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गुजरात के छुपे रुस्तम: शरद यादव गुट के छोटू भाई ने चुनाव से 7 दिन पहले बनाई पार्टी, 2 सीटें जीतीं

नई दिल्ली, नीरज भाई पटेल ( नेशनल जनमत) 

गुजरात विधानसभा चुनावों में मोदी-राहुल के अलावा तीन और नाम थे जो चर्चा के केन्द्र बिंदु में रहे। कभी हार्दिक, कभी जिग्नेश तो कभी अल्पेश। इन तीनों नामों से अलग एक ऐसा नाम भी है जो सुर्खियों में रहे बिना गुजरात का छुपा रुस्तम है। वो नाम है छोटू भाई वसावा का।

छोटू भाई वसावा यानि एक समाजवादी नेता जो बीजेपी को लगातार हराते चले आ रहे हैं। छोटू भाई ने चुनाव में सिर्फ 2 सीटें ही जीतीं हैं. पर उनकी जीत बड़ी है. जीत इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने चुनाव से सिर्फ एक हफ्ता पहले ही अपनी नई पार्टी बनाई थी. नाम रखा था, भारतीय ट्राइबल पार्टी.

शरद यादव गुट के है छोटू भाई- 

भारतीय ट्राइबल पार्टी बनाकर उन्होंने 2 सीटें जीतीं, एक सीट उनकी खुद की है तो दूसरी उनके बेटे महेश छोटू भाई वसावा की. छोटू भाई झगड़िया सीट से तो महेश डेडीपाडा सीट से जीतें हैं. आदिवासी नेता छोटू भाई की अपने समुदाय के बीच काफी पहुंच और दबदबा है. वह फायर ब्रैंड नेता कहे जाते हैं.

अपनी पार्टी बनाने के पहले वे जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में थे. लेकिन नीतीश के बीजेपी के साथ जाते ही नीतीश कुमार से अलग हो गए थे। उन्होंने बीजेपी के रवजी भाई को 48 हजार से अधिक वोटों से हराया है.

शरद यादव गुट से बने थे राष्ट्रीय अध्यक्ष- 

जेडीयू से अलग होने के बाद शऱद यादव गुट ने जेडीयू पर दावा जताते हुए राष्ट्रीय अधिवेशन बुलाया था। जिसमें सर्वसम्मति से समाजवादी नेता छोटू भाई वसावा को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने शरद गुट के दावे को खारिज करते हुए नीतीश कुमार की जेडीयू को ही असली पार्टी करार दिया।

छोटू भाई के लिए प्रचार करने शरद यादव, अरुण श्रीवास्तव, अली अनवर अंसारी समेत जेडीयू के कई पुराने नेता पहुंचे थे। आपको बता दें कि राज्यसभा चुनाव के दौरान छोटू भाई वसावा ने जेडीयू की ओर से कांग्रेस के अहमद पटेल को वोट डाला था. जिसके बाद JDU ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था.

जेडीयू से जीतते आ रहे थे छोटू भाई- 

मुख्य राजनीतिक दल कांग्रेस और बीजेपी के दायरे से बाहर छोटू भाई जनता दल यूनाइटेड का खाता गुजरात में खोलते रहे हैं। अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित इस सीट पर लगातार 6 बार से छोटूभाई वसावा जीतते आ रहे हैं.

1990 में उन्होंने जनता दल उम्मीदवार के तौर पर यहां जीत दर्ज की थी. जिसके बाद 1995 में निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर बाजी मारी. 1998 में फिर जनता दल और उसके बाद लगातार जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर छोटूभाई वसावा जीतते रहे. लेकिन छोटू भाई के जेडीयू से अलग होने के बाद उसका नाम लेवा कोई नहीं रहा।

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