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CM का ‘रामराज’ ‘ठाकुरराज’ बनकर रह गया है, योगी से यूं मुस्कुराकर मिलने पहुंचे रेप के आरोपी MLA कुलदीप सेंगर

लखनऊ, नेशनल जनमत ब्यूरो। 

उन्नाव रेप केस में सीएम आदित्यनाथ उर्फ अजय सिंह बिष्ट के स्वजाति विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर रेप का आरोप है। हम पत्रकार हैं न्यायाधीश नहीं इसलिए हम किसी को दोषी या आरोप मुक्त साबित नहीं कर रहे लेकिन देश के जागरूक नागरिक होने के नाते हम इस रामराज्य वाली जातिवादी सरकार से कुछ सवाल तो पूछ ही सकते हैं।

ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर नियुक्तियों और नाैकरियों में मौजूदा सरकार के जातिवादी रवैये को देखते हुए नेशनल जनमत का पहला सवाल इस सरकार से हैं कि यही आरोप अगर किसी ओबीसी-एससी या अल्पसंख्यक विधायक/सांसद पर होता तो क्या वो यूं ही मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचने की हिम्मत करता।

दूसरा सवाल जातिवादियों के संगठित गिरोह यानि तथाकथित मुख्यधारा के पत्रकारों से है कि अगर यहीं विधायक दलित-पिछड़ा या अल्पसंख्यक होने के साथ ही अगर सपा या बसपा जैसी किसी पार्टी का होता तो आप लोग तो कोर्ट से पहले ही उसे आरोपी साबित कर उसका चीरहरण कर देते। लेकिन मौजूदा मामले में ऐसा कुछ नहीं हुआ।

सीएम से मिलने विजयी मुस्कान के साथ पहुंचे ठाकुर साहब- 

समाजवादी पार्टी से पलटी मारकर चुनाव से ऐन पहले बीजेपी में पहुंचे उन्नाव से विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को तमाम हो हल्ले के बाद  सीएम योगी ने तलब किया।

बीजेपी विधायक मुख्यमंत्री से मिलने लखनऊ आए, मिलने के लिए जब पंचम तल जा रहे थे तब उनके चेहरे पर ऐसी मुस्कान थी जैसे वो चुनाव जीतकर अभी अभी आये हों।

वो भी तब जब उनके क्षेत्र की ही रेप पीड़िता का रो रोकर बुरा हाल है और उसके पिता की हवालात में मौत हो चुकी है। वो पिछले एक साल से इंसाफ की मांग के लिए सीएम योगी से लेकर सभी के दरवाजे खटखटा आई है।

क्या है आरोप- 

विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक युवती ने आरोप लगाया कि कुछ साथियों के साथ मिलकर विधायक ने उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया। इस बात की शिकायत महिला ने सीएम योगी से भी की मगर सीएम योगी ने इंसाफ मिलेगा कहकर उसे टाल दिया। वहीं आरोप लगाने वाली युवती के पिता की जेल में संदिग्ध मौत होने के बाद बवाल और बढ़ गया।

सरकार की किरकिरी होते देख सीएम योगी ने मामले की जांच के आदेश देते हुए विधायक को तलब कर लिया। पत्रकारों ने इस मामले पर कुलदीप सेंगर से सवाल किया तो उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया की ये निम्म स्तर के लोगों की साजिश है,और मैं हर तरह की जांच के लिए तैयार हूँ।

नेशनल जनमत के सवाल- 

जब ये बयान दे रहे तो उनके चेहरे पर सत्ता का नशा का साफ़ झलक रहा था। ऐसा मान भी लिया जाये की उन्होंने कुछ नहीं किया है मगर क्या उस महिला मुख्यमंत्री आवास के सामने जाकर आत्मदाह करना एक नाटक था जब वो रो रोकर इंसाफ की मांग कर रही थी। क्या उन्नाव के विधायक होने के चलते उनका फ़र्ज़ नहीं बनता की वो इस मामले में ज़रा सी सहानभूति दिखाते ?

उन्नाव में करीब पांच दिन पहले किशोरी के पिता को विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के भाई और उसके गुर्गों ने न्यायालय में लंबित चल रहे मुकदमे को वापस लेने से इनकार करने पर पीट-पीट कर अधमरा कर दिया था।

इसके बाद माखी थाना क्षेत्र पुलिस ने उसके खिलाफ ही मुकदमा दर्ज कर उसको जेल भेज दिया था, जबकि काफी दबाव के बाद किशोरी की मां की तरफ से दी गई तहरीर में विधायक के भाई का नाम पुलिस ने दर्ज नहीं किया था। क्या रामराज जाति देखकर आता है ?

अगर सरकार समय रहते कार्रवाई करती तो क्या उस युवती के पिता की जेल में मौत होती? जिसे शायद विधायक के भाई और गुर्गों ने पीटने के बाद आर्म्स एक्ट में जेल भिजवा दिया था ?

अगर उन्होंने कुछ नहीं किया तब भी। क्या असल रामराज्य का मतलब यही है की एक महिला अपनी जान देने की बात कर रही है वही दूसरी तरफ उसी जिले से आने वाला जनता का प्रतिनिधि ऐसे मुस्कुराते हुए चेहरे के साथ नज़र आये?

 

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