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VIP कल्चर खत्म ? CM रमन सिंह की बहू के लिए खाली करा दिया सरकारी अस्पताल का पूरा फ्लोर

रायपुर/नई दिल्ली, नेशनल जनमत ब्यूरो।

मोदी सरकार ने वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करते हुए मंत्रियो, अधिकारियों की गाड़ियों से लाल बत्ती हटवा तो दी लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या केवल लाल बत्ती हटवा देने भर से वीआईपी मूवमेंट के समय लोगों को होने वाली परेशानियां कम हुई हैं?

जमीनी हकीकत देखें तो लाल बत्ती हटवाने और वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात मंचों से करने से किसी नेता या वीआईपी का मानसिकता में कोई बदलाव नहीं आया।

बिना लाल बत्ती के उसके आगे-पीछे चलने वाले पुलिस एस्कॉर्ट में बज रहे तीव्र ध्वनि वाले हूटर और डंडा लहराते पुलिस वाले लोगों को मन में आज भी वही दहशत पैदा कर रहे हैं जो लाल बत्ती के साथ हुआ करती थी।

नेताओं के इसी वीआईपी कल्चर खात्मे की नौटंकी के चक्कर में कई बार आम जनता को ज्यादा कष्ट झेलने पड़ जाते है। हालिया मामला छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह से जुड़ा हुआ है।

सीएम की बहू के लिए खाली हुआ फ्लोर- 

दरअसल सीएम रमन सिंह ने राजधानी रायपुर के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ. भीमराव अंबेडकर मेमोरियल में बेटे अभिषेक की पत्नी ऐश्वर्या को मैटरनिटी वॉर्ड में भर्ती कराया था।

यहां तक तो ठीक था सीएम को तारीफ भी मिल रहीं थीं लेकिन दिक्कत तो वहां के मरीजों और उनके तीमादारों को हुई। सीएम की बहू के लिए हॉस्पिटल का एक पूरा फ्लोर ही खाली करा दिया गया।

सूबे में विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इस मामले पर सवाल उठाते हुए सरकारी हॉस्पिटल में दूसरे मरीजों को नजरअंदाज कर बेटे की पत्नी को वीआईपी ट्रीटमेंट दिलवाने का आरोप लगाया है।

वहीं भाजपा ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए इसे हॉस्पिटल के लिए सम्मान की बात बताया है। ऐसा इसलिए हैं क्योंकि किसी महंगे निजी हॉस्पिटल की जगह मुख्यमंत्री ने सरकारी हॉस्पिटल को चुना।

एक बेड पर दो-दो मरीजो को लेटना पड़ा- 

गौरतलब है कि जस वक्त मुख्यमंत्री की बहू की डिलीवरी हुई उसी वक्त सामान्य और गरीब परिवार की गर्भवती महिलाओं को एक दूसरे के साथ बिस्तर साझा करना पड़ा। यही नहीं अस्पताल के डॉक्टरों के कमरे को भी पुलिस कंट्रोल रूम में तब्दील कर दिया गया।

अस्पताल की दूसरी मंजिल पर मुख्यमंत्री की बहू ऐश्वर्या की डिलीवरी हुई, लेकिन वहां सुरक्षा के इंतजाम इतने कड़े कर दिए गए कि आम आदमी के लिए मुश्किलें खड़ी हो गईं।

वहीं अस्पताल के अधीक्षक ने कहा कि हमारे लिए गर्व की बात है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री ने हमारे अस्पताल को चुना। हालांकि उन्होंने दिक्कतों का जिक्र करते कहा कि हॉस्पिटल में 700 बिस्तरों ही उपलब्ध हैं लेकिन यहां 1200 मरीज भर्ती हैं। जगह की कमी है।

नया निर्माण हो रहा है लेकिन धीरे धीरे। उन्होंने कहा, ‘मैं स्वीकारता हूं कि प्रसूता वार्ड में दिक्कत हुई तो हमने 30 बेड की अलग से व्यवस्था की है ताकि उन्हें सिंगल बेड दे पाएं।’

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