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अब चीन में भी पढ़े जाएंगे बाबा साहेब के विचार, पहली बार चाइनीज में होगा अनुवाद

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो

बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को मानने वालों के लिए एक शानदार और गर्व करने वाली खबर है. खबर भारत-चीन से जुड़ी हुई है. दरअसल अब बाबा साहेब के विश्व वंधुत्व और सामाजिक समता के सिद्धान्त और विचार चीन में भी पढ़े जाएंगे. पहली बार बाबा साहेब की किताबों का अनुवाद चाइनीज भाषा में कराने के लिए चीन की शेनझिंग यूनिवर्सिटी ने पहल की है.

चीन की विख्यात यूनिवर्सिटी कराएगी अनुवाद-

वरिष्ठ अधिवक्ता नितिन मेश्राम ने बताया कि जेएनयू के प्रोफेसर वाई एस अलोने ने बाबा साहेब की जीवन दर्शन से जुड़ी कई किताबें शेनझिंग यूनिवर्सिटी के प्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई है. इसके साथ ही प्रो. अलोने की किताब “Buddhist Caves of Western India: Forms and Patronage” किताब का भी चाइनीज में अनुवाद करने के एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए. यूनीवर्सिटी के अधिकारियों ने कहा कि हम इन किताबों और विचारों के लिए अलग से “अंबेडकर रीडर्स”  मंच भी बनाएंगे.

कौन हैं प्रोफेसर वाईएस अलोने-

प्रोफेसर वाईएस अलोने दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ आर्ट्स ऐंड ऐस्टथेटिक्स में प्रोफेसर हैं.दर्जनों पुस्तकों के लेखक हैं. कई राष्ट्रीय सम्मानों से पुरस्कृत प्रो. अलोने आईसीसीआई की तरफ से सेनझेन यूनिवर्सिटी चीन के विजटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं. भारत सरकार की तरफ से नीति आयोग के संस्कृति संबंधी ग्रुप के विशेषज्ञों में शामिल है. बाबा साहेब और गौतम बुद्ध के विचारों से प्रभावित हैं इसलिए देशभर में उनके विचारों को फैलाने के लिए कार्यक्रमों में जाते हैं. प्रोफेसर होने के साथ ही आपको सामाजिक चिंंतक और विचारक के बतौर जाना जाता है.

बाबा साहेब भारत ही नहीं विश्व में सामाजिक समता के प्रणेता बन गए हैं-

भारतीय संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर बाबा साहेब के नाम से लोकप्रिय हैं. भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक के रूप में लोगों के दिलों पर राज करते हैं.उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और दलितों के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया. श्रमिकों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन किया।

वे स्वतंत्र भारत के प्रथम कानून मंत्री एवं भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे. कोलंबिया विश्वविद्यालय और लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स दोनों ही विश्वविद्यालयों से अर्थशास्त्र में डॉक्टरेट की उपाधि ली. उन्होंने लॉ, अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान के शोध कार्य में ख्याति प्राप्त की. जीवन के प्रारम्भिक करियर में वह अर्थशास्त्र के प्रोफेसर रहे एवं वकालत की. 1956 में उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया. 1990 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से मरणोपरांत सम्मानित किए गए.

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