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विज्ञान के युग में ‘महंत’ आदित्यनाथ का अंधविश्वास, बोले गूलर के पेड़ काट दो ये ‘अशुभ’ होते हैं

नई दिल्ली। नेशनल जनमत ब्यूरो।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ / धर्माचार्य महंत आदित्यनाथ से प्रदेश की कानून व्यवस्था संभाली नहीं जा रही हैं। ऐसे में पीएम प्रदेश को शुभ-अशुभ धर्म- अधर्म के फेर में फंसाए रखना चाहते हैं। अब पता नहीं सीएम की हैसियत से कि किसी मंदिर के महंत की हैसियत से सीएम ने कावंड यात्रा के मार्ग से धार्मिक मान्यता के अनुसार अशुभ माने जाने वाले गूलर के पेड़ को कटवाने का आदेश दिया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस तरह का आदेश देकर सीधे तौर पर अंधविश्वास औऱ पांखड़ को बढ़ावा दिया है। भारत का संविधान कहता है कि “राज्य का कर्तव्य होगा कि वह अपने नागरिकों में वैज्ञानिक सोच का प्रसार करे,” पर सीएम योगी ने भारत के संविधान की मूल भावना पर प्रहार करते हुए पाखंड फैलाने वाला काम शुरू कर दिया है।

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पाखंड और अंधविश्वास फैलाकर सीएम योगी कर रहे संविधान की मूल भावना का अपमान- 

गूलर के पेड़ को काटने का आदेश देकर सीएम योगी ने पद ग्रहण करने के दौरान ली संविधान की शपथ का खुला उल्लंघन कर दिया है। सीएम पद की शपथ लेते समय सीएम ने कहा था कि वो संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा रखेंगे, पर सीएम योगी ने भारत के संविधान की मूल भावना के खिलाफ काम करते हुए पाखंड और अंधविश्वास फैलाते हुए कांवडियों की यात्रा में पड़ने वाले गूलर के पेड़ों को काटने का आदेश दे दिया। गूलर के पेड़ को हिंदू मान्यता के अनुसार अशुभ माना जाता है।

गूलर के पेड़ को अशुभ मानकर हिंदू धर्म को प्रश्रय देकर भी किया संविधान की मूल भावना का विरोध- 

इसके साथ ही संविधान इस बात को भी सुनिश्चित करता है कि भारत एक सेकुलर राज्य होगा और किसी धर्म विशेष की मान्यताओं और धार्मिक क्रियाकलापों को प्रश्रय नहीं देगा। पर गूलर का पेड़ तो सिर्फ हिंदू मान्यता के अनुसार ही अशुभ है, देश के अन्य धर्मौं की मान्यताएं गूलर के पेड़ के शुभ-अशुभ होने को लेकर चुप हैं। तो सीएम योगी ने संविधान का खुला उल्लंघन करते हुए सिर्फ हिंदू मान्यता के अनुसार अशुभ माने जाने वाले गूलर के पेड़ को काटने का आदेश देकर एक तरह से हिंदू धर्म की मान्यताओं को प्रश्रय देने का काम किया है।

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कांवड़ियों में ऐसी मान्यता है कि गूलर के पेड़ के नीचे यात्रा करने से यात्रा सफल नहीं होती- 

आपको बता दें कि कांवड़ मेले में हरिद्वार से जल भरकर जाने वाले कांवड़िये गूलर के पेड़ के नीचे से जाने से बचते हैं। मान्यता है कि अगर गूलर के पेड़ के नीचे से शिवभक्त कांवड़ लेकर जाते हैं तो उनकी यात्रा सफल नहीं होती। हालांकि गूलर को लेकर दो तरह की मान्यताएं हैं। कुछ लोग इसे देववृक्ष मानते हैं और इसकी जड़ से लेकर फूल (दुर्लभ) तक को शुभ मानते हैं। वहीं गूलर के पेड़ में कई औषधीय गुण भी हैं।

