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अच्छे दिनः यूपी में प्राइमरी अध्यापक बनने की राह और भी कठिन, TET के बाद भी लिखित परीक्षा अनिवार्य

नई दिल्ली,नेशनल जनमत ब्यूरो।

यूपी सरकार की लखनऊ में 26 सितंबर (मंगलवार) को कैबिनेट मीटिंग हुई। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट मीटिंग में कई फैसले लिए गए।

मीटिंग में जो फैसले लिए गए उनमें सबसे अहम फैसला बीएड और टीईटी करने वालों के लिए झटका है। कैबिनेट की बैठक में फैसले लिया गया कि टीईटी पास अभ्यर्थियों की अब सीधे भर्ती नहीं होगी, प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापक बनने के लिए योगी सरकार ने लिखित परीक्षा को अनिवार्य कर दिया है।

इससे पहले बीएड और टीईटी करने वाले अभ्यर्थियों को सहायक टीचर बनने के लिए मेरिट के आधार पर सीधे चुना जाता था लिखित परीक्षा का चलन नहीं था। अब मेरिट बनाते समय लिखित परीक्षा के भी अंक जोड़े जाएंगे।

बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए सरकार के प्रवक्ता व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने मीडिया से कहा कि योगी सरकार प्राथमिक स्कूलों में बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने के लिए कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षा टीईटी क्वालीफाई करने के बाद देनी होगी। शिक्षक भर्ती की मेरिट में लिखित परीक्षा के भी अंक जोड़े जाएंगे।

शर्मा ने कहा कि अब प्रदेश में लिखित परीक्षा के माध्यम से बेसिक शिक्षकों की भर्ती होगी। लिखित के लिए 60 और शैक्षिक योग्यता के आधार पर 40 अंक दिए जाएंगे। लिखित परीक्षा में सिर्फ टीईटी पास अभ्यर्थी ही बैठ सकेंगे।

वहीं शिक्षामित्रों के मामले में मंत्री ने कहा कि सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन करेगी। हालांकि शिक्षामित्रों को भर्ती में भारांक का लाभ देने संबंधी प्रस्ताव को भी कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। शिक्षामित्रों को अधिकतम 10 साल के लिए 25 अंक मिलेंगे और प्रतिवर्ष के अनुभव के आधार पर उन्हें ढाई अंक मिलेंगे।

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