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स्वास्थ्य विभाग: फर्जी चैकों पर साइन ना करने की सजा, जयविजय सचान का ही हो गया ट्रांसफर

लखनऊ। नेशनल जनमत ब्यूरो।

11 साल से एक ही ब्लॉक में जमे डॉ. एके सिंह के भ्रष्टाचार की परतें खोलना सीएमओ आगरा को इतना नागवार गुजरा की नाराजगी में स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी का ही तबादला दूर के ब्लॉक में कर दिया. कुछ दिनों पहले तक सैंया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के प्रभारी थे डॉ.एके सिंह. सीएमओ की कृपा से इनका धंधा भी खूब फल फूल रहा था.

सब कुछ बढ़िया चल रहा था. बताते हैं कि डॉ. एके सिंह के सुविधा शुल्क से उच्चाधिकारी भी खुश रहते थे. यहां तक तो सब ठीक था लेकिन उसी सीएचसी में तैनात थे स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी जयविजय सिंह सचान. बस खेल यहीं से खराब हो गया. जय विजय सिंह ने डॉ.एके सिंह के बनाए फर्जी चैकों पर साइन करने से मना कर दिया तो सीएमओ ने जयविजय सचान को ही वहां से चलता कर दिया.

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डॉ. एके सिंह का खेल सजा जयविजय सिंह को-

27 अप्रैल 2016 को एसडीएम खेरागढ़ के निरीक्षण में स्वास्थ्य केन्द्र में काफी गड़बड़ियां सामने आईं थीं. निरीक्षण के दौरान डॉ.ए0के0 सिंह अनुपस्थित मिले थे. बायोमेडिकल वेस्ट का निस्तारण भी ठीक प्रकार से नहीं हो रहा था. स्वास्थ्य केन्द्र में डस्टबिन भी नहीं मिला जिसके चलते मेडिकल वेस्ट जमीन पर बिखरा पड़ा था. निरीक्षण के समय यह बात भी सामने आई थी कि प्रसव के 48 घंटे तक मरीज को सीएचसी में ही रखने के प्रावधान का भी खुला उल्लंघन हो रहा है.इसके बाद एसडीएम की संस्तुति के बाद भी डॉक्टर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई.

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हर माह डीजल के नाम पर 15 हजार रुपये भुगतान लिया जा रहा था.जबकि जेनरेटर कई सालों से चला ही नहीं था. एंटी रैबीज इंजेक्शन मेडीकल में सप्लाई करने जैसे तमाम आरोप थे डॉ. एके सिंह के ऊपर. खैर मीडिया और स्थानीय लोगों के दवाब के चलते जब सीएमओ डॉ.बीएस यादव को लगाा कि अब डॉ. एके सिंह को हटाना पड़ेगा तो उससे पहले ही इस भ्रष्टाचार की लगातार खिलाफत कर रहे जयविजय सचान को हटा दियाा गया.

एनआरएचएम के फर्जी चैकों पर साइन को लेकर था विवाद-

मुख्य विवाद शुरू हुआ एनआरएचएम यानि राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ मिशन के चैकों को लेकर. दरअसल वित्तीय अधिकारी डॉ.एके सिंह और जय विजय सचान दोनों के पास थे. इन चैकों पर दोनों के साइन होने जरूरी थे तभी भुगतान हो पाता. लेकिन जय विजय सिंह ने साइन करने से मना कर दिया बोले फर्जी चैकों पर साइन मैं नहीं करूंगा. बस इसी के बाद से जयविजय सीएमओ के रडार पर आ गए. पहले वित्तीय अधिकारी छीने गए फिर वहां से ट्रांसफर कर दिए गए.

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डीएम ने बनाया था सेक्टर मजिस्ट्रेट सीएमओ ने तबातला कर दिया- 

जयविजय सिंह सचान को जिलाधिकारी आगरा ने यूपी बोर्ड की परीक्षाओँ के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाया था. लेकिन सीएमओ ने इसी खुन्नस के चलते परीक्षाओं के खत्म होने का इंतजार भी नहीं किया और आनन-फानन में जयविजय सिंह सचान को परीक्षाओं के बीच में ही बिना डीएम को बिना सूचित किए ट्रांसफर कर दिया.

सैंया विकास खंड के दर्जनोंं प्रधान हैं जयविजय के समर्थन में-

सैंया विकास खंड में पड़ने वालेे दर्जनों गांव के प्रधान जयविजय सिंह के काम करने के तरीके और व्यवहार से संतुष्ट थे.इसलिए ग्राम पंचायत रहलई सरस्वती देवी, ग्राम प्रधान रघूपुरा कमलेश देवी कुशवाहा, ग्राम प्रधान पनौता प्रेमवती कुशवाहा, ग्राम प्रधान बसई कला संतोष त्यागी और सीएचसी से जुड़ी आशा बहुओं ने अपनी तरफ से डीएम को संबोधित पत्र भी लिखा कि जय विजय सिंह सचान का तबाादला द्वेष भावना के तहत किया गया है इनको वापस सैंया सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भेजा जाए.

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स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी संघ आगरा के अध्यक्ष भी हैं जयविजय

जयविजय सिंह सचान आगरा स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी संघ के अध्यक्ष भी हैं. इसके बाद भी जयविजय सिंह के साथ इस तरह का खेल खेला जा रहा है तो अन्य अधिकारियों की क्या स्थिति होगी. ये सोचना कोई बड़ी बात नहीं है.

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