कांवड़ियों की मान्यता के चलते सीएम ने दिया गूलर का पेड़ काटने का आदेश- 

कांवड़ियों के अपवित्र माने जाने की मान्यता के चलते सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, ताकि उन्हें असुविधा न हो। इसके अलावा सीएम ने कहा कि मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं। साथ ही सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हों। योगी ने कहा, कांवड़ यात्रा में व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए कि कांवड़ियों को बदलाव नजर आए। इसके लिए धन की कमी आड़े नहीं आएगी।

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सर्वोच्च न्यायालय के नियम का पालन करें कावड़िये- 

आपको बता दें कि कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ असामाजिक तत्व भी यात्रा में शामिल होकर मार्ग में मिलने वाले यात्रियों से बेहूदगी करते हैं। कई जगह कांवड़ियों द्वारा महिलाओं को छेड़ने की खबरें भी आ चुकी हैं। कई बार लोगों की कांवडियों के साथ स्थानीय लोगों की हिंसक झड़पें भी हुई हैं। डीजे बजाने के नाम पर कांवड़ यात्रा के दौरान तेज आवाज में अश्लील गाने भी बजाए जाते हैं, जिससे कई बार लोगों को परेशानी होती है। मामला इस हद बढ़ चुका है कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट को गाइड लाइन तक बनानी पड़ी है।

इस बार सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी यात्रा के दौरान डीजे बजाने पर कहा, सर्वोच्च न्यायालय की व्यवस्थाओं का पालन करते हुए कांवड़ यात्रियों को एक निश्चित डेसिबल तक ही ध्वनि प्रसारकों की अनुमति दी जाए। बिना अनुमति किसी को डीजे आदि न बजाने दिया जाए। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि डीजे पर फिल्मी, अश्लील व भड़काऊ गाने न बजें। सीएम ने महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखने की भी सख्त हिदायत दी है।

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सोशल मीडिया पर आ रही तीखी प्रतिक्रिया-

सीएम योगी के संविधान विरोधी कदम की सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रिया आ रही है। प्रख्यात सामाजिक चिंतक हिमांशु कुमार अपनी फेसबुक वॉल पर लिखते हैं कि ,

योगी आदित्यनाथ ने कांवड़ियों के रास्ते में आने वाले गूलर के वृक्ष काटने का आदेश दिया है,

क्योंकि मुख्यमंत्री की समझ के हिसाब से गुलर का वृक्ष अशुभ होता है,

आज मैंने फिर से पढ़ा की मुख्यमंत्री ने फिर कहा है की बुरी आत्माओं को दूर रखने के लिए और बुरे ग्रहों के प्रकोप से बचने के लिए नवग्रह वृक्ष और शुभ वृक्ष लगाने चाहिए,

विज्ञान के अनुसार कोई भी वृक्ष अशुभ नहीं होता,

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खास तौर से गुलर तो बिल्कुल भी अनुपयोगी पेड़ नहीं है,

योगी आदित्यनाथ ने जो कहा है वह ज्ञान और विज्ञान के खिलाफ बात है,

ऐसी बातें सिर्फ कोई अंधविश्वासी व्यक्ति ही कह सकता है,

भारत का संविधान कहता है कि “राज्य का कर्तव्य होगा कि वह अपने नागरिकों में वैज्ञानिक सोच का प्रसार करे,”

लेकिन जिस तरह शासन के शीर्ष पर बैठे हुए लोग अंधविश्वास और अवैज्ञानिक मूढ़ता का प्रचार कर रहे हैं,

वह न केवल युवा मस्तिष्क को पीछे ले जाएगी बल्कि यह एक संविधान विरोधी कृत्य भी है,

संविधान की शपथ लेने वाला व्यक्ति संविधान के विरुद्ध काम नहीं कर सकता,

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जनता ने अपने प्रदेश का विकास करने के लिए एक मुख्यमंत्री को चुना है,

ना की पूजा पाठ करवाने और शुभ-अशुभ का विचार करवाने के लिए किसी ज्योतिषी को नियुक्त किया है,

यह बहुत ही शर्मनाक हालत है की भारत के सबसे बड़े प्रदेश का मुख्यमंत्री इस तरह की मूर्खतापूर्ण और अवैज्ञानिक बातें करे,

इससे न सिर्फ जनता का नुकसान होगा बल्कि पूरी दुनिया में भारत की खिल्ली भी उड़ेगी,

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