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मीडिया का जातीय चरित्र: गिरफ्तार होते ही भीम आर्मी के मुखिया को घोषित कर दिया अपराधी

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण यानि भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर की गिरफ्तारी की खबर को लिखने वाले पत्रकारों के अंदर का जातिय मैल देखिए. चंद्रशेखर रावण को ऐसा लिखा गया जैसे वो कोई सजायाफ्ता मुजरिम हो और कोर्ट ने चंद्रशेखर के अपराध साबित कर दिए हों.

अभी पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है आरोप पत्र अभी दाखिल नहीं हुआ है. आरोप पत्र के बाद भी  अभी कोर्ट में आरोप लगने और साबित होने बाकी हैं. लेकिन मीडिया ने लिखना शुरू कर दिया है सहारनपुर को सुलगाने वाला रावण गिरफ्तार.

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सबसे बड़ी बात है कि चंद्रशेखर आजाद वकील है सामाजिक कार्यकर्ता है. वंचितों के हक के लिए लड़ने वाला एक आंदोलनकारी है. चंद्रशेखर के लिए एक तरफा सुलगाने वाला जलाने वाला शब्द कहां तक जायज हैं.

मीडिया के जातीय चरित्र को समझने के लिए गिरफ्तारी के बाद की हेडिंग देखिए-

सहारनपुर को सुलगाने वाला ‘रावण’ गिरफ्तार-  अमर उजाला डिजिटल डेस्क

भीम आर्मी का “रावण” गिरफ्तार – अमर उजाला सहारनपुर

सहारनपुर हिंसा का मास्‍टरमाइंड ‘रावण’ गिरफ्तार, जिले में अलर्ट – अमर उजाला लखनऊ

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सहारनपुर हिंसा का मास्टरमाइंड चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण गिरफ्तार-  न्यूज 18 वेबसाइट

..तो गर्लफ्रेंड की वजह से गिरफ्तार हुआ सहारनपुर हिंसा का ‘रावण’ – न्यूज 18 वेवसाइट

गर्लफ्रेंड की सूचना पर दबोचा गया चंद्रशेखर, नंबर ट्रेस करते हुए पहुंची थी पुलिस-  हिन्दुस्तान सहारनपुर

सहारनपुर जातीय हिंसा का आरोपी ‘रावण’ गिरफ्तार, बढ़ाई गई कोर्ट की सुरक्षा

इस बारे में फेसबुक पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता मोहम्मद जाहिद लिखते हैं-

चंद्रशेखर की गिरफ़्तारी को भांड मीडिया ऐसे बता रहा है, जैसे वे सजायाफ्ता हों. भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर की गिरफ्तारी को कवर कर रही भांड मीडिया उन्हें सम्मानसूचक शब्दों की जगह असम्मान सूचक शब्दों के साथ ऐसे दिखा रही है जैसे चंद्रशेखर आजाद अदालत द्वारा सजायाफ्ता घोषित अपराथी हों।

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“भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर गिरफ्तार”

माफ कीजिएगा “चंद्रशेखर” एक आंदोलनकारी हैं जो अपने समाज के हक के लिए लड़ रहे हैं।  फिर भी “का” की जगह “के” करने में असफल भाँड मीडिया की मानसिकता दिखाई दे गयी।

दरअसल प्रोफेसर मनु की औलादों की नजर में दलित और मुसलमान इज़्ज़त पाने के अधिकारी ही नहीं हैं। “के” की जगह “का” इसीलिए प्रयोग किया जाता है।

मुझे याद है कि जीवन भर भारत की दोस्ती निभाने वाले इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के लिए भी “का” प्रयोग इसी भाँड मीडिया ने किया और खबरें चलाईं  “इराक का पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन पकड़ा गया”

कर्नल गद्दाफ़ी सदैव से भारत के हितैषी रहे यहाँ तक कि पाकिस्तान का विरोध भारत के हित के लिए करते रहे , जीवन भर उनके लिए भी खबरें चलीं “लीबिया का राष्ट्रपति कर्नल गद्दाफ़ी मारा गया”

बंगलादेश की एक आतंकवादी घटना जिसमें झूठ उड़ाया गया कि आतंकवादी डा. ज़ाकिर नाईक का फेसबुक फालोवर था , डॉ. ज़ाकिर नाईक बस इतने से आतंकवादी हो गये।

उनके लिए भी “के” की जगह “का” प्रयोग किया गया बल्कि और गंदे शब्द लिखे गए.  भगवा गुंडे , गो आतंकी , और तमाम बलात्कारी बाबा इनके लिए सम्मान के योग्य हैं।

 

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