवाणी पर जारी विज्ञापनों पर 37 करोड़ रुपये, एफएम रेडियो पर जारी विज्ञापनों पर 145.57 करोड़ रुपये और टेलीविजन चैनलों पर जारी विज्ञापनों पर 315.04 करोड़ रुपये खर्च किए.

वहीं वर्ष 2015-16 में डीएवीपी के माध्यम से रेडियो आकाशवाणी पर जारी विज्ञापनों पर 17.09 करोड़ रुपये, एफएम रेडियो पर जारी विज्ञापनों पर 94.54 करोड़ रुपये और टेलीविजन चैनलों पर जारी विज्ञापनों पर 281.85 करोड़ रुपये खर्च किए गए.

राठौड़ ने यह भी बताया कि डीएवीपी के माध्यम से वित्त वर्ष 2015-16 में सोशल मीडिया में विज्ञापनों पर 21,66,000 रुपये व्यय हुए.

मोदी सरकार ने विज्ञापन और प्रचार पर खर्च किए 3,755 करोड़ रूपए- 

आम आदमी पार्टी द्वारा प्रचार के लिए किए गए खर्च पर सवाल उठाने वाली मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से प्रचार और विज्ञापनों पर 3,755 करोड़ रुपए के खर्च की बात का ख़ुलासा एक आरटीआई में हुआ है.

बीते दिनों प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार की ख़बर के अनुसार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने एक आरटीआई के जवाब में बताया कि इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट मीडिया और आउटडोर पब्लिसिटी में मोदी सरकार ने अप्रैल 2014 से अक्टूबर 2017 के बीच 37,54,06,23,616 रुपए खर्च किए हैं.

यह आरटीआई ग्रेटर नोएडा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता रामवीर तंवर ने लगाई थी, जिसके जवाब में यह खुलासा हुआ है. इसकी एक प्रति समाचार एजेंसी आईएएनएस ने जारी की है.

सूचना के अनुसार केंद्र सरकार ने 1,656 करोड़ रुपए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर प्रचार में खर्च किए हैं, जिसमें कम्युनिटी रेडियो, डिजिटल सिनेमा, दूरदर्शन, इंटरनेट, मैसेज सहित टीवी संसाधन भी शामिल हैं. प्रिंट मीडिया में प्रचार के लिए मोदी सरकार द्वारा 1,698 करोड़ रुपए खर्च किए हैं.

आउटडोर प्रचार में होने वाला खर्च 399 करोड़ के आस पास है. इसमें होर्डिंग, पोस्टर, बुकलेट और कैलेंडर आदि के माध्यम से प्रचार शामिल है. प्रचार पर हुए इस ख़र्च की तुलना की जाये तो यह खर्च केंद्र सरकार की कई मंत्रालयों को दिए जाने वाले वार्षिक बजट और सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रमों से भी अधिक है.

कुल मिलाकर गुजरात में भाजपा ने सत्ता भले ही हासिल कर ली हो लेकिन जिग्नेश मेवाणी, हार्दिक पटेल और अल्पेश ठाकोर की तिकड़ी ने प्रधानमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष के गृह राज्य में बीजेपी को तीन अंकों में नहीं पहुंचने दिया और 2012 के चुनाव के मुकाबले उनके विजय रथ को भारी नुकसान पहुंचाया है।

3 लड़कों का दम: मोदी-शाह के गुजरात में BJP को 16 सीट का नुकसान, 22 सालों में सबसे कम सीटें मिलीं

विधायक बनते ही जिग्नेश मेवाणी की चुनौती, कह दो BJP से जमकर लड़ेंगे, अब 2019 दूर नहीं है

पटेल प्रतिनिधि सभा का गांव से प्रतिभा खोजो अभियान, प्राइमरी पाठशाला में आयोजित हुआ सम्मान समारोह

हार्दिक पटेल के आरोपों के बाद, सूरत के स्ट्रांग रूम में मिला WI-FI नेटवर्क, प्रशासन ने की कार्रवाई

नफ़रत से भरा हुआ उन्माद ही इस देश में अब सामान्य अवस्था है और भारत का ‘न्यू इंडिया’ है !

Related posts

Share
Share