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ब्राह्मणों को बताया भिखारी तो CM ने मांगा इस्तीफा, फिर कैबिनेट मंत्री को कर दिया बर्खास्त

नई दिल्ली/ भुवनेश्वर, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

सम्मान से जीने का हक तो हर व्यक्ति हर समाज को है, लेकिन लगता है इस देश में सम्मान भी जातियों के हिसाब से तय होता है। किसी जाति को गाली देना भी क्षम्य है तो किसी को भिखारी कह देने से एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की कुर्सी भी चली जाती है।

ऐसा ही जातिगत स्वाभिमान का मामला उड़ीसा में सामने आने पर सोशल मीडिया पर फिर से एक बार मुद्दा छिड़ गया कि जब लालू प्रसाद यादव की भैंस पर बैठकर फोटो बनाई गई थी तो आपत्ति क्यों नहीं जताई गई।

मनुस्मृति में, कहानियों में, प्रचलित मुहावरों में विभिन्न जातियों को लेकर जो अपमानजनक टिप्पणी की गई है, उसके लिए विरोध प्रदर्शन करने की जहमत क्यों किसी ने नहीं उठाई।

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने को लेकर कृषि मंत्री दामोदर राउत (76) को उनके मंत्रालय से बर्खास्त कर दिया।

एक मंत्री ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा, ‘राउत से इस्तीफा देने के लिए कहा गया था लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। बाद में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया।’

वहीं मुख्यमंत्री पटनायक ने संवाददाताओं से कहा, ‘किसी भी जाति, नस्ल या धर्म के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने वाले किसी व्यक्ति को मैं सख्ती से नामंजूर करता हूं। मैंने डॉ (दामोदर) राउत को मंत्रिपरिषद से बर्खास्त कर दिया है।’

राउत बीजू जनता दल (बीजद) के उपाध्यक्ष भी हैं। पटनायक ने आगे कहा, ‘उनकी बर्खास्तगी को स्वीकार करने के लिए राज्यपाल को शुक्रवार शाम में एक पत्र भी भेजा गया।’ हालांकि, राउत इस पर प्रतिक्रिया जाहिर करने के लिए उपस्थित नहीं हो सके क्योंकि वह अपने निर्वाचन क्षेत्र से दूर थे।

खबरों के अनुसार उन्होंने 17 दिसंबर को मल्कानगिरि में एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समुदाय के खिलाफ अपमानजक टिप्पणी की थी, जिसके बाद राज्यव्यापी प्रदर्शन हुए थे।

क्या कहा था मंत्री ने- 

पारादीप से 76 वर्षीय विधायक ने कहा था, ‘राज्य के किसी भी हिस्से में कोई आदिवासी भीख नहीं मांग रहा, जबकि बस पड़ाव जैसे स्थानों पर ब्राह्मणों को भीख मांगते कोई भी देख सकता है।’ राज्य में ब्राह्मणों की आबादी नौ फीसदी है। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर धरना प्रदर्शन किया था।

गौरतलब है कि सात बार के विधायक राउत पहले भी विवादों में रहे हैं। उन्होंने अक्तूबर में भाजपा की एक महिला नेता और आंगनवाड़ी सेविकाओं के खिलाफ विवादित टिप्पणी की थी। पिछले 17 सालों में ऐसा तीसरा मौका है जब विभिन्न कारणों से राउत का मंत्री पद वापस लिया गया है।

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